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सोशल हलचल

चित्र : अमेरिकी उप-विदेश मंत्री एलिस वेल्स। डॉ. वेदप्रताप वैदिक। अमेरिकी विदेश मंत्रालय के एक उच्चाधिकारी ने आग में घी डालने का काम किया है। उसने भारत-चीन सीमा को लेकर ऐसा भड़काऊ और उकसाऊ बयान दे दिया है कि यदि भारत उस पर अमल करने लगे तो दोनों पड़ौसी देश…
डॉ. वेदप्रताप वैदिक। कोरोना के इन दिनों में मुझे दो हिंदुस्तान साफ-साफ दिख रहा है। एक हिंदुस्तान वह है, जो सचमुच कोरोना का दंश भुगत रहा है और दूसरा हिंदुस्तान वह है, जो कोरोना को घर में छिपकर टीवी के पर्दों पर देख रहा है। क्या आपने कभी सुना कि…
भारतीय मीडिया अपने पारंपरिक अधिष्ठान में भले ही राष्ट्रभक्ति, जनसेवा और लोकमंगल के मूल्यों से अनुप्राणित होती रही हो, किंतु ताजा समय में उस पर सवालिया निशान बहुत हैं। ‘एजेंडा आधारित पत्रकारिता’ के चलते समूची मीडिया की नैतिकता और समझदारी कसौटी पर है। सही मायने में पत्रकारिता में अब ‘गैरपत्रकारीय…

जब तालाबंदी हटेगी तो सामने होंगी ये चुनौतियां

डॉ. वेदप्रताप वैदिक। प्रधानमंत्री और देश के सभी मुख्यमंत्रियों के बीच बातचीत के बाद कई निर्णय लिए गए। ऐसी बहसों में ऐसी बहसों में देश के विभिन्न तबकों के विचारशील लोगों से राय ली जाती तो उससे सरकार को भी मार्गदर्शन मिलता और आम जनता भी प्रेरित होती लेकिन अभी…

तात्कालिक तालाबंदी को स्थायी नशाबंदी में क्यों नहीं बदला जाए?

डॉ. वेदप्रताप वैदिक। तालाबंदी को ढीला करते ही सरकार ने दो उल्लेखनीय काम किए। एक तो प्रवासी मजदूरों की घर वापसी और दूसरा शराब की दुकानों को खोलना। नंगे-भूखे मजदूर यात्रियों से रेल का किराया वसूल करने की इतनी कड़ी आलोचना हुई कि उनकी यात्राएं तुरंत निःशुल्क हो गईं लेकिन…

चीन से ग्राउंड रिपोर्ट / सतर्क है चीन, लॉकडाउन के बाद लागू किया 14+14 नियम

अखिल पाराशर, लेखक चीन के बीजिंग शहर में रहते हैं वो चाइना मीडिया ग्रुप में वरिष्ठ पत्रकार हैं। चीन कोविड-19 महामारी के सबसे कठिन दौर से गुजर चुका है। उसने संयम, अनुशासन और दृढ़ संकल्प का परिचय देते हुए अपने देश में महामारी पर काबू पाया है। अब चीन में…

कोरोना / ये 4 बातें और वो दो-टूक शब्द, क्या लोगों को सुनने की आदत है!

डॉ. वेदप्रताप वैदिक। पिछले एक माह से मैं निरंतर याद दिला रहा हूं, चार बातों की। एक, तबलीगी मौलाना साद की गैर-जिम्मेदाराना हरकत के लिए देश के सारे मुसलमानों पर तोहमत नहीं लगाई जानी चाहिए। दूसरी, विषाणु से लड़ने में हमारे आयुर्वेदिक (हकीमी भी) घरेलु नुस्खों का प्रचार किया जाए…

भारतीय मीडिया – I / हम क्या थे, क्या हैं और क्या होंगे, ‘जरूरी है इस समय संभलना’

भारतीय मीडिया का यह सबसे त्रासद समय है। छीजते भरोसे के बीच उम्मीद की लौ फिर भी टिमटिमा रही है। उम्मीद है कि भारतीय मीडिया आजादी के आंदोलन में छिपी अपनी गर्भनाल से एक बार फिर वह रिश्ता जोड़ेगा और उन आवाजों का उत्तर बनेगा जो उसे कभी पेस्टीट्यूट, कभी…

भारतीय मीडिया – II / पत्रकारिता में भाषा और विचार क्यों हो रहे हैं गैरजिम्मेदार?

