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स्मृति शेष / विनम्र और शालीन थीं नीलम शर्मा, उनसे सीखें एंकर ये ज्ञान

Picture courtesy : Neelam Sharma/facebook

वो समाचार की दुनिया का शालीन और सौम्य चेहरा थीं। गरिमामयी एंकरिंग हो या बड़े से बड़े मसले पर आक्रामक बहस उनकी विनम्र और संयमित भाषा का अंदाज़ सबसे जुदा था। तो कुछ ऐसी थीं दूरदर्शन की एंकर नीलम शर्मा। 17 अगस्त, 2019 दिन था शनिवार वो दुनिया को अलविदा कह गईं, लेकिन उन्होंने जो योगदान एंकरिग के क्षेत्र में दिया वो अनमोल है। वो पिछले 20 साल से दूरदर्शन न्यूज के साथ जुड़ी हुई थीं। वह कैंसर से पीड़ित थीं और उन्हें इस साल मार्च में ‘नारी शक्ति’ सम्मान मिला था।

50 वर्षीय नीलम जी के निधन की खबर और उनकी उपलब्धियों के बारे में डीडी न्यूज के ट्विटर हैंडल से ट्वीट किया गया। इसके बाद जिसने भी यह खबर सुनी वो दुःखी था, खासतौर पर 90 और 2000 के दशक में जन्में वो लोग जिन्होंने दूरदर्शन पर अपने बचपन के दिनों में जब भी दूरदर्शन समाचार सुनना चाहा तो उन्हें नीलम जी का सौम्य चेहरा और विनम्र आवाज ही सुनाई दी।

चित्र: दूरदर्शन एंकर नीलम शर्मा।

नीलम शर्मा के साथ करीब 32 साल से दूरदर्शन में कार्यरत् रमन हितकारी द फीचर टाइम्स को बताते हैं, ‘उस वक़्त मैं जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी में डिसआर्मामेण्ट स्टडीज में एम्.फील कर रहा था और नीलम आईआईएमसी में पढ़ रहीं थी। वह इस संस्थान की 1989-90 बैच की छात्रा थीं। उस वक़्त जेएनयू और आईआईएमसी के कैंपस आपस में मिले हुए थे। नीलम का हमारे कैंपस में हमारे प्रोफेसर के यहां आना जाना था। तीन चार की ही मुलाकातें रहीं होंगी। उसके बाद मेरा दूरदर्शन में सिलेक्शन हो गया और मैं लखनऊ में पोस्टेड हो गया। तकरीबन तीन चार साल बाद नीलम एक प्रोजेक्ट के तहत ‘ज़ायके का सफर’ शूट करने के लिए 1994 में लखनऊ आईं। लखनऊ में, मैं उन्हें पहचान नहीं पाया। उन्होंने ही मुझे पहचाना की आपसे जेएनयू में मिल चुके हैं। नीलम ने ज़ायके के सफर के 250 एपिसोड बनाए थे। फ्रूड ट्रेवेलॉग का ये अब तक का सबसे बेहतरीन प्रोग्राम माना जाता है।’

रमन आगे बताते हैं, ‘जब ट्रांसफर पर 2003 में डीडी न्यूज़ आया तो नीलम से एक बार फिर मिलना हुआ। पिछले 15 साल से मैंने नीलम के लगभग सभी प्रोग्रामडायरेक्ट और प्रोड्यूस किए। मैंने अबतक न जाने कितने न्यूज़ एंकर्स को देखा है, लेकिन नीलम जैसा फोकस्ड एंकर आज तक नहीं देखा। कोई भी विषय उन्हें दीजिए, मिनटों में उसकी तह तक पहुंच जाती थीं। नीलम का शो ‘बड़ी चर्चा’ बहुत पॉपुलर रहा। 2005 से उन्होंने लगातार इस शो को किया और कुल मिला कर इसके 600 से भी अधिक एपिसोड बतौर एंकर किए। बड़ी चर्चा टेलीविज़न ऑडियंस शोज़ में एक मील का पत्थर साबित हुआ।’

नवम्बर, 2014 में नीलम ने ‘तेजस्विनी’ कार्यक्रम की शुरुआत की। इस कार्यक्रम के बारे में वो कहती थीं की मैं उन अनसुनी आवाज़ों को एक मंच देना चाहती हूं जो अब तक सुनी नहीं गई हैं। तेजस्विनी के 200 एपिसोड हो चुके हैं। मौजूदा दौर में किसी भी चैनल पर महिलाओं पर इतना सशक्त और पॉपुलर प्रोग्राम नहीं है। नीलम का प्रोफेशनल करियर जितना सेलेब्रेटेड था उतना ही उनका अकादमिक करियर था। लेडी श्री राम कॉलेज से उन्होंने बीए और एमए फर्स्ट क्लास में किय, एमसीआरसी जामिया से टीवी रेडियो का प्रोफेशनल कोर्स किया और फिर आई आईआईएमसी से पढ़ाई की।

