Press "Enter" to skip to content

करियर और जिंदगी में होना है सफल, तो एमसीयू है बेहतर विकल्प

शिक्षा के मंदिर में जब पहली बार आप जाते हैं, तो आपके साथ होती है एक छोटी सी बोतल, बैग और साथ में थोड़ा दुःख क्योंकि पहली बार आप घर से बहार निकलते हैं। जहां आप पढ़ते हैं जिंदगी का पहला क ख घ और रू-ब-रू होते हैं अंको की जादुई दुनिया से यह दौर बचपन का होता है। जब आप बड़े होते हैं, तो खुद को दुनिया की तमाम चुनौतियों से तराशने के लिए विश्वविद्यालय में प्रवेश करते हैं।

विश्वविद्यालय वह जगह हैं जहां आप वो ज्ञान प्राप्त करते हैं, जो आने वाली जिंदगी में बेहद मायने रखता है। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में स्थित माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (एमसीयू) भारत का एक ऐसा ही विश्वविद्यालय है।

यहां आप पत्रकारिता, जनसंचार, जनसंपर्क और कम्प्यूटर अनुप्रयोग से जुड़े पाठ्यक्रम में प्रवेश ले सकते हैं। यहां एडमिशन लेकर आप खुद को ना केवल आधुनिक दौर में मजबूती से खड़े रहने के काबिल बनाते हैं, बल्कि खुद एक संचारक के तौर पर अपनी निजी/व्यवसायिक जिंदगी में सफल होने की इबारत का पहला अक्षर सीखते हैं और लास्ट सेमेस्टर तक खुद को परिवक्व बना लेते हैं।

यहां मौजूद विशाल पुस्तकालय में उन किताबों को पढ़कर जो आपको सही तरह से मार्गदर्शित करती हैं। उन दोस्तों के साथ रहकर जो आपको कभी हंसाते तो कभी रुलाते हैं लेकिन वो आपका मुश्किल वक्त में साथ नहीं छोड़ते हैं। उन एक्सपर्ट्स से ज्ञान अर्जित करते हैं जो आपको आपकी आने वाली जिंदगी में सफल बनाने के लिए बेहद जरूरी होते हैं। दिलचस्प बात यह है कि यह सब कुछ आप खुद करते हैं।

विश्वविद्यालय के ऐसे कई पूर्व विद्यार्थी हैं जो पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सफल उपस्थिति दर्ज करवा ही चुके हैं बल्कि लगभग हर प्रोफेशन में अपनी मौजूदगी से लोगों को संचार के महत्व और विश्वविद्यालय की गरिमा से परिचय करवाते हैं।

ऐसी ही एक विद्यार्थी हैं भोपाल के बिग एफएम की एमजे/आरजे अनादि वह बताती हैं, ‘मैंने विश्वविद्याल में फिल्म जर्नलिज्म डिप्लोमा कोर्स में एडमिशन लिया था। यह 1 साल का कोर्स था। यहां फिल्म के बारे में बहुत सारी बातें हमें बताई गईं। कई फिल्में दिखाई जाती थीं। फिल्म का रिव्यू हमें बताया जाता था कि कैसे लिखा जाता है। साथ ही साथ बहुत सारे एक्सपर्ट्स से हम उस वक्त बात भी करते थे जैसे कि गीतकार गुलजार डायरेक्टर सईद मिर्जा, उदयन वाजपेई जी के अलवा कई एक्सपर्ट्स हमारे कॉलेज में आते थे, जाने-माने थिएटर आर्टिस्ट आलोक चटर्जी सर तो हमें मीडिया फिल्म के बारे में जानकारी देते थे। मुझे लगता है कि जो विद्यार्थी सिने पत्रकारिता और एफएम में बतौर आरजे करियर बनाना चाहते हैं, उन्हें विवि में एडमिशन जरूर लेना चाहिए।’

कब ले सकते हैं विश्वविद्यालय में एडमिशन

यदि आप एमसीयू में एडमिशन लेना चाहते हैं तो यह एक बेहतर अवसर है। साल 2020-21 सत्र के लिए भोपाल, रीवा और खंडवा परिसर में आप मीडिया, संचार, प्रबंधन और कम्प्यूटर अनुप्रयोग में स्नातकोत्तर (पोस्ट ग्रेजुएट), स्नातक (ग्रेजुएट) और पत्रोपाधि (कॉरेस्पोंडेंस कोर्स) में एडमिशन के लिए आवेदन कर सकते हैं। आवेदन करने की अंतिम तिथि 20 जून है। विश्वविद्याय में ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि 31 जुलाई 2020 है। अधिक जानकारी के लिए विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर विजिट करें माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल, मध्यप्रदेश

एमसीयू से पास हो सकते हैं, आउट नहीं

एमसीयू के शुरूआती दौर के पहले बेच के पूर्व विद्यार्थी संजीव शर्मा आकाशवाणी भोपाल में संपादक/संवाददाता हैं। वह बताते हैं, ‘विश्वविद्याल की नींव को जिस उद्देश्य के लिए रखा गया, वो आज तक वैसे ही विद्यार्थियों को जनसंचार और पत्रकारिता के क्षेत्र में विकसित कर रही है। यहां एडमिशन लेना यानी खुद के परिपक्व बनाते हुए मीडिया क्षेत्र में पारंगत बनाना है।’