हिंदी के एक बड़े लेखक अशोक वाजपेयी कह रहे हैं कि, ‘पत्रकारिता में विचार अक्षमता बढ़ती जा रही है, जबकि उसमें यह स्वाभाविक रूप से होना चाहिए। हिंदी में यह क्षरण हर स्तर पर देखा जा सकता है। हिंदी के अधिकांश अखबार और समाचार-पत्रिकाओं का भाषा बोध बहुत शिथिल और…

भारतीय मीडिया – III / ‘TRP की जंग में अंतहीन बहस’, क्या देखना पसंद करते हैं दर्शक?

प्रतीकात्मक चित्र। एक समय में प्रिंट मीडिया ही सूचनाओं का वाहक था, वही विचारों की जगह भी था। 1990 के बाद टीवी घर-घर पहुंचा और उदारीकरण के बाद निजी चैनलों की बाढ़ आ गई। इसमें तमाम न्यूज चैनल भी आए। जल्दी सूचना देने की होड़ और टीआरपी की जंग ने…

कोरोना / यह रहस्य नहीं, बल्कि दुनिया को वियतनाम से सीखना चाहिए

डॉ. वेदप्रताप वैदिक। क्या दुनिया में कोई ऐसा भी देश है, जहां कोरोना की वजह से अब तक एक भी आदमी मरा न हो ? जी हां, ऐसा एक देश है, जिसका नाम वियतनाम है। लगभग साढ़े नौ करोड़ की जनसंख्यावाला यह देश चीन का एकदम पड़ौसी है। यह साम्यवादी…

कोरोना / विपक्ष यानी कांग्रेस को हुआ क्या है?

डॉ. वेदप्रताप वैदिक। कांग्रेस-अध्यक्ष सोनिया गांधी ने 7 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर पांच सुझाव दिए थे, उनमें से ज्यादातर बहुत अच्छे थे। लेकिन आज कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में उन्होंने जो कुछ बोला है, उनके बयान से ऐसा नहीं लगता कि वे कोरोना-युद्ध में भारत की…

बेरोजगारी / तालाबंदी खुलने के बाद किसे होगा सबसे ज्यादा नुकसान

बेरोजगारी के मामले में मोदी सरकार ने कुछ खास नही किया। यह उस समय की बात है जब लॉकडाउन (तालाबंदी) जैसी स्थिति भारत में दूर-दूर तक नहीं थी। लेकिन जब लॉकडाउन हुआ तो जनता के सामने सबसे बड़ी समस्या अपनी जान बचाना है और वो बच जाते हैं तो क्या…

लॉकडाउन / आखिर, घर बैठे-बैठे कब तक खिला सकती है सरकार?

डॉ. वेदप्रताप वैदिक। 15 अप्रैल से तालाबंदी (लॉकडाउन) हटेगी या नहीं? इस सवाल का जवाब हां या ना में, दोनों ही ठीक नहीं होगा। क्योंकि यह जारी रहती है तो देश के 60-70 करोड़ लोग बेरोजगार हो जाएंगे। वे अपनी रोजी-रोटी को तरस जाएंगे। सरकारें और समाजसेवी संस्थाएं उन्हें घर…

कोरोना / तो क्या देश की चिंता सिर्फ एक ही व्यक्ति को है?

चित्र: सोनिया गांधी, वरिष्ठ कांग्रेस नेता। डॉ. वेदप्रताप वैदिक। भारत की जनता को इस बात पर गर्व होना चाहिए कि देश के सभी राजनीतिक दल कोरोना के विरुद्ध एकजुट हो गए हैं। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने प्रधानमंत्री मोदी को लिखे अपने पत्र में कुछ रचनात्मक सुझाव दिए हैं। केरल,…