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परीक्षा पे चर्चा 2.0 / जिंदगी का मतलब ठहराव नहीं, जिंदगी का मतलब है ‘गति’

Photo Courtesy: narendramodi.in/twitter

पीएम नरेंद्र मोदी ने परीक्षा से पहले छात्रों को तनाव मुक्त करने के लिए संवाद किया। इस संवाद को नाम दिया गया ‘परीक्षा पर चर्चा 2.0’ जोकि दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में पीएम मोदी ने बच्चों को तनावमुक्त रहने के टिप्स दिए। पीएम ने पैरंट्स से अपने सपनों का बोझ बच्चों पर नहीं डालने की अपील भी की।

प्रधानमंत्री ने बच्चों से टाइम मैनेजमेंट के साथ नंबरों का बहुत दबाव नहीं लेने की बात की। पीएम बोले, ‘जीवन में बड़ा लक्ष्य होना चाहिए, वहां तक पहुंचने के लिए कई छोटे लक्ष्य तय करें’। उन्होंने कहा … 

• यह परीक्षा जिंदगी की परीक्षा है या क्लास की। अगर हम यह देख लेंगे तो हमारा फोकस बढ़ जाएगा। ऐसा कुछ नहीं है कि 10वीं में गया तो कुछ नहीं होगा। परीक्षा के गलियारे तक ही जिंदगी नहीं होती। उसके आगे भी जिंदगी होती है। मोदी ने कहा, ‘मैं मां-बाप से कहना चाहता हूं। वे मां-बाप विफल हैं जो अपने सपनों को बच्चों पर थोपकर पूरा करवाना चाहते हैं। ऐसा नहीं है कि मां बाप को इसके लिए ट्रेनिंग की जरूरत हो।’

• प्रधानमंत्री ने कहा, ‘बहुत पहले मैंने कविता पढ़ी थी। उसमें एक बात थी। कुछ खिलौनों के टूटने से बचपन नहीं मरा करता। यानी कुछ एग्जाम में दिक्कत हो जाए तो सब खराब नहीं होता। लेकिन जीवन में कुछ कसौटी होती हैं। यह हमें ऊर्जा से भरती हैं। अगर हम अपने आप को कसौटी के तराजू पर झोकेंगे नहीं, तो जिंदगी ठहर जाएगी। जबकि जिंदगी का मतलब होता है तेजी, गति बिना उस जिंदगी का क्या मतलब?’

Photo Courtesy: narendramodi.in

• जिंदगी का मतलब ठहराव नहीं है, जिंदगी का मतलब ही होता है गति। लोग कहते हैं मोदी ने बहुत आकांक्षाएं जगा दी हैं, मैं चाहता हूं कि सवा सौ करोड़ देशवासियों की सवा सौ करोड़ आकांक्षाएं होनी चाहिए। हमें आकांक्षाओं को उजागर करना चाहिए, देश तभी चलता है। अपेक्षाओं के बोझ में दबना नहीं चाहिए। हमें अपेक्षाओं को पूरा करने के लिए अपने आपको सिद्ध करना चाहिए।

• मोदी ने कहा, ‘मां बाप को बच्चों को हमेशा उसी रूप में देखना चाहिए जैसा बचपन में देखते हैं। उसको नीचे गिरता देख, उसे डांटने से कोई परिवर्तन नहीं आएगा। जहां तक अपेक्षाओं का सवाल है तो वो जरूरी हैं। अपेक्षाओं से हमें भी कुछ ज्यादा करने की इच्छा जगती है। अभिभावकों के लिए मेरा यही आग्रह होगा कि आपके सपने भी होने चाहिए अपेक्षाएं भी होनी चाहिए। लेकिन प्रेशर से स्थिति बिगड़ जाती है। प्रेशर से रिएक्शन आता है। ऐसा न हो इसका ध्यान रखना चाहिए। मां बाप ऐसा इसलिए करते हैं क्योंकि वे कभी-कभी अपने यार-दोस्तों या फैमिली फंक्शन में जाते हैं तो अपने बच्चों का रिपोर्ट कार्ड अपना विजिटिंग कार्ड बनाकर ले जाते हैं। यह समस्या की सबसे बड़ी जड़ है। इसकी वजह से आपकी सफलता या विफलता उनकी सोशल लाइफ पर असर डालती है।’

