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जीने की राह

प्रतीकात्मक चित्र। जे. कृष्णमूर्ति, लेखक दर्शानिक एवं आध्यात्मिक गुरु हैं। अब, कोई रूढ़िवादी क्यों नहीं रह गया है? इससे पहले कि आप कहें, ‘मैंने रूढ़िवादी होना बंद कर दिया है’, क्या आपको यह नहीं पता होना चाहिए कि क्यों, किस कारण से? क्या यह इसलिए है क्योंकि आप देखते हैं…
चित्र : भगवान श्रीकृष्ण, अर्जुन को श्रीमद्भगद गीता का दिव्य ज्ञान देते हुए। भगवान श्रीकृष्ण का संदेश श्रीमद्भगवद गीता, जिंदगी जीने का एक संतुलित दर्शन प्रस्तुत करती है। गीता में उल्लेखित है कि मनुष्य जीवन में दो रास्ते हैं प्रवृत्ति, ‘क्रिया और प्रगति का मार्ग’ और निवृत्ति, ‘आंतरिक चिंतन और…
कैप्टन राम चरण सिंह जिन्होंने देशभक्ति गीत ‘कदम कदम बढ़ाए जा’ की रचना की और हरिजन कॉलोनी, 1945 में गांधीजी के लिए वायलिन बजाया। चित्र सौजन्य : नेशनल गैलरी ऑफ़ मॉडर्न आर्ट, नई दिल्ली। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दांडी यात्रा की वर्षगांठ 12 मार्च को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी…

प्रेरणा / कठिन चुनौतियों के बीच, ऐसे रखें ‘मन को शांत’

प्रतीकात्मक चित्र। संकलन : अमित कुमार सेन। हम एक ऐसी दुनिया, या कहें एक ऐसे क्षण में रह रहे हैं जहां ज्ञान, करुणा, आशावाद, लचीलापन, साहस और स्पष्ट नज़रिए की बेहद जरूरत है। हमें इन गुणों को अपने अंदर जागृत करने की जरूरत है। यह हम तभी कर सकते हैं,…

विचार / यदि एक बेहतर दुनिया चाहिए तो हमें क्या करना होगा?

दलाई लामा, तिब्बत के राष्ट्राध्यक्ष और आध्यात्मिक गुरू हैं। स्थायी भविष्य की कुंजी एक परोपकारी मानसिकता में है जो प्रतिस्पर्धा की जगह सहयोग करती है और लोगों की भलाई के लिए काम करती हो। हम यहां जानेंगे कि, ‘कैसे 21वीं सदी में परोपकारी प्रेम का भाव रखने से हम अपने…

विमर्श / पुलिस कार्रवाई में ‘सहानुभूति और करुणा’ क्यों है जरूरी

चित्र: कोरोना काल में भारतीय पुलिस एक वृद्ध महिला की मदद करते हुए। दलाई लामा, तिब्बत के राष्ट्राध्यक्ष और आध्यात्मिक गुरू हैं। चीन दुनिया का सबसे अधिक आबादी वाला देश है, इसकी प्राचीन संस्कृति है और पारंपरिक रूप से वह बौद्ध मताबलंबी बहुल देश है। लेकिन वहां कोई आजादी नाम…

उम्मीद / संभावनाओं से भरा है ‘जीवन’, इसे यूं न गवाएं

कर्म की महत्ता अनंत है। हमारी परंपरा इसे ‘कर्मयोग’ कहकर संबोधित करती है। हताश, निराश, अवसाद से घिरे वीरवर अर्जुन को महाभारत के युद्ध में योगेश्वर कृष्ण इसी कर्मयोग का उपदेश देते हैं। इसके बाद अर्जुन में जो सकारात्मक परिर्वतन आते हैं, उसे हम सब जानते हैं। हमारे देश में कर्मयोग की…

श्वेत क्रांति / धरती पर मौजूद है अमृत, लोग इधर-उधर भटक रहे हैं

हमारी परंपरा और देशज ज्ञान ने हमें गौ-सेवा को लेकर बहुत कुछ बताया है। यही कारण है कि गाय आज भी भारतीय लोकजीवन का सबसे आदरणीय प्राणी है। अथर्ववेद में कहा गया है। ‘धेनु: सदनम् रचीयाम्’ यानी ‘गाय संपत्तियों का भंडार है।‘ हम गाय को केंद्र में रखकर देखें, तो…

