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अनुभव / यदि आप स्मार्ट हैं तो बेवकूफ कौन?

स्मार्ट होना और बुद्धिमान होना, ये दो अलग अलग बातें हैं। पहले, किसी के बारे में बात करते हुए, हम उसे बुद्धिमान कहते थे। लेकिन आजकल, कोई परवाह नहीं करता कि आप बुद्धिमान हैं या नहीं। उनको एक ही फ़िक्र होती है कि क्या आप स्मार्ट हैं? अगर आप स्मार्ट हैं तो आप दुनिया में अपना काम निकाल सकते हैं। बस! आज के दौर में आप सफल हो जाएंगे।

सद्गुरु जग्गी वासुदेव कहते हैं, ‘अगर यहां आप हैं और मैं हूं तो मेरा आप से ज्यादा स्मार्ट होना अच्छा हो सकता है लेकिन यदि यहां पर सिर्फ मैं और मैं ही हूं तो मेरा अपने आप से ज्यादा स्मार्ट होना बेवकूफी ही है।’

‘स्मार्ट होना तभी काम करता है, जब आप होते हैं और कोई दूसरा होता है। जब सिर्फ आप और आप ही होते हैं, तो आप अपने आप को जितना ज्यादा स्मार्ट समझते हैं, उतने ही ज्यादा बेवकूफ बनेंगे।’

लेकिन बुद्धि का स्वभाव अलग है। बुद्धि हमेशा आपको कोई दौड़ जीतने के लिये तैयार नहीं करती। वास्तव में आप दूसरे से धीमें हो सकते हैं क्योंकि उन लोगों की अपेक्षा आप कहीं ज्यादा चीज़ें देख सकते हैं। जो लोग स्मार्ट हैं और सिर्फ इस कोशिश में हैं कि अपने जीवन का कोई छोटा उद्देश्य पूरा कर लें, हो सकता है वे वहां ज्यादा तेज़ी से पहुंच जाएं और हो सकता है लोग उनके लिए तालियां भी बजाएं। लेकिन आपकी बुद्धि इतनी सारी चीज़ें ग्रहण कर रही होगी, कि वो आपको एक कदम भी उठाने नहीं देगी।

अगर आप स्मार्ट हैं तो इसका मतलब ये होगा कि आपने अपने लाभ के लिए परिस्थितियों को किसी तरह संगठित कर लिया है। अलग अलग तरह के लोगों को इस आधार पर स्मार्ट समझा जाता है कि आप किस तरह के समाज में हैं, समय कैसा है, परिस्थिति कैसी है और आप किस तरह के लोगों के बीच में हैं।

आज, वे लोग जो कुछ संकोच मे होते हैं, वे आम तौर पर बेवकूफ माने जाते हैं। बिना किसी संकोच वाले लोग स्मार्ट कहलाते हैं क्योंकि वे जानते हैं कि कुछ ख़ास परिस्थितियों का लाभ कैसे लिया जाए। सृष्टि को समझना एक बात होती है, पर सृष्टि के मूलतत्व को समझना बिलकुल ही अलग चीज़ है, इसमें आप का स्मार्ट होना बिलकुल भी काम नहीं करेगा।

‘वे लोग जो कुछ संकोच मे होते हैं, वे आम तौर पर बेवकूफ माने जाते हैं। बिना किसी संकोच वाले लोग स्मार्ट कहलाते हैं क्योंकि वे जानते हैं कि कुछ ख़ास परिस्थितियों का लाभ कैसे लिया जाए।’

आप इस तरह दुनिया को संभाल सकते हैं, लेकिन बात जब आप के आंतरिक स्वभाव की आती है तो ये आप को कहीं नहीं ले जाएगा, क्योंकि सृष्टि को समझना एक बात होती है, पर सृष्टि के मूलतत्व को समझना बिलकुल ही अलग चीज़ है, इसमें आप का स्मार्ट होना बिलकुल भी काम नहीं करेगा।

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स्मार्ट होना तभी काम करता है, जब आप होते हैं और कोई दूसरा होता है। जब सिर्फ आप और आप ही होते हैं, तो आप अपने आप को जितना ज्यादा स्मार्ट समझते हैं, उतने ही ज्यादा बेवकूफ बनेंगे।

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