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अध्यात्म

जून-जुलाई महीनों में आने वाले भारतीय आषाढ़ माह की पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा कहते हैं। गुरु पूर्णिमा वह दिन है जब पहले गुरु का जन्म हुआ था यानी भगवान शिव, यौगिक संस्कृति में शिव को भगवान नहीं माना जाता, उन्हें आदि योगी यानी पहले योगी की तरह देखा जाता है।…
अध्यात्म यानी ये प्रक्रिया जन्म और मृत्यु के बारे में नहीं है, ये कुछ ऐसा तैयार करने के बारे में है जिसे मृत्यु न छीन सके। इसे ऐसे समझिए जैसे जब हम कहते हैं कि शिव संहारक हैं, तो इसका मतलब यह नहीं होता कि शिव मृत्यु की वजह हैं,…
अमोघ लीला दास। निश्चित ही सकारात्मक सोचना बेहतर है लेकिन यह सोच तभी विकसित होगी, जब हम अपने दृष्टिकोण को बदलेंगे। दृष्टिकोण हम बदल सकते हैं। हम कैसे देखते हैं, कहां देखते हैं, यह इसके लिए बेहद महत्वपूर्ण है। मान लीजिए हम किसी ऊंची इमारत के नीचे खड़े हैं। हम…

व्यसन / जी नही! नशा करना एक आध्यात्मिक प्रक्रिया नहीं है

कोई भी व्यक्ति, समाज या देश समृद्धि चाहता है क्योंकि पहले स्तर पर यह हमें अपने पसंद का आहार चुनने के विकल्प देती है। अगले स्तर पर यह हमें अपनी पसंद की जीवनशैली चुनने की क्षमता प्रदान करती है। अमेरिका जैसे समृद्ध देश में जहां अपनी पसंद के खान-पान और…

अध्यात्म से ‘ये कैसी चिढ़’, ऐसा क्यों करते हैं लोग

आज बहुत से लोग को आध्यात्मिकता के नाम से ही चिढ़ (इरीटेड होना – एक मानसिक बीमारी) जाते हैं। इसका कारण है और वो ये कि आध्यात्मिकता को दयनीय ढंग से रहने के रूप में चित्रित किया जाता है। यहां आप, यदि पढ़ रहे हैं तो आध्यात्मिक होने के सच्चे…

इच्छाएं / ‘ये खराब है, इसे छोड़ दो’, तो क्या आप इसे छोड़ देंगे?

नोट : सद्‌गुरु इस आलेख में एक ऐसे विषय के बारे में बता हैं जिस पर चर्चा करना ही गलत समझा जाता है, पर आध्यात्मिक मार्ग पर चलने वालों के लिए बेहद महत्वपूर्ण हो सकता है। हम लोग, हमेशा, किसी न किसी बात से छुटकारा पाने के बारे में ही…

मनोविज्ञान / तो क्या काला जादू होता है? इससे बचने का ये है अचूक उपाय

क्या काला जादू एक हकीकत है? ‘हां’ और शायद ‘नहीं’। क्या ऊर्जा को एक नकारात्मक रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है, जैसे किसी पर काला जादू करना? इन सारे सवालों के बारे में सद्गुरु बताते हैं कि आपको यह समझना होगा कि ऊर्जा सिर्फ ऊर्जा होती है, वह न…

प्रबंधन / ध्‍यान देने की क्षमता को बढ़ाने के लिए यहां ध्यान दें

राय एक कल्पना है। जैसे ‘यह तो बहुत बुद्धिमान है, यह मूर्ख है, यह अच्छा है, यह बुरा है।’ ये सब कल्पना है। क्यों न हम कल्पना किए बिना यूं ही देखें? आप लोगों को कम उम्र में ही यह गुण अपने अंदर पैदा करना चाहिए। अगर आप राय नहीं…

समाधान / हर समस्या का हल है आपके पास, बस! तलाश कीजिए

मन वो उपकरण है जो हमारे आस पास होने वाली हर चीज़ का बोध कराता है। ऐसे में अगर मन पुरानी बातों की छाप अपने ऊपर ढो रहा हैं, तो चीजों को साफ-साफ और गहराई से देखना मुश्किल हो जाएगा। सब कुछ साफ देखने के लिए मन दर्पण की तरह…

प्रकृति / मानसिक शांति के लिए ये तरीका है बेमिसाल

प्रतीकात्मक चित्र। यदि शरीर के अंदर की रासायनिक व्यवस्था को सही तरीके से रखना है, तो शांतिपूर्ण होना आवश्यक है और योग ही इसके लिए एक वैज्ञानिक प्रक्रिया है। हम सभी को अपने जीवन में शांति चाहिए। आप शांति से रहना चाहते हैं पर मन अधिकतर उत्तेजित रहता है, अतः…

प्रकृति / श्रीकृष्ण हों या ईसा मसीह क्यों थे इनके जीवन में भी कष्ट

शिव हों या कृष्ण या फिर ईसा मसीह सबको अपने जीवन में कुछ ऐसे हालातों का सामना करना पड़ा जिससे एक आम आदमी बचना चाहता है। तो फिर क्या वे ईश्वर नहीं थे? या फिर उनमें हालात को बदलने की काबीलियत नहीं थी? यह ऐसे प्रश्न हैं जो सदियों से…

ध्यान / अपने आस-पास देखिए खुद को समझना आसान होगा

अगर आप यह आलेख नहीं पढ़ेंगे तो क्या आपको पता चल सकेगा कि यहां आपके लिए कुछ खास लिखा जा रहा है। जीवन का हर पहलू इसी तरह है यदि आप ध्यान नहीं देते हैं, तो आपको पता नहीं चलेगा कि आप क्या खा रहे हैं? कैसी सांस ले रहे…

तर्क / बुद्धिमान हैं भक्त, फिर तार्किक उन्हें मूर्ख क्यों कहते हैं?

भक्त बहुत बुद्धिमान होता है। उनमें जीवन का भाव बहुत गहराई तक होता है, क्योंकि भक्त को यह बात समझ आ गई होती है कि सबसे महत्वपूर्ण चीज आनंद में रहना है। अगर आप जीवन के इस अनुभव को खूबसूरत बना लें, आप दिन के 24 घंटे खुश रह सकें,…

मंथन / ‘भक्ति और नशा’ का मन से है ये गहरा संबंध

भक्ति और नशा इन दोनों का ही मन से गहरा संबंध है। यह दोनों ही सुखद अवस्थाएं हैं। लेकिन यह दोनों ही एक दूसरे के विपरीत है और इन दोनों के बीच अंतर यह है कि भक्ति आपके मन का विकास करती है, जबकि नशा उसे बर्बाद कर देता है।…

चिंतन / अच्छाई और बुराई में क्यों फंसा है इंसान

हमें बचपन से सिखाया जाता है ये चीजें अच्छी हैं और वो चीजें बुरी हैं। समय के साथ अच्छे और बुरे का यही भेद कैसे हमारे लिए बंधन बन जाता है? आप अपने आस-पास देखें, ऐसे बहुत से गुरु हैं, जिन्होंने लोगों को अच्छाई का पाठ पढ़ाया है। कुछ लोग…