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टेक नॉलेज / 2019 में तकनीकें तो बहुत आएंगी, मगर छाई रहेगी 5जी

  • बालेन्दु शर्मा ‘दाधीच’।

तकनीक के क्षेत्र में आम यूज़र के लिहाज से नए साल में जो चीज़ सबसे अहम होने वाली है, वह है 5जी। भले ही एप्पल ने अभी किसी 5जी इनेबल्ड आइफ़ोन के बारे में कोई संकेत नहीं दिया है लेकिन दुनिया भर की स्मार्टफ़ोन निर्माता कंपनियों के बीच इस समय नंबर एक प्राथमिकता वाली तकनीक है।

2019 में न सिर्फ 5जी के बारे में तमाम प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रियाएं साफ़ हो जाने की उम्मीद है वहीं दूरसंचार और उपकरण निर्माता भी अपने-अपने को अपग्रेड कर चुके होंगे। इस साल स्मार्टफ़ोन के साथ-साथ तमाम दूसरे हार्डवेयर भी आ चुके होंगे जिनमें 5जी इंटरनेट कनेक्टिविटी की व्यवस्था होगी- जी हां, लैपटॉप भी।

5जी का मतलब है दो घंटे की फ़िल्म का आपके स्मार्टफ़ोन पर दो सैकंड में डाउनलोड हो जाना और आधुनिक से आधुनिक तकनीकों के लिए रास्ता और भी ज़्यादा आसान हो जाना, जैसे- मिक्स्ड रियलिटी, सेल्फ़ ड्राइविंग कारें, इंटरनेट ऑफ़ थिंग्स, बेहतरीन क्वालिटी की वीडियो कॉन्फरेंसिंग आदि-आदि। इसी से जुड़ा हुआ एक और बदलाव आप 2019 में देखेंगे और वह है बेहतरीन रिजोल्यूशन में वीडियो गेमों की स्ट्रीमिंग।

दूसरी बड़ी चीज़ जिसे हम नए साल में ज़रूर देखेंगे, वह है आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस का हमारी ज़िंदगी में और भी ज़्यादा करीब से शामिल हो जाना। अब तकनीक सिर्फ़ चीज़ों की निगरानी ही नहीं करेगी, उनका विश्लेषण भी करेगी और उनकी भविष्यवाणी भी करेगी। टेक्नॉलॉजी के पास देखने, सुनने, समझने, बोलने, पहचानने, स्पर्श आदि की जो क्षमताएं आ चुकी हैं, वे 2019-2020 में मुख्यधारा में आ जाएंगी, यानी कि बड़े सहज रूप में यूज़र के पास पहुंच जाएंगी। तब आप इन चीज़ों को देखकर चौंकेंगे नहीं क्योंकि वे इतनी ही सामान्य हो जाएंगी जैसे कि आज का अखबार या फिर घर का बिजली कनेक्शन या कि आपका चश्मा या जूते जिनकी मौजूदगी का अहसास आपको यदा-कदा ही होता है लेकिन जो हमेशा आपके साथ रहते हैं।

अब सेहत (डायग्नोसिस, इलाज़ और पूर्वानुमान), साइबर सुरक्षा (पहले से चुनौती का अनुमान), सपोर्ट सेवाएं (ऑटोमैटिक कस्टमर केयर, टिकट बुकिंग आदि), क्रिएटिव कामकाज (लेखन, पेन्टिंग आदि), कृषि (सही फ़सल का चयन), परिवहन (सेल्फ़ ड्राइविंग वाहन) जैसे क्षेत्रों में एआई का दबदबा बढ़ता चला जाएगा। प्लेटफॉर्म के रूप में संवाद (कनवरसेशन एज ए प्लेटफॉर्म) इन शक्तियों को आम यूज़र तक ले आएगा। सॉफ्टवेयर की शक्ल वाले रोबोट जिन्हें बॉट कहा जाता है, स्वाभाविक इंसानी भाषा को समझने और हमारे निर्देशों पर काम करने में सक्षम होंते हैं।

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2018 में ऐसे बॉट्स ने अपने आगमन की घंटी बजा दी थी। नए साल में वे आम बात हो जाएंगे और हमारी ज़िंदगी को बेहतर बनाने में हाथ बँटा रहे होंगे। ऑनलाइन चैट बॉट्स से लेकर कंप्यूटर, मोबाइल, कारों और दूसरे गैजेट्स के जरिए काम करने वाले वर्चुअल असिस्टेंट हमारे काम का काफ़ी बोझ संभाल लेंगे, जैसे सिनेमा या यात्रा का टिकट बुक करना, बैठकें तय करना, सेहत पर नज़र रखना, यातायात और मौसम की भविष्यवाणी करना, कहीं भी उपलब्ध अच्छे अवसरों (डील्स, नौकरियां, कारोबार आदि) की तरफ़ ध्यान दिलाना आदि-आदि।

ईकॉमर्स के क्षेत्र में ड्रोन से प्रॉडक्ट्स की डिलीवरी की शुरूआत भारत में भी संभव है। हालांकि इसकी वजह से सुरक्षा की चिंताएं बढ़ेंगी और नतीजतन विनियमन की भी आवाज़ उठेगी। कहा नहीं जा सकता कि भारत में ऐसा हाल-फिलहाल में संभव हो सकेगा या नहीं, लेकिन पश्चिमी देशों में यह तरीका काफी लोकप्रिय हो जाएगा।

दफ़्तरों में जो सॉफ्टवेयर इस्तेमाल किए जाते हैं उनमें भी इस बार कई परिवर्तन आएंगे। इन्हें इस्तेमाल करना और एक से दूसरे सॉफ़्टवेयर के बीच सूचनाओं का आदान-प्रदान ज़्यादा आसान हो जाएगा। अनेक लोकप्रिय सॉफ़्टवेयरों के डिज़ाइनों में भी बदलाव देखने को मिलेगा। अब ये क्लाउड के साथ ज़्यादा करीब से जुड़े होंगे। माइक्रोसॉफ़्ट एज़्योर, अमेजॉन वेब सर्विसेज और गूगल क्लाउड जैसी क्लाउड सेवाओं की दिशा में कंपनियों का झुकाव बढ़ेगा और गैर-सरकारी क्लाउड पर सरकारों का भरोसा भी बढ़ेगा। इस साल इंटेलिजेंट एज (क्लाउड का विकल्प) के प्रति भी दिलचस्पी दिखाई देगी हालाँकि ऐसे प्लेटफॉर्म भारत में 2021 से पहले खास दखल नहीं रखेंगे।

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हॉट स्टार, जी 5, सोनी लिव, नेटफ्लिक्स और अमेज़न प्राइम जैसे प्लेटफॉर्म अपनी पकड़ और मज़बूत बनाएंगे। टेलीविजन को लगातार इन ओवर द टॉप (ओटीटी) गैजेट्स और ऐप्स की तरफ़ से चुनौती मिलती रहेगी। इस क्षेत्र में बहुत सारे नए खिलाड़ी आएंगे और सबके बीच दर्शकों का ध्यान खींचने की मारामारी चलेगी। इसमें फायदा दर्शकों का होगा। लेकिन विज्ञापनों और मनोरंजन का एक बड़ा, वैकल्पिक बाजार स्थापित होगा। 2020 तक ये वैकल्पिक माध्यम टेलीविजन के लिए बहुत बड़ी चुनौती बन चुके होंगे।

व्हाट्सएप्प की तरफ़ से कई बदलाव देखने को मिल सकते हैं। उस पर भारत सरकार का दबाव बना रहेगा और आने वाले दिनों में यूज़र्स को कई नए अंकुश देखने को मिलेंगे। एक बड़ी घटना होगी व्हाट्सएप्प पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर धन के लेनदेन की दिशा में। इसकी वजह से ब्लॉकचेन तकनीक जो 2018 में पिट गई थी, 2019 में फिर से वापसी कर सकती है। चीनी उत्पादों की बाढ़ में भारतीय बाजार में दूसरी देसी-विदेशी स्मार्टफ़ोन कंपनियों की स्थिति कमज़ोर होती रहेगी। फिलहाल भारत सरकार की तरफ़ से भी इस मामले में कोई दखल किए जाने की उम्मीद नहीं दिखती।

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इंटरनेट ऑफ़ थिंग्स के बाज़ार को भारत की स्मार्ट सिटी परियोजनाओं से बढ़ावा मिलेगा हालाँकि फंडिंग को लेकर समस्या बनी रहेगी। उपभोक्ता के स्तर पर यह तकनीक 2020 से पहले कोई बड़ी कामयाबी हासिल कर सके, ऐसा नहीं लगता। अलबत्ता, स्मार्ट स्पीकर जैसी चीज़ों का लोकप्रिय और सहज-सुलभ होना जारी रहेगा।

सुरक्षा एजेंसियों के सामने मौज़ूद डिजिटल चुनौतियां बढ़ेंगी इसलिए सोशल मीडिया और गैजेट्स की साइबर निगरानी भी बढ़ेगी। सरकार ने जिन दस एजेंसियों को हाल ही में इसका हक़ दिया है, उसका असर चुनावों के पहले से दिखने लगेगा। गैजेट्स के क्षेत्र में फोल्डिंग स्मार्टफ़ोन इस साल आ सकता है। एप्पल भी ऐसा फ़ोन ला सकता है। स्मार्टफ़ोन और टैबलेट के हाइब्रिड की शुरूआती झलक भी दिखाई देगी।

इधर एप्पल ने संकेत दिया है कि उसका 5जी आइफ़ोन 2020 से पहले नहीं आएगा लेकिन अगर इसे 2019 में रिलीज़ कर दिया जाए तो ताज्जुब नहीं होना चाहिए। एप्पल अपनी योजनाओं को समय से पहले कभी जाहिर नहीं करती। दूसरी बड़ी स्मार्टफ़ोन कंपनियां भी 5जी कम्पैटिबल गैजेट्स बनाने में जुटी हैं जो अगले साल बाज़ार में आ सकते हैं। 5जी सक्षम लैपटॉप भी बाज़ार में आ जाएंगे। एप्पल और सैमसंग भी इस साल अपने स्मार्ट स्पीकर बाज़ार में उतार सकते हैं।

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कुल मिलाकर, सन् 2019 में आईटी की दुनिया दर्जनों क्रांतिकारी इनोवेशनों और हैरतअंगेज़ तकनीकों को उभरते हुए देखेगी। भारत में हमें अंतरिक्ष से निगरानी, साइबर सुरक्षा, सोशल मीडिया पर अंकुश, वीडियो कन्टेन्ट की लोकप्रियता में विस्तार, डेटा प्लानों में और अधिक कॉम्पिटिशन और क्लाउड तकनीकों का प्रसार देखने को मिलेगा। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 5 जी, फोल्डिंग स्मार्टफ़ोन, आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम कंप्यूटिंग और बॉट्स की वजह से हलचल मचेगी। एक लाइन में कहा जाए तो इस साल हमारे जीवन में तकनीक की भूमिका और अधिक बढ़ जाएगी हालाँकि उसकी इस मौज़ूदगी का अहसास कम से कम होता चला जाएगा।

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