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इंटरव्यू / महिलाओं की कई समस्याओं का ‘SHEROES’ में मिलता है समाधान

शायरी चहल ‘शीरोस’ की फाउंडर और सीईओ हैं। शीरोस महिलाओं के लिए करियर, व्यक्तिगत समस्याओं की काउंसलिंग और आत्मनिर्भर कैसे बना जाए इसके लिए एडवाइज देने वाला एक ऑनलाइन ऐप है, जो कि पूरी तरह से निःशुल्क है।

The Feature Times को दिए इंटरव्यू में शायरी बताती हैं कि ‘इस संसार में कोई किसी की मदद नहीं करता जब तक लोग अपनी मदद खुद न करें क्योंकि हर मैदान पर फतेह आपको खुद ही हासिल करनी है।’

यह वह दौर था जब मेरा स्ट्रगल चल रहा था। जिंदगी में बिना स्ट्रगल के सफलता नहीं मिलती है। मुझे याद है मैनें जब अपना पहला स्टार्टअप न्यूजलिंक शुरू किया था तो काफी भागमभाग वाली लाइफ थी। आज भी मेरे कई दोस्त उस दौर को याद करते हैं।

पहले स्टार्टअप की वो बातें

उन्होंने पहला स्टार्टअप न्यूजलिंक मर्चेंट नेवी के शिप के लिए शुरू किया था। वह बताती हैं एक दिन में करीब 10 से 15 हजार शिप समुद्र में होते हैं। इनके पास न्यूजपेपर नहीं होते। हमने ‘गुड न्यूज फॉर होम’ टैग लाइन के जरिए 1999 में न्यूजलिंक सेटेलाइट न्यूजपेपर की शुरूआत की। यह न्यूजपेपर लोगों को उनके शहर से जोड़े रखता है। यह एक तरह से ट्रेवल के दौरान होने वाले सीरियस डिप्रेशन को दूर करता है।

समस्या नहीं सिर्फ समाधान

न्यूजलिंक के बाद उन्होंने महिलाओं के लिए फ्लेक्सिमोम्स और बाद में शीरोस नाम से ऑनलाइन ऐप और वेबसाइट लांच की। शायरी बताती हैं कि मैं अक्सर अपने आस-पास महिलाओं की समस्याओं को देखती थी, उनकी इन समस्याओं के लिए प्रोफेशनल तरह से वर्क की जरूरत थी, जिसे हम शीरोस के जरिए पूरा कर रहे हैं। हालांकि हमारी सरकार, एनजीओ और महिलाओं की समस्याओं पर काम करने वाले कई आर्गनाइजेशन हैं लेकिन शीरोस महिलाओं को सीधे जोड़ता है। जहां वह अपनी समस्याओं को शेयर कर उनका समाधान हासिल करती हैं।

घर से करनी होगी शुरूआत

हमारे देश में जेंडर प्रायोरिटी एक सीरियस मुद्दा है। जिसके लिए हर व्यक्ति को आगे आना होगा। हम विकासशील देशों में शामिल है हमें विकसित देश यदि बनना है तो हमें महिलाओं और पुरुषों के बीच जो असमानता की खाई है उसे भरना होगा। इसकी शुरूआत हमें अपने घर से करनी होगी। हम विकसित देशों की कई बातों की तुलना करते हैं? क्या हम विकसित देशों में महिलाओं की क्या स्थिति है और हमारे देश में क्या है इस बात को गंभीरता से लेते हैं, शायद बहुत कम।

महिलाएं हर क्षेत्र में आगें हैं लेकिन उन्हें फाइनेंशियल इंडिपेंडेंट होने की बेहद जरूरत है, ताकि उनका खुद का वजूद बना रहे। जब तक हमारे समाज में जेंडर प्रायोरिटी नहीं होगी तब तक महिलाओं की स्थिति पूरी तरह से बेहतर नहीं हो सकती है। हमें महिलाओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर होने की जरूरत है।

