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उम्मीद / दुनिया में पूरी तरह से प्लास्टिक बैन हो जाए तब ये होंगे विकल्प

संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट कहती है कि दुनिया में जितने भी देश हैं वहां की सरकारें प्लास्टिक पर बैन तो लगा देती हैं, लेकिन उसके अमल पर ठीक से ध्यान नहीं दिया जाता, इसलिए बैन के बावजूद कुछ नहीं बदलता।

यूएस की इस रिपोर्ट में कहा गया है कि मोरक्को, रवांडा और चीन के कुछ हिस्सों में प्लास्टिक की थैलियों के इस्तेमाल को सीमित करने के लिए बने नियमों का काफी फायदा हुआ है, लेकिन भारत की राजधानी नई दिल्ली में डिस्पोजेबल प्लास्टिक के इस्तेमाल पर रोक लगाई गई थी, लेकिन इसका बहुत ही कम असर देखने को मिला क्योंकि उसे ‘ठीक से लागू नहीं किया गया’।

पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए दुनिया भर में कई प्रयास किए जा रहे हैं। जिनके बारे में मीडिया रिपोर्ट्स में अमूमन हम पढ़ते रहते हैं। दुनिया में ऐसे कई देश हैं, जिन्होंने प्लास्टिक का विकल्प निकाल लिया है। यहां हम कुछ ऐसे ही देशों में प्रचलित प्लास्टिक के विकल्प का जिक्र कर रहे हैं…

  • यूरोपीय संघ सिंगल यूज प्लास्टिक पर रोक लगाने पर विचार कर रहा है। ऐसे में विकल्प पहले ही खोजे जा चुके हैं। जैसे कि जर्मनी की कंपनी वाइजफूड ने ऐसे स्ट्रॉ बनाए हैं जिन्हें इस्तेमाल करने के बाद खाया जा सकता है। ये सेब का रस निकालने के बाद बच गए कचरे से तैयार की जाती हैं।
  • पोलैंड की कंपनी बायोट्रेम ने चोकर से प्लेटें तैयार की हैं। अगर आपका खाना चाहें, तो कोई बात नहीं। इन प्लेटों को डिकंपोज होने में महज तीस दिन का वक्त लगता है। खाने की दूसरी चीजों की तरह ये भी नष्ट हो जाती हैं। भारत में इसका बेहतर विकल्प काजग या पत्तों के दोना-पत्तल हैं।
  • भारत की कंपनी बेकरीज ने ज्वार से छुरी-चम्मच बनाए हैं। स्ट्रॉ की तरह इन्हें भी आप खा सकते हैं। ऐसा ही कुछ अमेरिकी कंपनी स्पड वेयर्स ने भी किया है। इनके चम्मच आलू के स्टार्च से बने हैं।
  • इंडोनेशिया की एक कंपनी अवनी ने ऐसे थैले तैयार किए हैं जो देखने में बिलकुल प्लास्टिक की पन्नियों जैसे ही नजर आते हैं। लेकिन दरअसल ये कॉर्नस्टार्च से बने हैं। ये पानी में घुल जाती हैं।
  • बर्लिन में ऐसा प्रोजेक्ट चलाया जा रहा है जिसके जरिए लोग एक कैफे से ग्लास लें और जब चाहें अपनी सहूलियत के अनुसार किसी दूसरे कैफे में उसे लौटा सकते हैं।

 

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