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विश्वास / लोग कहते थे यहां हैं भूत? इस MLA ने शमशान में बिताई रात और अंधविश्वास किया दूर

Picture Courtesy: Hindustan Times

आंध्र प्रदेश के पलाकोल्लू विधानसभा क्षेत्र से विधायक निममाला राम नायडू ने एक मिसाल पेश की है, जो देश के किसी नेता के लिए एक सबक है। निममाला राम नायडू तेलुगू देशम पार्टी से हैं।

उन्होंने लोगों का अंधविश्वास दूर करने के लिए एक रात शमशान में गुजारी। उनकी इस पहल से जो मजदूर यहां होने वाले निर्माण कार्य में आने तक को तैयार नहीं थे अगले ही दिन आकर काम शुरू किया।

यह है मामला

पिछले साल, विधायक ने स्थानीय लोगों की शिकायतों के बाद नए शमशान के लिए 3 करोड़ रूपए मंजूर किए थे, लेकिन यहां कोई भी काम करने के लिए तैयार नहीं था। आखिर, दो महीने पहले एक ठेकेदार सहमत हो गया, लेकिन तब से आधुनिकीकरण का काम बहुत धीमा चल रहा था। जब विधायक ने जानकारी हासिल की तो पता चला कि लोगों का मानना है कि यहां आत्माएं रहतीं हैं और वो उन्हें काम नहीं करने देती हैं।

श्रमिकों में पैदा करना था आत्मविश्वास

तब विधायक ने श्रमिकों के अंधविश्वास को दूर करने के न केवल एक रात यहां बिताने का विचार किया बल्कि उन्होंने यह पूरा भी किया। हिंदुस्तान टाइम्स की खबर के मुताबिक नायडू बताते हैं, ‘मैं एक ही जगह में दो या तीन दिनों के लिए सोने जा रहा हूं। मेरी कोशिश श्रमिकों के बीच आत्मविश्वास पैदा करना है, जो निर्माण को लेने के लिए शमशान परिसर में प्रवेश करने से डरते थे।’

पश्चिम गोदावरी जिले के पलाकोल्लू विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले विधायक नायडू दावा करते हैं कि, ‘शमशान परिसर में सोने का निर्णय के कारण निर्माण कार्य शुरू हो चुका है उम्मीद है जल्द ही अगले कुछ दिनों में अधिक लोग शामिल होंगे।’

वहां कई मच्छर थे। और, फिर…

तो वहीं, विधायक यह भी बताते हैं मैदान में सोने के दौरान विधायक नायडू को थोड़ी सी कठिनाई का सामना करना पड़ा, ‘वहां कई मच्छर थे। और, ज़ाहिर है, मुझे डंपिंग यार्ड से गंध सहन करना पड़ा।’

उनके अनुसार, ‘शहर में हिंदू शमशान दशकों तक उपेक्षित रहा है। यहां मृत शरीर के शमशान में कोई उचित सुविधाएं नहीं हैं। बरसात के समय में शमशान के मैदान में इतना ज्यादा कीचड़ हो जाता है कि कोई भी अगर गिर जाए तो उठ भी नहीं सकता। मृतकों को अंतिम संस्कार के बाद लोगों को स्नान करने के लिए पानी की सुविधा नहीं है।’ पहली बार विधायक यह स्वीकार किया उन्हें लोगों में अंधविश्वास को खत्म करने के लिए इस तरह का कदम उठाना पड़ा।

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