यहां से मिलती है मुझे प्रेरणा

शायरी की प्रेरणा उनकी मां है। जिन्होंने हर समय उनको सपोर्ट किया। जिसके कारण वह हर काम को बेहतर तरह से कर पाती हैं। वह बताती हैं, हमारे परिवार में बहुत कम महिलाएं काम करती हैं, लेकिन मैं आज जो भी हूं उसके पीछे मेरी मां की बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका है। इसके अलावा माया एंजेलो अमेरिकन पोएट हैं। उन्होंने 1960 शीरोस नाम की कविता लिखी, जिससे मैं काफी प्रभावित हूं। मेरी तीसरी सबसे बड़ी इंस्पिरेशन महिलाएं हैं जिनके साथ में सारा दिन काम करती हूं।

कैसे काम करता है शीरोस

शीरोस में हम महिलाओं के नेटवर्क को जोड़ते हैं। यदि हम अपने इतिहास के पन्नों को पलटें तो पता चलेगा कि महिलाओं का विकास कम्युनिटी (समुदाय) में हुआ हैं। शीरोस के ऐप और ऑनलाइन वेबसाइट पर ऐसे कई नेटवर्क से लाखों महिलाएं कनेक्ट हैं। यहां उन महिलाओं के ग्रुप्स हैं जो करियर, बिजनेस, आर्ट, लीगल सपोर्ट, इन्फोर्मेशन नेटवर्क, पीयर ग्रुप और भी अन्य एडवाइजर के तौर पर मौजूद हैं। जहां लॉग इन कर महिलाएं अपनी समस्याओं को चेट के जरिए पूछ सकती हैं।

यहां बेसिकली ऑफ लाइन मॉडल को हमने ऑनलाइन कर दिया है। यह महिलाओं के लिए पूरी तरह से एक्सक्लूसिव है। पुरुषों को हम किसी भी तरह से हमारे माध्यमों में प्रवेश नहीं देते हैं। यहां कई महिलाएं रोज अपनी समस्याओं का समाधान हासिल कर रही हैं। वर्तमान में हमारे नेटवर्क से 25 लाख महिलाएं जुड़ी हुई हैं। इनमें ज्यादातर भारतीय हैं और कुछ महिलाएं विदेशों से भी हैं। लेकिन शीरोस पूरी तरह से इंडिया का अपना नेटवर्क है।

महिलाओं की हर समस्या का यहां है हल

भारत में ऐसे कई राज्य हैं जहां महिलाओं की स्थिति काफी चिंताजनक है। शीरोस की पहुंच आज भारत के हर जिले और कस्बे तक है। यदि किसी महिला को किसी भी तरह की समस्या है तो वह शीरोस ऐप को गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड कर ऐप में मौजूद चेट बॉक्स के जरिए हमसे संपर्क कर सकती हैं और उनकी उस समस्या का हल उन्हें मिलेगा। हम ऐसे राज्यों में ‘आज शीरोस’ नाम से केंपेन चला रहे हैं, जिसके जरिए हमसे रोज कई महिलाएं संपर्क कर रही हैं। इसके अलावा महिलाओं के लिए ग्रास रूट पर वर्क करने वाली संस्थाएं जैसे आंगनबाड़ी, आशा वर्कर और महिलाओं से जुड़े एनजीओ जिनकी संख्या ढाई हजार से ज्यादा है शीरोस आर्गनाइजेशन उनके साथ वर्क कर रहा है।

बिजनेस में भारतीय महिलाएं

आंत्रप्रन्योर के रूप में शायरी चहल ने न्यूज़लिंक, फ्लेक्सिमोम्स और अब शीरोस इन तीनों में ही सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर यह साबित किया है कि भारतीय महिलाएं बिजनेस के मामले में पुरुषों से कई गुना आगे बढ़ सकती हैं।

विश्व स्तर पर उन्होंने कई उपलब्धियां हासिल की हैं। वह देवी पुरस्कार विजेता हैं, फेमिना अचीवर्स अवॉर्ड, कार्टियर अवॉर्ड, लॉरियल फेमिना महिला पुरस्कार, बिजनेस टुडे के  अलावा उन्हें कई अवार्ड से सम्मानित किया जा चुका है। उन्हें Onalytica के ‘Future of Work Top 100 Influencers’ सूची में 53 स्थान पर शामिल किया गया है।

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