Photo Courtesy: narendramodi.in

• कसौटी बुरी नहीं होती, हम उसके साथ किस प्रकार के साथ निपटते हैं, उस पर निर्भर करता है। मेरा तो सिद्धांत है कि कसौटी कसती है, कसौटी कोसने के लिए नहीं होती है। मोदी ने कहा, ‘अभिभावकों को अपने बच्चों को टेक्नॉलजी के सही इस्तेमाल के बारे में जानकारी देनी चाहिए. तभी बच्चे प्ले स्टेशन छोड़कर प्ले ग्राउंड की ओर जाएंगे।’

• मोदी ने कहा, ‘जब छोटा बच्चा होता है, तो मां बाप उसकी गलतियों का जिक्र मेहमानों से काफी अच्छे से करते हैं। क्योंकि उसकी एक्टिविटी वो नोट करते हैं। लेकिन 7-8 साल की उम्र के बाद हम उसकी एक्टिविटी पर ज्यादा ध्यान नहीं देते। वो 3-6 महीने का जब था तब से लेकर जब तक वह वयस्क नहीं हो जाता तब तक माता-पिता को उसको देखना चाहिए।’

Photo Courtesy: narendramodi.in

• प्रधानमंत्री ने कहा, ‘भारत जैसे देश में यह डिप्रेशन वाली बात जो है वो बहुत परेशान करती है। भारत की जो मूलभूत समाज रचना है उसमें प्रेशर को रिलीज करने की व्यवस्था है। लेकिन दुर्भाग्य से समाज में जो परिवर्तन आए, उनसे चीजें बदल गईं। पहले हमारी ज्वाइंट फैमिली होती थी। इससे बच्चों को अपने आपको अलग-अलग लोगों से एक्सप्रेस करने का अवसर मिलता था। आज स्थिति है कि हम एक्सप्रेशन नहीं सप्रेशन की तरफ जा रहे हैं।’

• मोदी ने कहा, ‘निराशा में डूबा समाज, परिवार या व्यक्ति किसी का भला नहीं कर सकता है, आशा और अपेक्षा उर्ध्व गति के लिए अनिवार्य होती है। लक्ष्य ऐसा होना चाहिए जो पहुंच में तो हो, पर पकड़ में न हो। जब हमारा लक्ष्य पकड़ में आएगा तो उसी से हमें नए लक्ष्य की प्रेरणा मिलेगी।’

पहले हुआ एक लाख से ज्यादा छात्र, अभिभावक और शिक्षकों का टेस्ट

छात्रों का चयन सात से 17 जनवरी के बीच आयोजित ऑनलाइन परीक्षा के आधार पर किया गया। 1,02,173 छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों ने www.mygov.in पर यह परीक्षा दी थी। इसमें उन्हें तीन थीम, ‘आकर्षक कैप्शन प्रतियोगिता’, ‘मैं प्रेरित हूं प्रतियोगिता और ‘स्नातक तथा निचली कक्षाओं के लिए सफलता का मेरा मंत्र’ दिए गए थे।

Video Courtesy: Narendra Modi/YouTube

रूस, ईरान सहित 8 देशों के छात्र भी ने लिया हिस्सा

शिक्षकों के लिए ‘शिक्षकों की सोच’ और अभिभावकों के लिए ‘मेरे परीक्षा नायक से सीखना’ थीम रखा गया था। विदेशी छात्रों में रूस, नाइजीरिया, ईरान, नेपाल, दोहा, कुवैत, सऊदी अरब और सिंगापुर के छात्र कार्यक्रम में शामिल हुए। इस साल 10 मिनट का सांस्कृतिक कार्यक्रम भी हुआ।

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