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पहल / कुछ ऐसी थी ‘ग्रीन मैरिज’, सजावट से भोजन तक सब कुछ ‘हरा-भरा’

Picture Courtesy: The News Minute

शादी को यादगार बनाने के लिए लोग क्या-क्या नहीं करते, लेकिन तमिलनाडु के तिरूपुर शहर में एक ऐसी शादी हुई जहां हर तरफ सब कुछ अलग ही तरह का देखा जा सकता था। यह शादी थी लोगेश्वरन और गीतांजलि रितिका की, जो हमेशा याद रखी जाएगी।

इस शादी में टेराकोटा हस्तशिल्प से बने जहाज, बांस की स्टिक्स, कार्बनिक अनाज, जड़ी-बूटियां, दालें जिनके ऊपर बिक्री का लेवल भी लगा हुआ था। इतना ही नहीं यहां मौजूद थे मिट्टी और लकड़ी से बने खिलौने और अतिथियों के स्वागत के लिए टेबल पर नींबू वो भी सूखी जड़ी-बूटियों के साथ, यह सब कुछ व्यवस्थित लाइन में रखा गया था। ताकि बाराती और मेहमानों का स्वागत कुछ अलग तरह से किया जा सके।

यहां कपास और पेपर से मेहमानों के लिए ग्रीन फ्लेक्स बोर्ड और शादी का सेट लगाया गया था। यदि कहा जाए तो तिरुपुर की यह शादी 100% हरे रंग की प्राकृतिक छटा से सराबोर थी, तो किसी भी तरह से गलत नहीं होगा।

गीतांजलि के पिता रवि TNM को बताते हैं, ‘सबकुछ स्वाभाविक था, पेपर और प्लास्टिक कप के बजाय हमने मक्का से बनी खाने की प्लेट्स और तांबे से बने चम्मच और गिलास का उपयोग किया।’

क्या करते हैं लड़की के पिता

लड़की के पिता रवि तिरुपुर में पिछले तीन साल से वानाथुकुल संगठन प्रमुख स्वयंसेवक है, जो तिरुपुर जिले में प्रकृतिक वस्तुओं को प्रोत्साहन देते हैं। वानथुकुल संगठन की स्थापना के बाद से ही तिरुपुर जिले में लगभग 5 लाख से ज्यादा पेड़ लगाए हैं, इस संगठन की मदद से, रवि अपनी बेटी की शादी को पूरी तरह से प्राकृतिक रंगों का उपयोग करना चाहते थे।

रवि बताते हैं, मेहमानों को पीने के पानी की सेवा करने के लिए बारिश के पानी का उपयोग किया जो पूरी तरह स्वच्छ था। शादी में तैयार भोजन के लिए सब्जियों की 10 से अधिक किस्में जिनमें गाजर, प्याज से मिर्च तक इस्तेमाल की गईं, जिनकी खेती वानाथुकुल तिरुपुर सदस्य खुद अपने घरों में करते हैं।

यह सब कुछ करने के पीछे हमारा उद्देश्य यह है कि लोग ज्यादा से ज्यादा प्रकृति में मौजूद सामग्री का उपयोग करें। हमने यह शादी पूरी तरह से पारंपरिक तरह से की थी। जिसमें हमारा सहयोग कुमार दुर्रिस्वामी जोकि तिरुपुर के वानाथुकुल संगठन प्रोजेक्ट के डायरेक्टर हैं उनका सहयोग मिलता रहा।

सब्जियों से ही बनाई गई ग्रेवी

कुमार दुर्रिस्वामी बताते हैं कि शादी में तैयार भोजन खासतौर पर सब्जियों से ही ग्रेवी बनाई गई और घर में बना पारंपरिक भोजन और मिठाई को परोसा गया। शादी की दावत में हमने आईस क्रीम और बीड़ी-पान की जगह पारंपरिक मिठाईयां और हर्बल चाय से मेहमानों का स्वागत किया।

शादी के मेनू में हमने खासतौर पर मक्का और आलू से बने पकवान, स्टार्टर्स सांभर-चावल, टमाटर-सांभर और मुख्य रूप से तैयार करवाया था। अन्य मिठाई जैसे मैसूर पाक, फॉक्सटेल बाजरा, नारियल बरफी और हरी गुड़री और लड्डू भी उपलब्ध थे। मेजबानों ने 12 दुकानदारों को अपने कार्बनिक माल प्रदर्शन करने के लिए आमंत्रित किया, जिससे मेहमान अपनी इच्छाओं को उन्हें खरीद सकते थे।

2500 अनजान अतिथि आना सौभाग्य की बात

लड़की के पिता रवि कहते हैं, ‘हम इन दुकानदारों के लिए एक नेटवर्क स्थापित करना चाहते थे और उन्हें अपने उत्पादों को बेचने में मदद करना चाहते थे। दूसरी तरफ, लोगों को प्लास्टिक और कृत्रिम रूप से उत्पादित सामानों पर जैविक उत्पादों का उपयोग करने के बारे में संवेदना मिली थी।’ हमने करीब 3500 मेहमानों को आमंत्रित किया, लेकिन शादी ने इतनी बड़ी चर्चा को आकर्षित किया कि 2500 अनजान अतिथि हमारे यहां आ गए, जिनका स्वागत हमने किया।

लोगेश्वरन यानी रवि के दामाद तिरुपुर के कपड़े का व्यवसाय करते हैं। वह अपने कपड़ों के रंग को रंगने के लिए प्राकृतिक तरीकों का उपयोग करते हैं। शादी के बाद जो उपहार वधु पक्ष की ओर से दिया जाता है, उसमें लोगेश्वरन को क्जरी कार या बाइक की जगह एक गाय और एक बछड़ा उपहार में दिया गया था, जो आजकल ज्यादातर शादियों के लिए आदर्श स्थापित करता है।

रवि इस पूरी शादी से बेहद खुश हैं और कहते हैं कि हालांकि यह सब कुछ पारंपरिक था क्योंकि हमारे देश में गाय-बछड़ा शादी में उपहार में देने की परंपरा सदियों से मौजूद है।

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