कोरोना काल / कुछ इस तरह मानसिक स्वास्थ्य का रखें ख्याल, ‘वक्त है बदल जाएगा’

प्रतीकात्मक चित्र। कोविड-19 के इस दौर ने हर किसी को किसी न किसी रूप में गंभीर रूप से प्रभावित किया है। किसी ने अपना हमसफर खोया है तो किसी ने अपने घर-परिवार के सदस्य,दोस्त या रिश्तेदार को खोया है। इन अपूरणीय क्षति का किसी न किसी रूप में दिलो-दिमाग पर…

छिंगमिंग / पितृपक्ष की तरह, चीन में पूर्वजों को याद करने का पर्व

अखिल पाराशर, पेइचिंग, चीन। भारत में अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए पितृपक्ष के दौरान श्राद्ध और तर्पण किए जाते हैं, और उन्हें याद किया जाता है, उसी तरह चीन में भी अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए पर्व मनाया जाता है, जिसे छिंगमिंग कहा जाता…

कोरोना / कोविड 19 संक्रमण के बीच ऑनलाइन कक्षाएं कितनी सार्थक

कोरोना काल ने सही मायने में भारत को डिजीटल इंडिया बना दिया है। पढ़ाई-लिखाई के क्षेत्र में इसका व्यापक असर हुआ है। प्राइमरी से लेकर उच्चशिक्षा संस्थानों ने ऑनलाइन कक्षाओं का सहारा लेकर नए प्रतिमान रचे हैं। आने वाले समय में यह चलन कितना प्रभावी होगा यह तो नहीं कहा…

समाधान / कोरोना से लड़ाई में, मसाला या औषधि? क्या है हल्दी!

हल्दी भारतीय मसाला और औषधि है। गले में खराश हो या शरीर में दर्द, दूध में हल्दी मिलाकर पी लीजिए सब ठीक हो जाता है। रामबाण औषिधि के तौर पर सदियों से मशहूर हल्दी कोरोना संकट में इम्युनिटी बढ़ाने का काम भी करती है। विदेशों में हल्दी को सुपरफूड कहा…

विशेष / मूर्ख नहीं होते, तो कैसी होती ये दुनिया!

प्रतीकात्मक चित्र : यह भी जरूर सोचिए की यदि पेड़ काट दिए जाएंगे तो कैसी होगी दुनिया? विद्वान हैं, इसलिए मूर्खों का वजूद है, यह तो नहीं पता। मगर यह निश्चित है कि मूर्ख हैं, इसलिए विद्वानों का अस्तित्व है। जानवरों में विद्वान नहीं पाए जाते हैं, इसलिए वह मूर्ख…

प्रेरणा / अद्वैत के प्रवर्तक, उनके नाम के आगे शब्द नि:शब्द हो जाते हैं

स्वामी विवेकानंद भारतीय आध्यात्मिकता और भारतीय जीवन दर्शन को विश्वपटल पर स्थापित करने वाले नायक हैं। वो अद्वैत के प्रवर्तक हैं। भारत की संस्कृति, भारतीय जीवन मूल्यों और उसके दर्शन को उन्होंने ‘विश्व बंधुत्व और मानवता’ को स्थापित करने वाले विचार के रूप में प्रचारित किया। अपने निरंतर प्रवासों, लेखन…

पर्यावरण / ऐसे भी होते हैं शिक्षक जो करते हैं पेड़ों का नि: शुल्क उपचार

चित्र सौजन्य से: द हिंदू/के.बीनू। के.बीनू एक स्कूली शिक्षक हैं जो कई वर्षों से ‘वृक्ष चिकित्सक’ के तौर पर पेड़ों की बीमारियों का इलाज कर रहे हैं। लोग उन्हें ‘ट्री डॉक्टर’ कहते हैं। उम्र के 51वें साल में वो एक ऐसा काम कर रहे हैं जिसके लिए सदियों तक उन्हें…