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पहल / टॉयलेट बनाने के लिए नहीं थे रुपए, 87 साल की महिला उठाया ये कदम

जम्मू के ऊधमपुर जिले की 87 साल की राक्खी ने कुछ ऐसा कर दिखाया, जिनकी मिसाल आज हर व्यक्ति दे रहा है। आलम यह है कि आस-पास रहने वाले कई लोग तो राक्खी को अपना रोल मॉडल मानने लगे हैं।

दरअसल, राक्खी भारत के स्वच्छ भारत मिशन में सहयोग देने के लिए खुद ही शौचालय बना रही हैं। बुजुर्ग महिला राक्खी चाहती है कि उनका गांव भी खुले में शौच से मुक्त हो। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक राक्खी बताती हैं कि उन्हें खुले में शौच जाने के दुष्प्रभावों की जानकारी नहीं थी, लेकिन जब इसके बारे में पता चला तो समझ में आया कि हम अपने आने वाले भविष्य को भी खतरे में डाल रहे हैं।

बुजुर्ग महिला ने खुद ही ईंटों को जोड़ कर आधी दीवार खड़ी कर दी है। वह कहती हैं कि मेरे पास पैसे नहीं है इसलिए किसी की मदद लेने की बजाए खुद ही टॉयलेट बनाने की उम्मीद लेकर जुट गईं हैं।


80 साल की बहू सास के लिए बनाया टॉयलेट

कुछ दिनों पहले उत्तर प्रदेश के कानपुर के अनंतापुर में एक 80 साल की बहू ने अपनी 102 साल की सास के लिए बकरियां बेच कर टॉयलेट  का निर्माण करवाया था ताकि उनकी सास को तकलीफ न हो। इसके लिए उसे अपनी 6 बकरियां बेचनी पड़ी थीं।

जब बहु ने रसोई तोड़कर बनवाया टॉयलेट

तो वहीं, छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार जिले में स्वच्छता को प्राथमिकता देने के लिए एक 80 साल की महिला सोनबती साहू ने रसोई घर तोड़कर शौचालय बनवाया उन्हें बाद में स्वच्छता के लिए उत्कृष्ट व्यक्ति के रूप में चयनित किया गया है।

इस महिला ने शासन के निर्देशानुसार शौचालय निर्माण के लिए 1500 रुपए जोड़कर नकद अनुदान राशि पालिका कोष में जमा कराए। उन्होंने खपरैल वाले के मकान में मौजूद रसोई घर को तोड़कर शौचालय का निर्माण करवाया था।

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