आखिर में रमन बताते हैं कि नीलम ‘डायचे वेळे’ स्कालरशिप पर जर्मनी रहीं और फिर दूरदर्शन से 1995 से जुड़ गईं। नीलम को श्रद्धांजलि देते हुए बस इतना ही कहना है कि ‘नीलम के साथ दूरदर्शन ने अपनी तेजस्विनी को खो दिया।

‘नीलम शर्मा हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिले (भोरंज की ग्राम पंचायत भलवानी) की रहने वालीं थीं और उनकी शिक्षा दिल्ली में हुई। उनके पिता सेना में लेखाधिकारी थे।’

नीलम जी के ही एक अन्य कलीग दूरदर्शन में कार्यरत् सुरेश जायसवाल बताते हैं कि आज के दौर में जब हिंदी/अंग्रजी चैनल में एंकर चीख चिल्लाकर अपने शो को हिट कराने की कोशिश करते है ऐसे दौर में भी नीलम जी का हर बुलेटिन हर शो और हर कार्यक्रम अलग मिसाल पेश करता है। उनका व्यक्तित्व उन्हें आज के दौर के तमाम पत्रकारों और मीडिया प्रोफेशनल्स के लिए एक आदर्श के तौर पर प्रस्तुत करता है।

उन्होंने अपने संस्थान के किसी भी अपने समकक्ष से लेकर उनके जूनियर कलीग्स से हमेशा विनम्रता से बात करती थीं। मीडिया में बुलेटिन या प्रोग्राम का काम एक टीम वर्क होता है और उसमें किसी की भी एक छोटी सी गलती सबके काम को खराब कर देती है। कई बार छोटी-छोटी गलतियां होने पर मीडिया में लोग चिल्लाने और अपशब्द कहते हैं, लेकिन नीलम जी को किसी ने आज तक किसी भी सहकर्मी के साथ तेज आवाज में बात करते नहीं देखा। किसी गलती या किसी समस्या होने पर भी वो उसी सामान्य तरीके से व्यवहार करती थीं।

एक और बात नीलम जी के बारे में ये कि उन्हें कभी अपने सेलीब्रिटी एंकर होने का गुमान नहीं रहा। बुलेटिन में एंकर द्वारा बोले गए शब्दों को लिखना हो या पूरा पैकेज वो हमेशा अपना काम खुद करती थी। मेरे बुलेटिन के लिए वो पैकेज भी लिखती थीं। हालांकि मैं आईआईएमसी और डीडी न्यूज दोनों जगहों पर उनसे काफी जूनियर रहा, लेकिन उन्होंने कभी ये एहसास नहीं होने दिया। पैकेज लिखने के बाद वो मुझे ही उसे देखने के लिए कहती थीं। यही चीज उन्हें बाकी एंकर्स और रिपोर्टस से अलग बनाती थी।

इसके अलावा संस्थान में तमाम इंटर्न और जूनियर लोग ज्वाइन करते रहते हैं जो नीलम जी के पास भी जाने से हिचकते थे, लेकिन नीलम जी उनसे बहुत ही प्यार से बात करती थीं। अगर कोई उनके पास जाता तो उसके साथ जरुर बैठकर कुछ देर बात करतीं। ऐसी तमाम बातें और अनुभव हैं जो नीलम जी के व्यक्तित्व से स्टूडेंट्स और एंकर्स को सीखना चाहिए।

नीलम जी के निधन के बाद उनके घर में अब उनके पति और 15 वर्षीय बेटे को पीछे छोड़ गई हैं। निधन के बाद प्रसार भारती के चेयरमैन ए.सूर्य प्रकाश ने ट्वीट किया, ‘ये सुनकर मैं सदमे में हूं कि दूरदर्शन की मशहूर एंकर नीलम शर्मा नहीं रहीं। वह सच में ‘नारी शक्ति’ की प्रतीक थीं, जिसका सम्मान उन्हें राष्ट्रपति के हाथों मिला था। हमने अपनी तेजस्विनी को खो दिया है।’

ईटीवी मप्र/छत्तीसगढ़ में एंकर रह चुकीं दीपशिखा सोनी वर्तमान में टीवी सीरियल ‘जात न पूछो प्रेम की’ में बतौर टीवी एक्ट्रेस हैं। वो कहती हैं, ‘नीलम शर्मा बहुत ही खूबसूरत एंकर थीं। मेरी उनसे कभी मुलाकात तो नहीं हुई लेकिन ‘हां’ एक बार बात हुई जब मैं ईटीवी न्यूज़ हैदराबाद में थी, उन्होंने मेरी एंकरिंग की तारीफ की और मेरे बालों को उनकी तरह और लंबे करने को भी कहा था, और वो हंस पड़ी थीं ये सुनकर कि मुझे उनकी तरह ही बनना और उनके साथ स्क्रीन शेयर करना है, कितनी सौम्यता और अपनेपन से उन्होंने मिलने का वादा किया था, लेकिन मैं उनसे नहीं मिल पाई।’

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