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समाधान / मूर्खता से भरा विचार है सफल और असफल होना, लेकिन कैसे?

आपके सभी विचार, सोच, भावनाएं या मूल्य आपके नहीं हैं, ये आपने किसी ओर से लिए हैं और ये आपके अंदर राज करते हैं। ठीक इसी तरह सफलता का विचार आपका अपना विचार है, ही नहीं। सफलता क्या है, ये किसी ओर का विचार है।

आपके धर्म, समाज और संस्कारों ने आपको ऐसा मानने के लिए प्रशिक्षित किया है। ताकि आप किसी दूसरे के विचारों के गुलाम न बनें। आपके जीवन में आ रहे पैसों की मात्रा आपकी सफलता या असफलता नहीं है और आपको दुनिया में मिलने वाला मान-सम्मान भी आपकी सफलता या असफलता नहीं है। आप अपने जीवन में सफल होंगे अगर आप ये जान लें कि नर्क में भी आनंदपूर्ण ढंग से कैसे रहा जाता है।

समाज जिसे सफलता या असफलता कहता है, हमें उस से प्रभावित नहीं होना चाहिए। अगर हम अपने जीवन को एक बड़ी संभावना को हासिल करने की दिशा में एक क़दम बना लें, तो फिर असफलता नाम की कोई चीज़ नहीं रहेगी।

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असफलता जैसी कोई चीज नहीं है। ये बस एक विचार है,सफलता भी एक मूर्खता से भरा विचार ही है। दुनिया को बदलने की बजाय आप अपनी इस सोच को बदलिए। अगर आप बस वही बदल देते हैं तो सब कुछ बढ़िया हो जाएगा। अगर आप रास्ते पर भीख मांगने वाले एक भिखारी होते और आज किसी रेस्तरां में जाकर समोसा खा सकते, तो आपके लिए ये सफलता है।

यदि आप सफल होते हैं तो भी तनाव में रहते हैं और असफल तब भी इन दोनों ही परिस्थितियों का निर्माण हमारे आस-पास मौजूद लोगों के कारण होता है। यह तब होता है जब आप इनको गंभीरता से लेते हैं और अपने मन में इनके विचार प्रवेश करने देते हैं।

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यदि आप ऐसे लोगों को गंभीरता और इनके विचारो को महत्व नहीं देते तो आप सुकून में होते हैं। यह हर किसी के साथ हो रहा है। ये आप पर और सिर्फ आप पर निर्भर करता है कि आप इस पूरे घटनाक्रम को किस तरह देख रहे हैं।

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दरअसल, सफलता का पैमाना हमने आलीशान जीवन को मान लिया है, जहां रुपया, मकान, गाड़ी और भौतिक सुविधाओं की वो हर चीज जो आपकी जिंदगी को आसान बना रही है और इसके साथ सत्ता का सुख लेकिन इसमें सुकून पूरी तरह से गायब है, जिनके पास यह सब नहीं है समाजिक-तौर पर उन्हें हिक़रत भरी नज़रों से देखा जाता है। उन्हें समाजिक-तौर पर असफल करार दिया जाता है।

लेकिन, इस असफलता शब्द की रचना किसने की, खुद इंसान ने और इंसान खुद ही सफल-असफल शब्दों के चक्रव्यूह में इर्द-गिर्द घूमता रहता है।

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