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विशेष / मूर्ख नहीं होते, तो कैसी होती ये दुनिया!

प्रतीकात्मक चित्र : यह भी जरूर सोचिए की यदि पेड़ काट दिए जाएंगे तो कैसी होगी दुनिया?

विद्वान हैं, इसलिए मूर्खों का वजूद है, यह तो नहीं पता। मगर यह निश्चित है कि मूर्ख हैं, इसलिए विद्वानों का अस्तित्व है। जानवरों में विद्वान नहीं पाए जाते हैं, इसलिए वह मूर्ख भी नहीं होते।

दुनिया में मनुष्य ही एक ऐसा प्राणी है जिसमें विद्वान और मूर्ख दोनों ही पाए जाते हैं। मूर्ख दिवस जिसे अप्रैल फूल डे भी कहते हैं यह अलग-अलग देशों में मनाया जाता है। कुछ देशों जैसे ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, दक्षिण अफ्रीका और ब्रिटेन में अप्रैल फूल डे केवल दोपहर तक मनाया जाता है।

दरअसल, इन देशों में अप्रैल फूल डे दोपहर तक मनाए जाने के पीछे यह वजह है कि यहां के अखबार केवल सुबह के अंक में मुख्य पेज पर अप्रैल फूल डे से जुड़े विचार रखते हैं। जबकि कुछ देशों जैसे जापान, रूस, आयरलैंड, इटली और ब्राजील में पूरे दिन मूर्ख दिवस मनाया जाता है।

पहली बार अप्रैल फूल डे कब मनाया गया इस बात को लेकर अभी तक कोई एक मत नहीं है, लेकिन कुछ लोगों का मानना है कि फ्रेंच कैलेंडर में होने वाला बदलाव भी अप्रैल फूल डे मनाने का कारण हो सकता है। वहीं कुछ लोग मानते हैं कि इंग्लैंड के राजा रिचर्ड द्वितीय की एनी से सगाई के कारण अप्रैल फूल डे मनाया जाता है।

सन् 1392 में ब्रिटिश लेखक चॉसर की किताब कैंटरबरी टेल्स में एनी का जिक्र मिलता है। इस किताब की एक कहानी नन्स प्रीस्ट्स टेल में इंग्लैण्ड के राजा रिचर्ड द्वितीय और बोहेमिया की रानी एनी की सगाई की तारीख 32 मार्च घोषित करते हैं, जिसे वहां की जनता ने सच मान लिया और मूर्ख बन बैठे। तब से 32 मार्च यानी 1 अप्रैल को अप्रैल फूल डे के रूप में मनाया जाने लगा।

कुछ लोग मू्र्ख दिवस को हिलारिया त्योहार से भी जोड़ कर देखते हैं। हिलारिया एक त्योहार है जो प्राचीन काल में रोम में मनाया जाता था। ईरानी लोग अपने त्योहार नौरोज के तेरहवें दिन हंसी-मजाक करते हैं जो सामान्यतः 1 या 2 अप्रैल को पड़ता है।

ठीक इसी तरह प्राचीन भारत में ‘सुरान भवन’ नामक मुर्खोत्सव काशी, राजगीर और श्रावस्ती में धूमधाम से मनाया जाता था। यह उत्सव पूरे एक सप्ताह चलता तक चलता था। इस उत्सव का उल्लेख जातक ग्रंथों में मिलता है। बनारस में आज भी वरनाप्याला नामक महोत्सव हर साल मनाया जाता है।

पोलैंड में अप्रैल फूल डे प्राइमा एप्रिलिस के नाम से जाना जाता है। पोलैंड में इस दिन मीडिया और सरकारी संस्थान हाक्स तैयार करते हैं। फ्रांस, इटली और बेल्जियम में अप्रैल फूल डे के दिन कागज  की मछली बनाकर दोस्तों के पीछे चिपका दिया जाता है। इस तरह ये लोग दूसरों पर हंस कर आनंद लेते हैं।

