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भावना / प्रेम को नफरत में बदल देती है यह गलती!

  • सबसे खराब स्थिति दुश्मनों के बीच नहीं बल्कि तथाकथित प्रियजनों के बीच होती है।
  • प्यार का मतलब है कोई राय बनाना नहीं बल्कि एक दूसरे जीवन को पोषित करना है।

यदि आप यह सोचते हैं कि आप से जुड़े यह लोग आपके प्रियजन हैं तो यह आपके प्रियजन नहीं है बल्कि यह आपके अतिरिक्त हाथ-पैर हैं। आप दो पैरों पर खड़े नहीं हो सकते तो आपको चार, आठ या बारह पैरों की जरूरत है। जब यह हाथ-पैर जब ठीक तालमेल में नहीं होते हैं तो वो उलझ जाते हैं। घर में चार-पांच दिमाग चार-पांच पावर सेंटर हैं। उनके अच्छे तालमेल के लिए कुछ चीजें करनी की जरूरत है।

इसे करने का एक तरीका है कि इसे बड़े पैमाने पर जुड़ाव के साथ करना चाहिए भावना के स्तर पर बिल्कुल नहीं। भावनात्मक जुड़ाव सिर्फ निर्भरता लाता है। भावना आनंद उठाने वाली चीज है। ये जीवन का रस है। भावनाओं से काम करने की कोशिश मत कीजिए। आप अपने विचारों से काम कर सकते हैं। आप अपने शरीर से काम कर सकते हैं। अपनी भावनाओं से काम करने की कोशिश ना करें। जब भी आप अपनी भावनाओं से काम कराने की कोशिश करते हैं। आपकी परिस्थितियां खराब हो जाती हैं।

जब आप प्रेम में होते हैं तो शुरू में आई लव यू काम करता है। कुछ समय बाद आप भावनाओं से अपना काम कराने की कोशिश करते हैं। आप जितनी कोशिश करते हैं आपका जीवन उतना ही खराब हो जाता है। क्योंकि भावना काम करने के लिए नहीं है। भावना आपके जीवन को सिर्फ मधुर बनाने के लिए है। भावनाएं बस मौजूद हैं। यह एक फूल की तरह हैं, जिसे आप अपने बालों में लगाते हैं। आप फूलों से काम नहीं कराते। फूलों को काम करने की जरूरत नहीं है वे बस मौजूद हैं। भावनाएं सुखद और शानदार हैं।

अगर आपके पास काम करने वाला दिमाग नहीं है आप सोचने के काबिल नहीं है। तब काम कराने के लिए अपनी भावनाओं का इस्तेमाल करते हैं। यह कभी-कभी काम कर सकती है। यही समस्या है। यह शुरू में काम करती है और फिर इसे आप ओर आगे ले जाने की कोशिश करते हैं, फिर आपका जीवन इतना ज्यादा खराब हो जाती हैं। सबसे खराब स्थिति दुश्मनों के बीच नहीं बल्कि तथाकथित प्रियजनों के बीच होती है।

लोगों की अपनी राय होती है। अगर आप किसी से प्यार करते हैं तो आपकी कोई राय नहीं होनी चाहिए। प्यार का मतलब है कि किसी भी तरह की कोई भी राय बनाए बिना आप एक दूसरे जीवन को पोषित करना चाहते हैं। हम प्रियजन हैं हमारी एक-दूसरे के बारे में मजबूत राय है। यदि आप ऐसा सोचते हैं तो आप जीवन को बांधने की कोशिश कर रहे हैं।

दरअसल, राय एक तरीका है किसी व्यक्ति को एक जंजीर में जकड़ने का। प्यार का मतलब है किसी व्यक्ति को एक संभावना में विकसित करना। ये दोनों चीजें एक साथ नहीं हो सकती हैं। आप बेहतर ढंग से पोषित करने के लिए कभी-कभार कुछ फैसले करते हैं। आप घर में बच्चों का पालन कर रहे हैं। उसे अगली संभावना तक विकसित करने के लिए आपको कुछ फैसले करने होते हैं, जहां आप अभी हैं। यह आप किसी भी तरह की राय कायम करने के लिए नहीं करते हैं।

जैसे ही आप एक राय बनाते हैं वैसे ही उस जीवन को एक संभावना में विकसित करने में कोई दिलचस्पी नहीं रह जाती है। आप बस एक राय के घोल में उसे जकड़ देना चाहते हैं। यदि वो आपकी राय पर ना चलें तो आप निराशा हो जाते हैं। यदि आप लोगों के साथ मिलकर रहना चाहते हैं तो पोषण का रिश्ता होना चाहिए ना की राय का। यदि यह वाकई प्यार का रिश्ता है तो कोई राय नहीं होनी चाहिए।

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