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सलाह / कुछ इस तरह चुनें ‘रोल मॉडल’ ताकि जीने की राह हो जाए आसान

  •   सुरुचि अग्रवाल

कौन हैं आखिर युवाओं के आदर्श? वो जो दर्शकों का मनोरंजन करते हैं या फिर वो जो खेल के मैदान में अपना जौहर दिखाते हैं या फिर वो जिन्होंने देश को आजादी दिलवाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

हम जब ये सवाल युवाओं से पूछें कि उनके आदर्श रोल मॉडल कौन हैं? तो उनमें से कई लोगों का सीधा उत्तर होगा ‘सोच कर बताएंगे’ और हो सकता है उन्होंने सोचा भी हो, लेकिन अपने तरीके से, इसलिए उनके द्वारा चुने गए आदर्श सही भी हो सकते हैं और गलत भी। इसलिए अमूमन लोग विचार करके या सोचे बगैर ही आदर्श चुनने के सफर पर चल पड़ते हैं।

ग्रामीण भारत में ज्यादातर युवा फ्रीडम फाइटर्स को ही अपना आदर्श मानते हैं। कोई महात्मा गांधी तो कोई भगत सिंह को लेकिन इनमें से कितने लोग हैं,  जिन्हें इनके बारे में पूरी जानकारी होती है या कितने युवा होंगे जो इनके विचारों को फॉलो करते हुए आगे बढ़ते होंगे।

‘आज रोल मॉडल बहुत कम मिलते हैं। ऐसे में लोग अपने आस-पास मौजूद सफल लोगों से खुद की तुलना करते हुए अपनी कमियों को दूर कर सकते हैं। यानी मेहनत करो और आगे बढ़ो।’

कहने को तो सभी किसी न किसी की ओर इशारा कर देंगे, लेकिन आदर्श का मतलब वही है, जो मुश्किल की घड़ी में आपके सामने हों और जिनके नक्शेकदम पर आगे बढ़ सकें।

कुछ समय पहले एक टीवी चैनल पर दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने कहा था कि आज के युवाओं के पास तार्किक शक्ति है जिनकी वजह से देश की सूरत बदल सकती है। लेकिन इसके लिए उन्हें सही रॉल मॉडल चुनना जरूरी है।

 

आज रोल मॉडल बहुत कम मिलते हैं। ऐसे में लोग अपने आस-पास मौजूद सफल लोगों से खुद की तुलना करते हुए अपनी कमियों को दूर कर सकते हैं। यानी मेहनत करो और आगे बढ़ो।

(लेखिका पिछले कई वर्षों से मीडिया में सक्रिए हैं। वह झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं।)

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