इतिहास में सन् 1860 की 1 अप्रैल बेहद मशहूर रही है। हुआ कुछ यूं था कि लंदन में हजारों लोगों के पास पोस्ट कार्ड पहुंचे जिसमें एक सूचना थी कि आज शाम टॉवर ऑफ लंदन में सफेद गधों के स्नान का कार्यक्रम होगा। देखने के लिए आप आमंत्रित हैं। कृपया साथ में कार्ड अवश्य लाएं।

प्राचीन काल में चीन में ‘डींग दिवस’ मनाया जाता था। इस दिन चीनी लोग लंबी-लंबी डींगे मारते थे। चीन के यांगसी प्रांत में हर साल नदी देवता का विवाह एक कुंवारी कन्या से होता था। कन्या को पकवान आदि खिला कर उसका श्रृंगार किया जाता और लकड़ी को एक तख्ते को सुहाग सेज बना कर उस पर लिटाया दिया जाता था और उस तख्ते को नदी में प्रवाहित कर दिया जाता था। जो कन्या सहित नदी में डूब जाता था। यह क्रूरता का परिचायक था।

तो वहीं, अमेरिका की कौतुक समिति नामक संस्था ने 1945 में अप्रैल के पहले सप्ताह को राष्ट्रीय हास्य सप्ताह मनाने का निर्णय लिया था। सन् 1960 में अप्रैल के पहले सप्ताह को अमेरिका के पब्लिसिटी स्टंट के रूप में जोरदार ढंग से मनाया गया।

फ्रेंच कैलेंडर में बदलाव के तौर पर भी मू्र्ख दिवस मनया जाता है। सन् 1582 में पोप ग्रेगोरी XIII ने 1 जनवरी से नए कैलेंडर की शुरुआत की। इसके साथ ही मार्च के आखिर में मनाए जाने वाले न्यू ईयर के सेलिब्रेशन की तारीख में बदलाव हो गया। कैलेंडर की यह तारीख पहले फ्रांस में अपनाई गई। हालांकि, यूरोप में रह रहे बहुत से लोगों ने जूलियन कैलेंडर को ही अपनाया था। जिन्होंने नए कैलेंडर को अपनाया उन्होंने उन लोगों को फूल (मूर्ख) कहना शुरू कर दिया।

लंदन में कई लोगों को ‘वॉशिंग द लायंस’ यानी शेर की धुलाई देखने के लिए 1 अप्रैल 1698 को धोखे से टावर ऑफ लंदन ले जाया गया था। तब इसकी पारंपरिक घोषणा हुई थी। हालांकि 1857 से ‘वॉशिंग द लायंस’ का टिकट जारी होने लगा।

फ्रांस के नारमेडी मे 1 अप्रैल को एक अनोखा जुलूस निकलता था, जिसमें एक घोड़ा गाड़ी में सबसे मोटे आदमी को बैठाकर सारे शहर में घुमाया जाता ताकि उसे देखते ही लोग खिल खिलाकर हंस पड़े और फिर नाचते गाने लगे।

डेनमार्क में 1 मई को ‘माज-काट’ के रूप में जाना जाता है जिसका मतलब ‘मे-कैट’ होता है और ऐतिहासिक रूप से अप्रैल फूल डे के समान होता है। हालांकि, डेनमार्क वासी अप्रैल फूल डे भी मनाते हैं।

एक अन्य लोक कथा के अनुसार एक अप्सरा ने किसान से दोस्ती की और कहा, ‘यदि तुम एक मटकी भर पानी एक ही सांस में पी जाओगे तो मैं तुम्हें वरदान दूंगी। मेहनतकश किसान ने तुरंत पानी से भरा मटका उठाया और पी गया।’ जब उसने वरदान वाली बात दोहराई तो अप्सरा बोली, ‘तुम बहुत भोल-भाले हो, आज से तुम्हें मैं यह वरदान देती हूं कि तुम अपनी चुटीली बातों द्वारा लोगों के बीच खूब हंसाओगे। अप्सरा का वरदान पाकर किसान ने लोगों को बहुत हंसाया, हंसने-हंसाने के कारण ही एक हंसी का पर्व जन्मा, जिसे हम मूर्ख दिवस के नाम से पुकारते हैं।’

तो इस तरह मूर्ख दिवस हमारे देश ही नहीं दुनिया भर में हंसी के ठहाके और लोगों को खुश रहने की वजह देता है।

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