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स्व-प्रेरणा / जिंदगी को संतुलित रखने का ये है आसान तरीका

आपकी बुद्धि, आपकी काबिलियत, और आपकी योग्यता पूरी तरह से अभिव्यक्त तभी हो पाएगी, जब आप अपने भीतर अच्छी तरह संतुलित होंगे।

जीवन में संतुलन तभी आता है जब आप पूरी तरह से चिंताओं से मुक्त होते हैं। चिंताओं से मुक्त हो जाने का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि आप बेफिक्र होकर जीने लगें। आप भविष्य और वर्तमान के बारे में कोई भी प्लान न करें। ऐसा करना बेवकूफी है। बात जब जीवन में संतुलन की हो रही हो तो यह पूरी तरह से आपकी बुद्धि, काबिलियत और योग्यता से जु़ड़ी होती है।

अमूमन लोगों में बुद्धि, काबिलियत और योग्यता होने के बाद भी वह जीवन में संतुलन नहीं रख पाते इसका सबसे बड़ा कारण है, वो अपनी ही बनाई हुई समस्याओं में उलझे होते हैं। वो समस्याएं परिवार, आस-पास के माहौल, देश-दुनिया से जुड़ी हो सकती हैं। देश दुनिया की समस्याओं का अंत आप सोशल मीडिया और टीवी पर कम से कम वक्त गुजार कर कर सकते हैं लेकिन आप अपने आस-पास घटने वाली घटनाओं और परिवार से दूर नहीं जा सकते हैं।

ऐसे में आपके पास एक शक्तिशाली दिमाग और आपके द्वारा अर्जित की गई योग्यता होने के बाद भी आप विषम परिस्थिति आने पर उसे संतुलित नहीं कर पाते हैं। यह तो बात हुई कि जीवन में संतुलन क्यों नहीं आ पाता है। लेकिन संतुलन कैसे लाया जाए यह ज्यादा महत्वपूर्ण है। यहां तीन उदाहरण हैं।

पहला उदाहरण

एक बिजनेसमेन। उसकी कई कंपनियां हैं। कुछ फायदे में हैं, कुछ अपनी अंतिम सांस ले रही हैं। कंपनियों में कई कर्मचारी और अधिकारी हैं। बिजनेसमेन बुद्धि, काबिलियत और योग्यता में पूरी तरह से बेहतर हैं लेकिन वो असंतुलित हैं। सबसे बड़ी वजह है उसका टाइम मैनेजमेंट जो हमेशा गड़बड़ रहता है। बिजनेसमेन एक मोटिवेशन स्पीकर भी है। वह अपनी कुछ कंपनियों में जाकर स्पीच भी देता है। वहां सब कुछ ठीक है, लेकिन कुछ कंपनियों में जाकर शांत रहना पसंद करता है। चीजें उलझ रही हैं। ऐसा इसलिए कि वह अपनी पूरी क्षमता का प्रयोग नहीं कर पाता है। क्योंकि वह खुद को वक्त नहीं दे रहा है। ऐसे में उसे चाहिए कि पहले वो अपना जीवन संतुलित करे। इसके लिए उसे टाइम से सोना, टाइम से जागना होगा। टाइम से खाना टाइम से अपने सभी ऑफिस के कार्यों को प्रोपर तरह से संचालित करना होगा। यहां उस बिजनेसमेन के जीवन का संतुलन गड़बड़ है यदि वो ठीक करता है तो उसकी वो कंपनियां भी बेहतर प्रोडक्टिविटी कर पाएंगी जिनके कारण उसे नुकसान उठाना पढ़ रहा है।


फंडा- सही समय पर सही चीजों को कहना।

दूसरा उदाहरण

एक स्टूडेंट। नाम अमन। मान लेते हैं अमन अभी 11वीं में पढ़ता है। वह देर से उठता है। देर से सोता है। आधुनिक सुविधाएं उसके पास मौजूद हैं, लेकिन वो अपने लक्ष्य पर केंद्रित ना होते हुए उन चीजों में इनवॉल्व है, जो उसकी पढ़ाई को प्रभावित कर रही हैं। वह रोज ट्युशन भी जाता है। स्कूल भी जाता है। ठीक उसी की क्लास में पढ़ने वाला नमन भी इसी दिनचर्या को फॉलो करता है लेकिन वो जो भी काम कर रहा है उस पर फोकस है। यहां बात फोकस यानी काम पर केंद्रित होने की है। यह बात सभी पर लागू होती है। चाहे वो किसी स्कूल का स्टूडेंट हो या कोई ओर यदि आप कोई भी कार्य केंद्रित होकर करें तो उसे संतुलित किया जा सकता है। जब काम संतुलित होगा तो आपको वो जीवन जहां आप एक स्टूडेंट हैं, उस भूमिका में आप सफल होंगे।

फंडा – जो करना है उसे करके ही रहना।

तीसरा उदाहरण

पूजा, गृहणी हैं। वो अपने संयुक्त परिवार के साथ रहती हैं। उनका फंडा यह है कि सभी को खुश नहीं रख सकते लेकिन सभी की जरूरतों का ध्यान उन्हें रहता है इसलिए वो हमेशा टाइम मैनेजमेंट में रहते हुए परिवार के हर सदस्य के जरूरतों को पूरा करती हैं। इस तरह उनका जीवन संतुलित रहता है और पूजा को भी अपने लिए थोड़ा-बहुत वक्त मिलता है।  

फंडा – टाइम मैनेजमेंट जरूरी, लेकिन खुद के लिए भी वक्त निकालें।

इन तीनों ही उदाहरण में जो कॉमन है वो है टाइम मैनजमेंट और लक्ष्य पर केंद्रित होना। यदि आप इन दोनों को अपनी जिंदगी में शामिल कर लेते हैं तो आपकी बुद्धि, आपकी काबिलियत, और आपकी योग्यता पूरी तरह से अभिव्यक्त हो पाएगी, क्योंकि यह आपके भीतर मौजूद हैं बस इन्हें सही तरह से सही समय पर सामने लाना है। अपनी जिंदगी को संतुलित रखने के लिए यह आप आसानी से कर सकते हैं।

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