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सोशल हलचल

चित्र : लॉकडाउन के दौरान मजदूर घर की ओर जाते हुए। आत्मनिर्भर भारत, स्वदेशी बनाम विदेशी का 20-20 मैच नहीं है बल्कि सबसे पहले हमें अपनी सोच को आत्मनिर्भर बनना होगा। आज भी ग्रामीण और शहरी तबके में रहने वाले युवा सरकारी नौकरी को ही प्राथमिकता दे रहे हैं। स्टार्टअप…
डॉ. वेदप्रताप वैदिक। भारत जातिवाद से ग्रस्त वो देश है जहां शिक्षित लोग भी जातिवाद को उतना महत्व देते हैं जितना अशिक्षित यह अमूमन दिनचर्या का हिस्सा सा बना हुआ है। दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश भारत में चुनाव भी जातिवाद के इर्द-गिर्द होते हैं। दफ्तर, सार्वजनिक स्थल, मंदिर…
डॉ. वेदप्रताप वैदिक। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का मुसलमानों के प्रति आजकल रवैया क्या है, इस प्रश्न पर बहस चल पड़ी है। बहस का मुख्य कारण संघ के मुखिया मोहन भागवत के कुछ बयान हैं। अभी-अभी उन्होंने कहा है कि दुनिया में सबसे ज्यादा संतुष्ट कोई मुसलमान है तो वह भारत…

अपराध / हाथरस में ‘गुपचुप पंचायत’ आरोपी के साथ 12 गांव के सवर्ण?

चित्र : प्रशासन ने जब अमानवीयता की हद पार करते हुए पीड़ित लड़की का शव आधी रात को जला दिया।  21वी सदी में विकास, डिजिटल इंडिया, मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत से इतर भी एक भारत है। यह भारत लोगों के दिलों में बसता है, यहां हर धर्म, जाति,…

महात्मा गांधी / 102 साल पहले ऐसा क्या हुआ, जो सन् 2020 में भी हो रहा है

चित्र – जब महात्मा गांधी स्पेनिश फ्लू से संक्रमित थे। साल 1918, हिंदी के विख्यात कवि सूर्यकांत त्रिपाठी निराला ने अपनी आत्मकथा ‘कुल्ली भाट’ में लिखा, ‘मैं गंगा के घाट पर खड़ा था। जहां तक नजर जाती, गंगा के पानी में इंसानों की लाशें ही लाशें दिखाई देती थीं। मेरे…

कृषि-कानून / कांग्रेस का शीर्षासन, बीजेपी की तानाशाही

डॉ वेदप्रताप वैदिक। संसद द्वारा पारित कृषि-कानूनों के बारे में कांग्रेस पार्टी ने अपने आप को एक मज़ाक बना लिया है। इस मुद्दे पर कांग्रेस शीर्षासन की मुद्रा में आ गई है, क्योंकि उसने अपने 2019 के चुनाव घोषणा-पत्र में खेती और किसानों के बारे में जो कुछ वायदे किए…

लाल बहादुर शास्त्री / संघर्ष, भेदभाव और रहस्य, तीन शब्दों के इर्द-गिर्द थी जिंदगी

संदर्भ – आलेख में मौजूद जानकारी योर प्राइम मिनिस्टर इज डेड किताब से ली गई है, जिसके लेखक अनुज धर हैं, जोकि विस्टा पब्लिशिंग प्राइवेट लिमिटेड द्वारा प्रकाशित की गई है। एक बड़े पेड़ के नजदीक, छोटा पेड़ हो तो निगाह पहले बड़े पेड़ पर जाती है, लेकिन छोटा पेड़…

श्रीलंका / भाई-भाई में ऐसा क्या हुआ कि अब बन गए समस्या

चित्र क्रमशः गोटबाया और महिंद राजपक्ष। डॉ. वेदप्रताप वैदिक। श्रीलंका और भारत के संबंधों में पिछले कुछ वर्षों में काफी उतार-चढ़ाव आए लेकिन अब जबकि श्रीलंका में भाई-भाई राज है याने गोटबाया और महिंद राजपक्ष क्रमशः राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री हैं, आपसी संबंध बेहतर बनने की संभावनाएं दिखाई पड़ रही हैं…

कुपोषण / ‘मप्र में मुफ्त अनाज वितरण’, गुना में बच्चे की भूख से मौत?