दुबई की एक अंतरराष्ट्रीय एडवर्टाइजिंग कंपनी में कार्यरत साक्षी बादल कहती बताती हैं, मैं साल 2014 में एमएपीआर की विद्यार्थी थीं। एमसीयू में प्रेक्टिकल पर काफी ध्यान दिया जाता है। हम सब जानते हैं मीडिया सिर्फ़ किताबों से नहीं चलता मीडिया में अच्छी सफलता पाने के लिए प्रेक्टिकल समझ होना बहुत ज़रूरी है। यही वजह है की साल 2016 में एमसीयू से पास तो हो गई पर आज तक एमसीयू से आउट नहीं हो पाई।

इलेक्ट्रॉनिक मीडिया डिपार्टमेंट की पूर्व विद्यार्थी कीर्ति दुबे इन दिनों बीबीसी हिंदी में बतौर संवाददाता कार्य कर रही हैं। वह बताती हैं, ‘विश्वविद्यालय में पढ़ाई पढ़ाई का कल्चर तो अच्छा था लेकिन मैं ये नहीं कहूंगी बस लेक्चर अटेंड करना ही मेरे लिए फ़ायदेमंद रहा। इससे ज़्यादा ज़रूरी है कम से कम एक हिंदी और एक अंग्रेज़ी का अख़बार पढ़ना। हर कैंपस के कई पहलू होते है। ये छात्र को तय करना होता है कि उसे कौन से पहलू में खुद को फ़िट करना है बाक़ी कल्चर अपने आप बनता जाता है। यहां कोर्स की किताबों के अलावा अपनी रूचि के अनुसार खूब पढ़िए लाइब्रेरी में कई ऐसी किताबें मिल जाएंगी लेकिन कोर्स के इतर पढ़िए मुद्दे पर समझ विकसित करिए और कैंपस के संसाधनों का इस्तेमाल कीजिए।’

एडमिशन लेकर दीजिए सपनों को उड़ान

कनाडा में GAP Inc, Brampton कंपनी में कार्यरत् शिल्पा बंसल बताती हैं, ‘माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय हमेशा से एक ऐसा विश्वविद्यालय रहा है जिसने स्टूडेंट्स को ना सिर्फ प्रोफेशनल कोर्स की डिग्री दी है बल्कि इस विश्विद्यालय ने इस देश को मंझे हुए पत्रकार दिए है। जैसा की हमारा सत्र 2007-09 का था, उस समय एक बहुत मजबूत स्टूडेंट्स और टीचर्स के बीच में बॉन्डिंग थी। इसकी वजह से हम लोगो को बहुत सारे मौके दिए इंप्रूव करने के लिए दिए जाते थे। एक सबसे खास बात थी कि उस वक्त कोर्स बहुत काम थे जोकि आज तो बहुत ज्यादा हैं और स्टूडेंट्स को भी काफी मौके मिलते थे एक दूसरे से सीखने का और आज देखें तो यह अवसर कल की अपेक्षा आज ज्यादा हैं। इसलिए ब्रीफ में कहूं तो उस वक्त ये विश्वद्यालय कम हमारा एक छोटा सा परिवार था जिसमें प्यार और लड़ाई दोनों का समावेश था।’

गरिमा सिंह साल 2015 में उत्तीर्ण विश्वविद्यालय की पूर्व विद्यार्थी हैं। वह मीडिया प्लानिंग संस्थान मीडियाकॉम में सीनियर मैनेजर हैं। बताती हैं, विश्वविद्याल में हमें सांस्कृति और बौद्धिक दोनों ही तरह का सहयोग प्राप्त हुआ। विवि ज्ञान का भंडार है आप जितना ज्ञान ले सकते है लीजिए। सारी ही फैकल्टी हर वाज़िब मदद आपको मुहैया कराएगी। यहां एडमिशन लेकर आप अपने सपनों को उड़ान दे सकते हैं।

ज़ी मीडिया में बतौर प्रोड्यूसर कार्यरत वैभव मिश्रा बताते है कि, मैं 2012-14 बैच का छात्र हूं, मेरे समय में विश्वविद्यालय का माहौल पत्रकारिता के काफी अनुकूल था, एमसीयू की सबसे बड़ी उपलब्धि उसके पूर्व छात्र हैं, जो कि आज बहुत सम्माननीय पदों पर कार्यरत हैं। हमारे समय में प्रेरक शनिवार कार्यक्रम होता था। जिसमें वरिष्ठ पत्रकार, पूर्व छात्रों के सेशन होते थे, जिससे विद्यार्थियों को पत्रकारिता की बारीकी और आयामों की जानकारी मिलती थी। आज भी विश्वविद्यालय पत्रकारिता के क्षेत्र में अव्वल है, अगर अब और आगे भी कोई छात्र एमसीयू में एडमिशन लेने का इच्छुक है तो मैं सलाह दूंगा कि कोई भी संस्थान आपको पत्रकारिता नही सीखा सकती, वो जज़्बा आपके अंदर होगा तो माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय में आपको तराशने में सफल होगा।

मनुज फीचर सर्विस

(आप हमें फेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम, लिंक्डिन और यूट्यूब  पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं।)

More from करियरMore posts in करियर »

Be First to Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *