Press "Enter" to skip to content

टेक नॉलेज / ‘सुपर ऐप्स’ जो हैं फास्ट, स्मार्ट और ज्यादा पावरफुल

  • बालेन्दु शर्मा ‘दाधीच’।

जब से स्मार्टफोन हमारी जिंदगी में आया है, कई तरह के एप्लीकेशनों का इस्तेमाल करना हमारी आदत, या यूं कहिए कि मजबूरी बन गई है। पेमेंट करना हो तो यह ऐप्प, मैसेज भेजना हो तो वो ऐप्प, मनोरंजन करना हो तो यह ऐप्प, वीडियो कॉल करना हो तो वह ऐप्प। क्या कभी आपके मन में आया है कि ऐप्स कब तक हमारे साथ रहेंगे और इनके बाद क्या होने वाला है? आखिरकार टेक्नलॉलॉजी की रफ्तार बहुत तेज है और वह किसी एक चीज पर लंबे समय तक टिकती नहीं बल्कि आगे बढ़ जाती है। ऐप्स की अगली पीढ़ी आखिरकार कैसी होगी?

इस सवाल का जवाब हैं ‘सुपर ऐप्स’। सुपर ऐप्स का मतलब ऐसा ऐप्प जो कोई एक काम नहीं करता बल्कि सब कुछ करता है। सुपर ऐप्प ऐसा एप्लीकेशन है जो रोजमर्रा के ऐप्स की तुलना में न केवल बहुत व्यापक और बड़ा है बल्कि ज्यादा तेजतर्रार, ज्यादा फास्ट, ज्यादा स्मार्ट और ज्यादा पावरफुल भी है। आश्चर्य की बात है कि यह अवधारणा हमारे पड़ोस से यानी कि चीन से लोकप्रिय हुई है। इन दिनों दुनिया में एक सुपर ऐप्प के चर्चे हैं, जिसका नाम है ‘वीचैट’। यह एक चीनी सुपर ऐप्प है जिसका नाम सुनने में तो ऐसा लगता है जैसे यह व्हाट्सऐप्प जैसा मैसेजिंग ऐप्प होगा, लेकिन हकीकत में यह सिर्फ मैसेजिंग तक सीमित नहीं है।

सुपर ऐप्प वीचैट मैसेजिंग के अलावा इतना कुछ करता है कि इसके चीनी यूज़र्स दिन में कम से कम दस बार इस पर लौटते हैं। सुबह से शाम तक वे इस चैट पर जमे रहते हैं और लोकप्रियता का आलम यह है कि 80 करोड़ चीनी लोग इसे इस्तेमाल करते हैं। जी हाँ, 80 करोड़! वीचैट को 2011 में चीनी इंटरनेट कंपनी टेन्सेन्ट ने लांच किया था। आइए, जानते हैं कि आखिरकार ऐसा क्या खास है इस सुपर ऐप्प में और इसकी ज़रूरत क्यों है।

‘एक औसत स्मार्टफोन यूज़र के फोन में 60 से 150 तक ऐप्स होते हैं। फिर ऐसे भी बहुत सारे ऐप्स हैं जिन्हें आप छोटी से छोटी ज़रूरत पड़ने पर डाउनलोड करते हैं और काम निकल जाने पर अनइन्स्टॉल कर देते हैं।’

दरअसल, वीचैट में आम यूज़र की ज़रूरत की हर चीज है। आज हमें जिन कामों के लिए दर्जनों ऐप्स का इस्तेमाल करना पड़ता है वे सभी सुविधाएँ अकेले इस ऐप्प में मौजूद हैं। जैसे- व्हाट्सऐप्प की तरह इंस्टैंट मैसेजिंग, फेसबुक की तरह जीवन की घटनाओं को दोस्तों व रिश्तेदारों के साथ साझा करने की सुविधा, रेस्टोरेंटों से खाना ऑर्डर करने का फीचर, टैक्सी बुक करने की व्यवस्था, गूगल मैप्स की तरह सड़कों के नेविगेशन की सुविधा, साथ भोजन किया हो तो मिल-बांटकर भुगतान करने की सुविधा, सिनेमा के टिकट बुक करने की सुविधा और ई-कॉमर्स के जरिए चीजें खरीदने की सुविधा।

चाहें तो इसी के जरिए पेटीएम की तरह भुगतान कर सकते हैं और चाहें तो फ्लिपबोर्ड या डेली हंट की तरह ताजातरीन खबरें और आर्टिकल भी पढ़ लीजिए। वीचैट के यूज़र को कोई दूसरा ऐप्प इस्तेमाल करने की ज़रूरत शायद ही पड़ती हो। पहले पश्चिमी देशों में इस ऐप्प को बहुत हल्के में लिया गया लेकिन अब उन्होंने भी इसका लोहा मान लिया है क्योंकि यह सुविधाजनक होने के साथ-साथ बहुत ज्यादा प्रोफिटेबल भी है। क्या आप मानेंगे कि इस ऐप्प की सालाना आमदनी 2018 में 1.2 अरब डॉलर है, यानी 80 हजार करोड़ रुपए से भी ज्यादा। और इसकी वैल्यू करीब 80 अरब डॉलर आंकी गई है, यानी कि 58 लाख करोड़ रुपए!