प्रतीकात्मक चित्र। कोविड 19 महामारी के दौरान, मध्यप्रदेश में गरीबी और भूख मिटाने के लिए राज्य सरकार ने कई योजनाएं शुरू कीं। इनका लाभ किन्हें मिल रहा है, इस बारे में खाद्य विभाग भी बयान जारी कर चुका है। उनका कहना था कि ऐसे कई बीपीएल कार्ड धारक हैं जिनकी…

संयुक्त राष्ट्र / भारतीय नेता ‘वीटो का अधिकार’ पर क्यों रहते हैं मौन?

डॉ. वेदप्रताप वैदिक, लेखक, भारतीय विदेश नीति परिषद के अध्यक्ष हैं। संयुक्त राष्ट्र संघ के 75 वें अधिवेशन के उद्घाटन पर दुनिया के कई नेताओं के भाषण हुए लेकिन उन भाषणों में इन नेताओं ने अपने-अपने राष्ट्रीय स्वार्थों को परिपुष्ट किया, जैसा कि वे हर साल करते हैं लेकिन भारत…

सरहद पार / पाकिस्तान में, ‘सरकार के ऊपर सरकार’

डॉ. वेदप्रताप वैदिक। पाकिस्तान में पीपल्स पार्टी के नेता बिलावल भुट्टो ने लगभग सभी प्रमुख विरोधी दलों की बैठक बुलाई, जिसमें पाकिस्तानी फौज की कड़ी आलोचना की। पाकिस्तानी फौज की ऐसी खुले-आम आलोचना करना तो पाकिस्तान में देशद्रोह जैसा अपराध माना जाता है। नवाज़ शरीफ ने अब इस फौज को…

आतंकवाद / मज़हबी जुनून या जिहादी उन्माद

डॉ. वेदप्रताप वैदिक। नौ आतंकियों और तीन जासूसों की गिरफ्तारी की खबर देश के लिए चिंताजनक है। आतंकी अल-कायदा और पाकिस्तान से जुड़े हुए हैं और चीन से! जासूसी के आरेाप में राजीव शर्मा नामक एक पत्रकार को भी गिरफ्तार किया गया है। जिन नौ आतंकियों को गिरफ्तार किया गया…

मीडिया शिक्षा / जरूरत, ‘गुणवत्ता’ बढ़ाने की, एजुकेशन काउंसिल भी है जरूरी

नोट : भारतीय जन संचार संस्थान (आईआईएमसी) द्वारा आयोजित राष्ट्रीय वेबिनार में व्यक्त राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 पर आधारित विचार। मीडिया शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए मीडिया एजुकेशन काउंसिल की आवश्यकता है। इसकी मदद से न सिर्फ पत्रकारिता एवं जनसंचार शिक्षा के पाठ्यक्रम में सुधार होगा, बल्कि मीडिया इंडस्ट्री…

रिपोर्ट / तो क्या ‘ग्रीन सिटी भोपाल’, सन् 2030 में ‘कांक्रीट सिटी’ बन जाएगी?

चित्र : गूगल मेप, भोपाल। आज से 30 साल पहले, ‘भोपाल’ में प्राकृतिक सुंदरता जितनी थी, उतनी ’30 साल बाद’ नहीं होगी। कारण कई हैं, निवारण लोग कर रहे हैं। यदि साल 2009 से 2019 तक के आंकड़ों को देखा जाए तो 26 प्रतिशत कांक्रीट से बने जंगल खड़े कर…

हिंदी दिवस / अंग्रेजी से मोह छोड़े बिना हिंदी से कैसे करेंगे प्रेम

डॉ. वेदप्रताप वैदिक, लेखक, भारतीय भाषा सम्मेलन के अध्यक्ष हैं। भारत सरकार को हिंदी दिवस मनाते-मनाते 70 साल हो गए लेकिन कोई हमें बताए कि सरकारी काम-काज या जन-जीवन में हिंदी क्या एक कदम भी आगे बढ़ी? इसका मूल कारण यह है कि हमारे नेता नौकरशाहों के नौकर हैं। वे…