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भावनाएं / क्या जिंदगी में बार-बार हो सकता है प्यार?

प्रतीकात्मक चित्र।

बहुत सी चीजें हमें प्यार करना सिखाती हैं। लेकिन कोई यह नहीं सिखाता कि प्यार को मिटाया कैसे जाए। यह एक ऐसा प्रश्न है जो अमूमन उन युवाओं के मन में रहता है जो ब्रेकअप जैसी भावना से रू-ब-रू हो चुके हैं। दरअसल आप जीवन में जो भी रिश्ते बनाते हैं उसके बनाने के पीछे सोच यह है कि जीवन के हर स्तर पर एक सहारा है। हर तरह से दो लोग एक अकेले इंसान से ज्यादा अच्छे रह सकते हैं। यही सोच है।

सद्गुरु जग्गी वासुदेव बताते हैं कि, ‘जब हम दिल टूटने की बात करते हैं तो, हमें ये समझना चाहिए कि प्रेम संबंध क्या होता है। जब आप 10 साल के थे। आपने अपने आस-पास देखा कि दुनिया काफी साधारण थी। अचानक से कुछ समय बाद आपमें थोड़ा सा रासायनिक जहर आ गया, आस-पास मौजूद लड़की या लड़कों को देखकर, जो भी आप हैं उसके विपरीत। 10-12 साल की उम्र तक यह सिलसिला ठीक चल रहा था। 13-14 साल की दुनिया में लोगों में बदलाव को देखना अपने आप में एक दुनिया है। वो इसलिए होता है कि आपकी बुद्धि का आपके हार्मोन्स ने अपहरण कर लिया है। तो इससे अजीब चीजें हो रही हैं। ये आपको हर तरह की चीजों पर विश्वास दिला रहा है। जब आप मुढ़कर देखेंगे तो अपनी मूर्खता महसूस करेंगे। लेकिन, ये ठीक है इसमें कुछ गलत नहीं है, लेकिन ये बहुत जरूर है कि हम समझें कि हमारे साथ क्या हो रहा है। वरना हम बेबकूफियां करेंगे, जिनका शायद हमें बाद में पछतावा हो। ये नैतिकता का प्रश्न नहीं है। ये जीवन को समझदारी से संभालने का प्रश्न है। ये बार-बार दिल टूटने की बात जीवन में किसी से भी जुड़ने को लेकर आपमें पीढ़ा पहुंचने का दर्द पैदा कर सकती है।’

आपका दिल बार-बार टूटा कुछ समय तक ये मजेदार लगा। लेकिन कुछ समय बाद आप वाकई में जीवन में किसी पर भी भरोसा नहीं करेंगे। क्योंकि कोई अन्य व्यक्ति हमेशा एक समस्या होता है, सिर्फ उस समय जब आपकी भावनाएं उस समस्या के पार जाने देती हैं। तो वो किसी रूप में आपका हिस्सा बन जाते हैं। अगर हमारा दिल बार-बार टूटे तो हम कभी भी अपनी भावनाओं को उन सीमाओं के पार नहीं जाने देंगे। हम हमेशा सावधान रहेंगे। क्योंकि वैसे भी आपके शरीर के समाप्त होने की तारीख तय है।

रिश्ते बनाने के पीछे सोच यह है कि ये जीवन के हर स्तर पर यह एक सहारा है, ताकि दो दिमाग और शरीर पहले से बेहतर रह सकें। कई तरीकों से जीवन के अलग-अलग आयामों में एक रह सकें। काम में, भावनाओं में लगभग जीवन की हर परिस्थितियों में साथ रह सकें। जीवन को व्यवस्थित करने और संवारने में हर तरह से दो लोग एक अकेले इंसान से ज्यादा अच्छे से रह सकते हैं तब निश्चित रूप में प्रकृति हमें एक दूसरे की ओर ले जाती है क्योंकि प्रकृति को आपके प्रेम संबंध की परवाह नहीं है। वो चाहती है कि आप सिर्फ बच्चे पैदा करें ताकि विकास का क्रम न रुके। तो बच्चे पैदा करना इस समय लक्ष्य नहीं हैं क्यों कि दुनिया की संख्या बढ़ रह है हम दो हमारे दो काफी है। हम इसे किनारे कर सकते हैं लेकिन प्रकृति उसी ओर इंगित करती है।

लेकिन हमारी भावानात्मक, शारीरिक और मानसिक जरूरतें शायद आर्थिक और समाजिक जरूरतें हैं। इन जरूरतों को गरिमापूर्ण तरीके से पूरा करने के लिए…देखिए! हम एक इंसान के रूप में वो नहीं कर सकते हैं जो जानवर करते हैं, हम इंसान के रूप में इन चीजों को जागरुक और गरिमापूर्ण तरीके से करना चाहेंगे। चाहें हम खाएं, संभोग करें या सोएं हम उसे सुंदरता के लिहाज से थोड़ा ठीक से करना चाहेंगे। ये चीज जरूरी है। इसके लिए हमें एक ओर इंसान का सहयोग चाहिए। जो खुद भी किसी रूप में हमसे मेल खाता हो। अगर हर दो दिन में आपका दिल टूटता है और ये चलता रहता है तो आप इसकी परेशानियां देखेंगे।

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