Press "Enter" to skip to content

अनुभव / उम्र का दायरा थोड़ा कीजिए कम, हर रिश्ते से गायब हो जाएगा ग़म

उम्र हर मिनट, हर घंटे और हर दिन बढ़ जाती है और बढ़ता है ‘उम्र का दायरा’, यह दायरा उन लोगों से बढ़ जाता है जो हमसे बाद में जन्में या हमारे कारण ही जन्में हैं। जब उम्र का दायरा बढ़ता है यानी आप वयस्क होते हैं, तब आप अपने से छोटी उम्र के लोगों के प्रति कैसा व्यवहार करते हैं। यह बात काफी हद तक आपके सामाजिक, पारिवारिक और सबसे जरूरी आपके विवेक पर निर्भर करती है।

कोई भी जीव जन्मा है तो वह वयस्क भी होगा और वृद्ध भी और आगे चलकर वह दुनिया से चला जाएगा। यदि हम सिर्फ इंसान की बात करें तो उसका और उसके पीछे जन्में लोगों के बीच जो दायरा बनता जाएगा वह काफी गंभीर भी हो सकता है और रोचक भी, यह सब कुछ आप पर ही निर्भर करता है कि आप अपनी जिंदगी को कैसे जीना चाहते हैं।

ऐसे मिलती है खुशियां

कई वयस्क या वृद्ध खुद से कम उम्र के लोगों के बीच काफी सुकून भरा महसूस करते हैं। वह उन्हें दोस्त या सलाहकार मानते हैं और उनसे हर उस बात को शेयर करते हैं, जिनका निराकरण वह नहीं कर पाते हैं। यह वह लोग होते हैं, जो उम्र के दायरे को अपनी जिंदगी में नहीं आने देते, उनका लक्ष्य यही होता है कि वो खुद खुश रहें और उनसे जुड़े वो सभी लोग खुशी महसूस करें, जो उनका सम्मान करते हैं।

भूतकाल से सीखें वर्तमान में जीना

हिंदू पौराणिक कथा के नायक ध्रुव की जब कभी बात होती है, तब उनकी कम उम्र का जिक्र जरूर होता है। वह बहुत कम उम्र में ही ईश्वर भक्ति के मार्ग पर चल पड़े थे। वह प्रभु भक्ति में इतने आगे निकल गए कि उनके पिता राजा उत्तानपाद जो ध्रुव से कई साल बड़े थे, उनके इर्द-गिर्द भी नहीं पहुंचते थे।

उनके बीच उम्र और विचार दोनों का दायरा इतना ज्यादा था कि एक पिता अपने पुत्र को ही नहीं समझ पाया। यही हाल- ए- बयां करता हमारा वर्तमान सामाजिक परिदृश्य है। जहां रिश्तों के बीच दूरियां इतनी ज्यादा बढ़ चुकी हैं कि लगभग हर रिश्ता अपने अंदर खुशियां तलाशने की जद्दोजहद में लगा हुआ है। उम्र का दायरा कहें या विवेक यह केवल और केवल इंसानी जज़्बात ही ठीक कर सकते हैं और यह तभी पैदा होंगे जब आपस में उम्र का दायरा कम होगा।

क्यों बढ़ता है ये दायरा

जनरेशन गैप इसका मूल कारण है। यदि आप बड़े हैं और अपने छोटों के प्रति स्नेह और सम्मान के भाव को रखते हैं, तो उम्र का ये दायरा कम किया जा सकता है। जब यह कम होगा तो कई तरह की सामाजिक समस्याओं का हल निकाल सकते हैं, तब हम अपने कम उम्र या कहें कम तजुर्बे वाले लोगों को यह बताने में सक्षम हो जाएगें कि क्या गलत है और क्या सही। ऐसे में आप कम उम्र के लोगों से तकनीकी का बेहतर उपयोग और उसको रोजमर्रा की जरूरतों में कैसे सरल बनाकर उपयोग किया जा सकता है, यह सबकुछ बेहतर तरीके से सीख सकते हैं।

अधिक जानकारी के लिए यहां क्लिक करें, ‘गूंज’

(आप हमें फेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम, लिंक्डिन और यूट्यूब  पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं।)

More from जीने की राहMore posts in जीने की राह »

Be First to Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *