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जिंदगी / वैवाहिक रिश्तों में दूरियां नहीं, उन्हें ऐसे बनाएं खूबसूरत

बॉलीवुड अभिनेता अर्जुन रामपाल ने उनकी पत्नी मेहर से 20 साल की शादी के बाद अलग होने का फैसला किया है। यह पहला मामला नहीं है, हमारे समाज में ऐसे कई मामले होते रहते हैं। लेकिन ऐसा क्यों होता है? दरअसल, पुरुष और स्त्री के संबंधों में उम्मीदें इतनी ज्यादा हैं कि अगर आपकी शादी किसी देवी या देवता से भी हो गई तो भी वह असफल ही साबित होगी!

हमें समझना चाहिए कि रिश्ते कुछ जरूरतों की वजह से बनते हैं जैसे शारीरिक, भावनात्मक और मनोवैज्ञानिक। चाहे रिश्ता कैसा भी हो, बुनियादी पहलू यह है कि आपको अपनी कोई जरूरत पूरी करनी है। हमने कोई रिश्ता क्यों बनाया, इसकी बहुत सी वजह हमारे पास हो सकती हैं, लेकिन अगर वे जरूरतें और उम्मीदें पूरी नहीं हुईं, तो रिश्ता बिगड़ जाएगा।

रिश्तों मे दूरी का यह भी है एक कारण

अगर आप दो लोगों में समानता ढूंढ रहे हैं, तो वह रिश्ता हमेशा टूट जाएगा। आखिरकार एक पुरुष और एक स्त्री इसीलिए साथ आते हैं क्योंकि वे अलग हैं। यह फर्क ही आपको साथ ले कर आया है और जैसे-जैसे हम आगे बढ़ेंगे, यह फर्क अधिक स्पष्टता से उभर कर सामने आ सकता है। अगर आप इस अंतर का आनंद लेते हुए आगे बढ़ना नहीं सीखेंगे, तो स्वाभाविक रूप से रिश्ते में दूरी आएगी।

आप यह उम्मीद करते हैं कि दोनों एक ही दिशा में और एक ही तरीके से बढ़ें तो, यह दोनों के साथ ही नाइंसाफी होगी। इससे दोनों की जिंदगी ना केवल सिमट जाएगी, बल्कि उनका दम घुटता रहेगा। आपका रिश्ता कितने दिनों बाद टूटता है या यूं कहें कि दोनों के बीच दूरी कितने वक्त में बढ़ती है वर्षों में, महीनों में या दिनों में, यह सिर्फ इस बात पर निर्भर है कि आप कितनी तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।

जैसे-जैसे लोग आगे बढ़ते हैं और परिपक्व होते हैं, ये जरूरतें बदल जाती हैं। जब ये जरूरतें बदल जाती हैं, तो दो लोगों के बीच जो बात कभी सबसे महत्वपूर्ण लगता था, कुछ समय बाद वह ऐसा नहीं लगेगा। लेकिन हमें किसी रिश्ते को हमेशा के लिए उन्हीं जरूरतों पर आधारित मानने की आवश्यकता नहीं है और ना ही यह सोचने की आवश्यकता है कि रिश्ता अब खत्म हो गया। हम हमेशा किसी भी रिश्ते को किसी और रूप में विकसित कर सकते हैं।

जो जरूरतें लोगों को साथ लाती हैं, जरूरी नहीं है कि हमेशा वही रिश्ते की बुनियाद बनी रहें। जैसे-जैसे समय बीतता है और व्यक्ति की उम्र बढ़ती है और वह अलग-अलग रूपों में परिपक्व होता है। इसलिए रिश्ते का आधार बदलने की जरूरत होती है। अगर यह बदलाव नहीं किया गया, तो दूरी बढ़ना या रिश्ता टूटना निश्चित हो जाएगा।

ऐसे बनाएं रिश्तों को खूबसूरत

रिश्तों की प्रकृति और प्रकार कैसा भी क्यों न हो, लेकिन मूल बात यह है कि इंसान की कोई न कोई ऐसी आवश्यकता जरूर होती है जिसे वह पूरा करना चाहता है। इंसान के अंदर खास तरह का अपूर्णता का अहसास है जिसके चलते उसकी आवश्यकताएं बढ़ गई हैं। जीवन में कई ऐसे मौके भी आते हैं, जब हम किसी विशेष जरूरत को पूरा करने के मकसद से संबंध बनाते हैं। इस संबंध से अगर वह आवश्यकता पूरी नहीं हुई तो रिश्तों में कड़वाहट आ जाती है।

इसकी मूल वजह यह है कि हमने इस जीवन को पूरी गहराई के साथ समझा ही नहीं है। लेकिन रिश्तों की एक जटिल प्रक्रिया है। रिश्तो में बस उम्मीदें ही उम्मीदें हैं। इंसान किसी रिश्ते से जैसी उम्मीद बना लेता है, उन उम्मीदों को पूरा करना इस धरती पर किसी के भी वश की बात नहीं है। लोग उम्मीदों की जड़ को समझ पाने में असमर्थ होते हैं, इसीलिए वे उम्मीदों को पूरा नहीं कर पाते। शुरू-शुरू में उम्मीदें एक जैसी ही हो सकती हैं, लेकिन जैसे-जैसे हम जीवन में आगे बढ़ते हैं, हमारी सोच और अनुभवों में बदलाव के कारण उम्मीदें भी बदलतीं रहतीं हैं। परेशानी यह है कि लोग उस गति से नहीं बदलते।

हर इंसान परफेक्ट नहीं

प्री मैरीटल काउंसलिंग वर्तमान में एक नया कॉन्सेप्ट बनकर उभरा है। यह विवाह के पहले मार्गदर्शन देने वाला एक अच्छा विकल्प है। इसके अंतर्गत लड़का-लड़की के स्वभाव, पसंद-नापसंद, भविष्य की योजना, अपेक्षाएं आदि जैसे विषय पर चर्चा कर उन्हें एक-दूसरे को समझने का मौका दिया जाता है। इससे न केवल सही जीवन साथी चुनने में मदद मिलती है, बल्कि तलाक जैसी वैवाहिक समस्या से बचा जा सकता है।

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