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जीने की राह

संजीव शर्मा, लेखक आकाशवाणी में कार्यरत् हैं। कुछ साल पहले की ही बात है, जब उसने राष्ट्रपति भवन से सटे और आम लोगों के लिए लगभग निषिद्ध हमारे कार्यालय परिसर में कदम रखा और सरकारी दफ़्तर के विशुद्ध औपचारिक वातावरण में पायल की रुनझुन सुनकर हम सभी चौंक गए थे।…
सही व्यक्ति कौन है? यह सवाल सभी के मन में आता है, लेकिन इस धरती पर सही व्यक्ति कोई नहीं है। यदि आप किसी चीज में अपना दिल लगा लें, तो वो चीज बढ़िया हो सकती है। किसी ने कभी भी कोई सही व्यक्ति नहीं पाया है। यदि आप इस…
क्या तय किया गया विवाह अब बस एक घिसी-पिटी परंपरा बन कर रह गया है जो आधुनिक समय के साथ बेमेल है? या फिर इस प्राचीन व्यवस्था में कोई बुद्धिमत्ता है, जिसका लाभ हमें आज भी मिल सकता है। तय किया गया विवाह, ये गलत शब्द हैं, क्योंकि सभी शादियां…

स्व-प्रेरणा / जिंदगी को संतुलित रखने का ये है आसान तरीका

आपकी बुद्धि, आपकी काबिलियत, और आपकी योग्यता पूरी तरह से अभिव्यक्त तभी हो पाएगी, जब आप अपने भीतर अच्छी तरह संतुलित होंगे। जीवन में संतुलन तभी आता है जब आप पूरी तरह से चिंताओं से मुक्त होते हैं। चिंताओं से मुक्त हो जाने का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि…

विकल्प / अनिश्चितताएं ही जीवन की सबसे बड़ी संभावनाएं हैं

जीवन अनिश्चित है, लेकिन अनिश्चितता से घृणा नहीं करनी चाहिए क्योंकि जब आप एक नई जगह में जाते हैं, तो अनिश्चितता होती है, लेकिन कई नई संभावनाएं भी सामने आती हैं। दरअसल, ये सच है की बाहरी दुनिया में कुछ भी निश्चित नहीं है और ये अनिश्चितता ही चीज़ों को…

प्रबंधन / ज़िंदगी का मैनेजमेंट करने का ये है आसान तरीका

अमूमन हम परिस्थितियां संभालने को सिर्फ आर्थिक संदर्भ में ही देखते हैं, जीवन को पूरी तरह से संभालने के संदर्भ में नहीं। पर, मूल रूप से, जीवन की सारी प्रक्रिया प्रबंधन ही है। आपके जीवन की गुणवत्ता इस बात पर निर्भर करती है कि आप कितनी अच्छी तरह से अपने…

नज़रिया / अकेलापन समस्या नहीं, क्योंकि इसका समाधान है

सभी तरह का आराम, सभी तरह की सुविधाएं होते हुए भी लोग खालीपन क्यों महसूस करते हैं, क्यों असंतुष्ट रहते हैं? यह एक ऐसा सवाल है जो हर व्यक्ति अपने जीवन में कभी न कभी महसूस करता है। दरअसल, मनुष्य होने का महत्व अपनी सीमाओं से परे जाने में है,…

समाधान / मूर्खता से भरा विचार है सफल और असफल होना, लेकिन कैसे?

आपके सभी विचार, सोच, भावनाएं या मूल्य आपके नहीं हैं, ये आपने किसी ओर से लिए हैं और ये आपके अंदर राज करते हैं। ठीक इसी तरह सफलता का विचार आपका अपना विचार है, ही नहीं। सफलता क्या है, ये किसी ओर का विचार है। आपके धर्म, समाज और संस्कारों…

लोकतंत्र / …तो क्या जनता ही ‘नेता’ है लेकिन कैसे? यहां जानें

तमिल में लोकतंत्र को जननायक कहते हैं जिसका मलतब है कि जनता ही नेता है। दुर्भाग्य की बात है कि आम लोग यह भूल गए हैं कि वे नेता हैं। लोकतंत्र में न कोई नेता होता है और न कोई जनता। बस लोग होते हैं। होना यह चाहिए कि हर…

नेतृत्व / ऐसा क्या है जिसे नजरअंदाज़ नहीं किया जा सकता

अगर आपके अंदर वाकई में काबिलियत है तो उसे कोई कब तक ठुकराएगा, वह तो कहीं न कहीं अपना स्‍थान पा ही लेगी। काबिलियत को कोई नजरअंदाज़ नहीं कर सकता है। नेतृत्व का मतलब है, हर किसी की उन्नति को आसान बनाना। जब आप अपने आस-पास की बहुत सी चीजों…

देजा-वू / जब घटने लगे, एक ही घटना बार-बार

आपके जो भी अनुभव हों, उनका आनंद लीजिए और जाने दीजिए उन्हें एकत्र मत कीजिए। यदि आप इन्हें एकत्र करते हैं तो एक समय बाद यह आपका वहम बन जाएंगे और आपको मतिभ्रम होने लगेगा। इसको देजा-वू कहते हैं। देजा-वू फ्रेंच भाषा का एक शब्द है, जिसका मतलब होता है…

जीवंतता / जीवन बेकार क्यों लगने लगता है

आप को अपना ध्यान हर समय उस चीज़ पर केंद्रित करना चाहिए, जो आप करना चाहते हैं। किसी चीज़ पर अपना ध्यान लगातार एक घंटे तक लगाना शुरू कीजिए, फिर उसे बढ़ा कर एक पूरे दिन तक ऐसा करिए। अगर आप अपना ध्यान लगाए रख सकते हैं और उसमें पर्याप्त…

सत्य / क्या हर रिश्ते के पीछे कुछ स्वार्थ छुपा होता है?

इस दुनिया में ऐसा कुछ भी नहीं है जिसे नि:स्वार्थ कहा जा सके। हर चीज़ अपने खुद के मतलब के लिए ही होती है, हर कोई स्वार्थी है। दूसरा कुछ भी नहीं है। आपके विचार और आपकी भावनाएं मूल ढंग से आपके अंदर से हैं, तो वे स्वार्थी ही हैं।…

कोविड-19/ तबाही के बाद की दुनिया को कुछ इस तरह बनाएं बेहतर

प्रतीकात्मक चित्र। इस समय, हमने अपनी आर्थिक व्यवस्था का ढांचा कुछ ऐसा बना रखा है और अपने आर्थिक इंजन को हम कुछ इस तरह चला रहे हैं कि अगर हम सफल नहीं होते तो डिप्रेस हो जाते हैं और अगर सफल हो जाते हैं तो भी परेशान ही रहते हैं।…

समाधान / आत्महत्या रोकने का सबसे आसान तरीका है योग

प्रतीकात्मक चित्र। हर साल दुनिया में 8 लाख लोग आत्महत्या कर रहे हैं। यह हत्याओं और युद्ध के कारण मरने वाले लोंगों की कुल संख्या से भी ज्यादा है। इसका मतलब है कि हर 40 सेकंड में 1 व्यक्ति अपनी जान ले रहा है। लेकिन जब ऐसा कोई व्यक्ति जिसे…