यह भी पढ़ें : प्रिंसिपल की अनोखी पहल, बच्चों के ‘स्कूल बैग का वजन’ ऐसे किया कम!

तो ये है नए जमाने का ऐप्प, यानी कि सुपर ऐप्प। क्या आपको नहीं लगता कि ऐसे ऐप्स की ज़रूरत सचमुच है? एक औसत स्मार्टफोन यूज़र के फोन में 60 से 150 तक ऐप्स होते हैं। फिर ऐसे भी बहुत सारे ऐप्स हैं जिन्हें आप छोटी से छोटी ज़रूरत पड़ने पर डाउनलोड करते हैं और काम निकल जाने पर अनइन्स्टॉल कर देते हैं। इस बात में कोई तुक नहीं है कि छोटा से छोटा कारोबार भी अपना अलग ऐप्प डाउनलोड करने के लिए कहता है। इंटरनेट पर तो ऐसा नहीं है। आप क्रोम, एज, सफारी, ओपेरा, फायरफॉक्स आदि में से कोई एक ब्राउज़र इस्तेमाल करते हैं और जिस वेबसाइट पर जाने की ज़रूरत हो, उसका एड्रेस डालते हैं, बस। आपको हर वेबसाइट तो अपने मोबाइल फोन में डाउनलोड करके इन्स्टॉल करने की ज़रूरत नहीं पड़ती! तो फिर ऐप्स के मामले में ऐसा क्यों है। आखिरकार कोई व्यक्ति कितने ऐप्स का इस्तेमाल कर सकता है?

‘बॉट्स का मतलब ऐसे रोबोटिक ऑब्जेक्ट्स जो मैसेंजर पर आपके संदेशों के खुद ही जवाब देने में सक्षम हैं। अब मैसेंजर के जरिए आप इंटरनेट पर खरीदारी भी कर सकते हैं और भुगतान भी कर सकते हैं।’

इतने सारे ऐप्स न सिर्फ आपके ऊपर इन्फॉरमेशन की बमबारी करते रहते हैं बल्कि उन सबको बार-बार देखना, अपडेट करना, अपनी प्राइवेसी को बचाना, मोबाइल को सुरक्षित रखना, बहुतों को खरीदना, विज्ञापनों की भरमार से गुजरना, सबके पासवर्ड याद रखना आदि दर्जनों झंझट हैं जो हर एक ऐप्प आपके लिए लेकर आता है। इसके अलावा उन सब पर खर्च होने वाली बैटरी और उन पर बिताया जाने वाला समय भी तो आपके ही खाते से जाता है? इन सबको देखते हुए सुपर ऐप्स के लिए गुंजाइश तो अच्छी खासी है। आने वाले दिनों में शायद यही होगा कि आपके मोबाइल में महज दो या चार ऐप्स होंगे और उन्हीं के भीतर सारी सुविधाएँ मौजूद होंगी। कंट्रोल भी रहेगा, प्राइवेसी भी, सिक्योरिटी भी और सुविधा भी।

यह भी पढ़ें…

वीचैट ऐसा अकेला ऐप्प नहीं है। अपने आसपास देखिए तो हम सुपर ऐप्स की तरफ ही बढ़ रहे हैं। व्हाट्सऐप्प ने भुगतान की सुविधा भी शुरू कर दी है। एक मैजेंसर ऐप्लीकेशन अब पेमेंट ऐप्प का काम भी करने लगा है। उधर फेसबुक मैसेंजर भी सुपर ऐप्प बनने की दिशा में बढ़ रहा है। उसने पिछली अप्रैल में कंपनियों से कहा था कि वे चाहें तो इसके लिए अपने बॉट्स बना सकते हैं। बॉट्स का मतलब ऐसे रोबोटिक ऑब्जेक्ट्स जो मैसेंजर पर आपके संदेशों के खुद ही जवाब देने में सक्षम हैं।

यह भी पढ़ें : परीक्षा पे चर्चा 2.0 / जिंदगी का मतलब ठहराव नहीं, जिंदगी का मतलब है ‘गति’

अब मैसेंजर के जरिए आप इंटरनेट पर खरीदारी भी कर सकते हैं और भुगतान भी कर सकते हैं। चूंकि यह फेसबुक से जुड़ा हुआ है तो इसका मतलब यह हुआ कि अगर फेसबुक मार्केटप्लेस पर आप कोई विज्ञापन देखते हैं तो उसके साथ लगे Buy बटन पर क्लिक कीजिए जो आपको मैसेंजर में ले जाएगा। अब मैसेंजर में ही वह प्रॉडक्ट खरीद लीजिए- बिना फेसबुक से दूर गए। हालाँकि भुगतान की यह सुविधा फिलहाल अमेरिका में ही उपलब्ध है।

तो यह है नए जमाने के ऐप्स की एक झलक। भारत में भी फोन पे जैसे ऐप्स का इरादा है कि वे सुपर ऐप्स में तब्दील हो जाएं। आने वाले दिनों में आपको इस क्षेत्र में काफी कॉम्पिटिशन दिखाई देने वाला है।

(आप हमें फेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम, लिंक्डिन और यूट्यूब  पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं।)

More from जीने की राहMore posts in जीने की राह »

Be First to Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *