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संघर्ष / सिर पर नहीं थी छत तब स्कूल को बना लिया था घर ‘ऐसा था स्ट्रगल’

– मेघा शर्मा

शर्मिला मुखर्जी एक प्रसिद्ध ओडिसी नृत्यांगना हैं और पिछले काफी सालों से अपनी नृत्य कला का दुनिया भर में प्रदर्शन कर रही हैं, लेकिन उनके लिए इस मुकाम तक पहुंच पाना इतना आसान नहीं था। अपने इस सपने को साकार करने के लिए उन्हें भी काफी सारी परेशानियों का डट कर सामना किया और कैसी भी विषम परिस्थितियां आईं लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी।

द फीचर टाइम्स को दिए एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में शर्मीला मुखर्जी बताती हैं, ‘मैं जब 4 साल की थी, तब से ही बैले डांस काफी पसंद था। इसी डांस से संबंधित कुछ कहानियां मेरी मां भी उन्हें सुनाया करती थीं। जो उन्हें काफी प्रभावित करती थीं, जिसके बाद मैनें शास्त्रीय नृत्य सीखना शुरू किया और 1984 में गुरु केलुचरण मोहापात्रा से ओडिशी नृत्य सीखना शुरू किया। मैं कलकत्ता में रहती थी और गुरु केलुचरण का घर भुवनेश्वर में था। इस वजह से नृत्य सीखने के लिए कई बार भुवनेश्वर भी जाना पड़ता था। तब कई बार मैं और मेरे साथी सुबह 9 बजे से रात के 9 बजे तक शास्त्रीय नृत्य की प्रेक्टिस किया करते थे।’

जब 7 महीने तक रहना पड़ा स्कूल में और फिर…

बीते वक्त में सोशल मीडिया नहीं हुआ करता था, लेकिन आज के वक्त जैसा स्ट्रगल जरूर था। डांस को ही अपना प्रोफेशन चुनने वाली शर्मीला ने इसी दिशा में आगे बढ़ने का फैसला तो कर लिया था, लेकिन रास्ते में आने वाली मुश्किलों से वह भी अंजान थी। शुरुआती वक्त में काम तलाशने के लिए और किसी को इस बात पर विश्वास दिलाने के लिए (‘मैं आपकी उम्मीद पर खरा उतर सकती हूं’) केवल शब्द ही एक माध्यम होता था। ऐसे वक्त में उन्हें काफी परेशानियां का सामना करना पड़ा और उन्हें 7 महीनों तक सिर पर छत न होने के कारण स्कूल को ही अपना घर बनाना पड़ा।

3 स्टूडेंट के साथ शुरू किया था संजली सेंटर

साल 2004 में उन्होंने संजली सेंटर शुरू किया। जहां वह काफी वक्त तक डेफ (बधीर) बच्चों की नृत्य शिक्षिका रहने के बाद 2004 में मात्र 3 स्टूडेंट्स के साथ शर्मीला ने बेंगलुरु में संजली सेंटर की शुरुआत की। काफी उम्मीदों के साथ शुरू किए गए इस इंस्टीट्यूट को देखते ही देखते काफी प्रसिद्धि मिलने लगी और केवल 2 साल में संजली सेंटर में स्टूडेंट की संख्या बढ़कर 60 हो गई। हालांकि, 2011-12 शर्मिला के लिए बेहद मुश्किल रहें क्योंकि अपने पति के ट्रांसफर के कारण उन्हें अपने सेंटर को छोड़ कर दिल्ली जाना पड़ा। जिसके बाद संजली सेंटर को उनके कई स्टूडेंट्स ने छोड़ दिया लेकिन इसके बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी और एक बार फिर से शुरुआत कीय़ जिसके बाद से वह बेंगलुरू में संजली सेंटर के 2 नए ब्रांच शुरू कर चुकी हैं।

बॉलीवुड में क्या है शास्त्रीय नृत्य का भविष्य

जब शर्मिला से बॉलीवुड में क्लासिकल डांस को ज्यादा प्रोत्साहित न किए जाने के बारे में पूछा गया तो इस पर जवाब देते हुए उन्होंने कहा, ‘बॉलीवुड में ऐसी कई एक्ट्रेस हैं जिन्हें क्लासिकल डांस आता है, लेकिन शास्त्रीय या ओडिसी नृत्य सीखने के लिए बेहद गहराई में जाना पड़ता है और चीजों को बारीकी से समझना पड़ता है। इस तरह की कलाओं को सीखने के लिए आपको कई सालों तक सीखना पड़ता है। जिस कारण बॉलीवुड में क्लासिकल को उतना महत्व नहीं दिया जाता। कोई भी क्लासिकल डांसर आसानी से बॉलीवुड डांस कर सकता है लेकिन कोई बॉलीवुड डांसर क्लासिकल नहीं कर सकता।

ड्रीम प्रोजेक्ट है ‘हंसिका’

शर्मिला 22 नवंबर को दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम ‘हंसिका’ के बारे में बताती हैं कि यह रशियन फॉकटेल से प्रेरित है। यह रशिया की मशहूर कहानी स्वानलेक से प्रेरित है, जिसे Tchaikovsky द्वारा कंपोज किया गया था। बचपन से ही बैले डांस से प्रभावित शर्मिला इस कहानी को पढ़ा करती थीं और काफी पसंद करती थीं और इस वजह से उन्होंने इसे भारतीय लोगों के सामने ओडिशी डांस के जरिए दिखाने का फैसला किया है।

उन्होंने बताया कि इस प्रोजेक्ट पर काम करना इतना आसान नहीं था क्योंकि यह काफी बड़ी कहानी है और इसके लिए बड़े स्तर पर प्रोडक्शन टीम की जरूरत थी, लेकिन कुछ लोगों के साथ से वह इस काम को पूरा कर पाईं। वह बताती हैं कि उन्होंने अपनी टीम के साथ इस पर काम शुरू किया और भारतीय दर्शकों के मुताबिक कहानी में कुछ बदलाव किए और स्क्रिप्ट तैयार की। फिर धीरे धीरे कॉस्ट्यूम्स पर काम किया और इस कार्यक्रम के लिए म्यूजिक प्रवीन राव ने दिया। प्रवीन राव ने बेहद ही खूबसूरती से इस प्रोग्राम के लिए सॉन्ग कंपोज किए हैं। इस कार्यक्रम में कुल 25 डांसर्स ने काम किया है। आपको बता दें, यह कार्यक्रम 22 नवंबर को दिल्ली स्थित कामानी ऑडोटोरियम में प्रस्तुत किया जाएगा।

 – लेखिका, समसामयिक विषयों और करियर पर लिखती हैं।

 

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