Press "Enter" to skip to content

अध्यात्म

अगर आप रीढ़ की शारीरिक बनावट के बारे में जानते हैं, तो आप जानते होंगे कि रीढ़ के दोनों ओर दो छिद्र होते हैं, जो वाहक नली की तरह होते हैं, जिनसे होकर सभी धमनियां गुजरती हैं। ये इड़ा और पिंगला, यानी बायीं और दाहिनी नाड़ियां हैं। शरीर के ऊर्जा‌-कोष…
प्राचीन काल से तीर्थयात्रायें करना आध्यात्मिक तलाश की प्रक्रिया का एक आवश्यक भाग रहा है। लोग बहुत सारे कारणों से एक से दूसरे स्थान पर जाते हैं। ऐसे खोजी,अन्वेषक भी हैं जो हमेशा किसी नये स्थान की खोज में रहते हैं, जिस पर वे अपनी छाप छोड़ सकें। दसअसल, वे…
हमारी परंपरा में आमतौर पर किसी परिवार, कुल या फिर व्यक्ति विशेष के अपने इष्ट देवी/देवता होते हैं। क्या हम खुद ही अपना इष्ट देवी/देव चुन सकते हैं? क्या इष्ट देव आध्यात्मिकता उन्नति दे सकते हैं? सबसे पहले आपको यह समझना होगा कि इष्ट देवता यानी आपकी पसंद का देवता।…

भावनाएं / बेहतर क्या है, ‘प्रेम या करुणा’

आप अपने भीतर जितनी भावनाओं को पोषित कर सकते हैं, उनमें से करुणा सबसे कम बंधन और उलझाव पैदा करता है, बल्कि यह सबसे अधिक मुक्तिदायक भावना है। वैसे आप करुणा के बिना जी सकते हैं, लेकिन आपके भीतर वैसे भी भावनाएं होंगी ही, इसलिए बेहतर होगा कि आप उन्हें…

अंतर / आध्यात्मिक या सांसारिक क्या हैं आप?

आजकल बहुत से लोगों को आध्यात्मिकता के प्रति एक चिढ़ सी होती है। इसका एक कारण यह है कि आध्यात्मिकता को दयनीय ढंग से रहने के रूप में चित्रित किया जाता है। ऐसा इसलिए हुआ है क्योंकि लोगों के मन में आध्यात्मिकता की छवि को तुच्छ ढंग से प्रस्तुत किया…

शुभ-मुहूर्त / …तो क्या आपका भविष्य ग्रह-नक्षत्र तय कर रहे हैं?

आजकल, लोग कुछ भी करना चाहें तो वे पहले ग्रह-नक्षत्रों को देखना पसंद करते हैं। अपने घर से बाहर निकलने से पहले आप चाहते हैं कि सारे ग्रहों को आपके लिये अपनी सही स्थिति में आ जाना चाहिए। लोग शुभ-मुहूर्त निकालते हैं, ये भी देखते हैं कि समय खराब तो…

आत्मज्ञान / ‘खुद को जानने के वो आसान तरीके’, जो आप जानना चाहते हैं

प्राचीन एथेन्स के विशाल मंदिर डेल्फी की दीवारों पर यह शब्द मिलते हैं, ‘अपने आप को जानो’ यानी आत्मदीपो भवः। यह वाक्य उस दौर में लोग समझते थे, लेकिन आज हम ये शब्द समझ कर भी नहीं समझ रहे हैं। यह शब्द भारतीय वैदिक ग्रंथों में मिलते हैं। ये पूरी…

प्रसन्नता / जिंदगी में खुश रहने का ये है सबसे अचूक उपाय

खुश और दु:खी रहना मूल रूप से आप का ही चुनाव है। लोग इसलिए दुःखी रहते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि दुःखी रहने से उन्हें कुछ मिलेगा। यह पढ़ाया जा रहा है कि अगर आप पीड़ा भोग रहे हैं तो आप स्वर्ग में जाएंगे। यदि आप दुःखी इंसान हैं…

संस्कृति / हम सदियों से क्यों मना रहे हैं ‘गुरु पूर्णिमा’ उत्सव

जून-जुलाई महीनों में आने वाले भारतीय आषाढ़ माह की पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा कहते हैं। गुरु पूर्णिमा वह दिन है जब पहले गुरु का जन्म हुआ था यानी भगवान शिव, यौगिक संस्कृति में शिव को भगवान नहीं माना जाता, उन्हें आदि योगी यानी पहले योगी की तरह देखा जाता है।…

अध्यात्म / कुछ ऐसा तैयार करना जिसे मृत्यु न छीन सके

अध्यात्म यानी ये प्रक्रिया जन्म और मृत्यु के बारे में नहीं है, ये कुछ ऐसा तैयार करने के बारे में है जिसे मृत्यु न छीन सके। इसे ऐसे समझिए जैसे जब हम कहते हैं कि शिव संहारक हैं, तो इसका मतलब यह नहीं होता कि शिव मृत्यु की वजह हैं,…

श्रीमद्भगवत् गीता / सोच बदलना है तो दृष्टिकोण बदलें

अमोघ लीला दास। निश्चित ही सकारात्मक सोचना बेहतर है लेकिन यह सोच तभी विकसित होगी, जब हम अपने दृष्टिकोण को बदलेंगे। दृष्टिकोण हम बदल सकते हैं। हम कैसे देखते हैं, कहां देखते हैं, यह इसके लिए बेहद महत्वपूर्ण है। मान लीजिए हम किसी ऊंची इमारत के नीचे खड़े हैं। हम…

व्यसन / जी नही! नशा करना एक आध्यात्मिक प्रक्रिया नहीं है

कोई भी व्यक्ति, समाज या देश समृद्धि चाहता है क्योंकि पहले स्तर पर यह हमें अपने पसंद का आहार चुनने के विकल्प देती है। अगले स्तर पर यह हमें अपनी पसंद की जीवनशैली चुनने की क्षमता प्रदान करती है। अमेरिका जैसे समृद्ध देश में जहां अपनी पसंद के खान-पान और…

विमर्श /अध्यात्म से ‘ये कैसी चिढ़’, ऐसा क्यों करते हैं लोग

आज बहुत से लोग को आध्यात्मिकता के नाम से ही चिढ़ (इरीटेड होना – एक मानसिक बीमारी) जाते हैं। इसका कारण है और वो ये कि आध्यात्मिकता को दयनीय ढंग से रहने के रूप में चित्रित किया जाता है। यहां आप, यदि पढ़ रहे हैं तो आध्यात्मिक होने के सच्चे…

इच्छाएं / ‘ये खराब है, इसे छोड़ दो’, तो क्या आप इसे छोड़ देंगे?

नोट : सद्‌गुरु इस आलेख में एक ऐसे विषय के बारे में बता हैं जिस पर चर्चा करना ही गलत समझा जाता है, पर आध्यात्मिक मार्ग पर चलने वालों के लिए बेहद महत्वपूर्ण हो सकता है। हम लोग, हमेशा, किसी न किसी बात से छुटकारा पाने के बारे में ही…

मनोविज्ञान / तो क्या काला जादू होता है? इससे बचने का ये है अचूक उपाय

क्या काला जादू एक हकीकत है? ‘हां’ और शायद ‘नहीं’। क्या ऊर्जा को एक नकारात्मक रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है, जैसे किसी पर काला जादू करना? इन सारे सवालों के बारे में सद्गुरु बताते हैं कि आपको यह समझना होगा कि ऊर्जा सिर्फ ऊर्जा होती है, वह न…