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लोकतंत्र / एक इंसान के तौर पर आपकी क्या है ‘जिम्मेदारी’

  • दलाई लामा, बौद्ध आध्यात्मिक गुरु।

पिछले लगभग 60 साल में, मैंने कई सरकारों, कंपनियों और अन्य संगठनों के नेताओं के साथ संवाद किया है और मैंने देखा है कि हमारे समाज कैसे विकसित हुए और बदले हैं। मुझे अपनी कुछ टिप्पणियों को साझा करने की खुशी है अगर मैंने जो सीखा है उससे दूसरों को फायदा हो सकता है।

‘भौतिक विकास और धन संचय पर हमारा मजबूत ध्यान हमें दया और देखभाल की बुनियादी मानवीय आवश्यकता की उपेक्षा करने के लिए प्रेरित करता है।’ यदि आप दुनिया के किसी भी लोकतांत्रिक देश के नगरिक हैं तो आपको अपना मतदान करते समय तीन बातों पर ध्यान देना जरूरी है…

  • पहला, नेता बुद्धिमान होना चाहिए क्योंकि, ‘जब हम क्रोध या लगाव के भाम में केंद्रित होते हैं तो स्थिति का पूर्ण और यथार्थवादी दृष्टिकोण लेने की हमारी क्षमता में सीमित हो जाती हैं।’
  • दूसरा, निस्वार्थ होना, यह इसलिए कि, ‘जब आप दूसरों के लिए चिंता की वास्तविक भावना रखते हैं, तो धोखा, बदमाशी या शोषण के लिए कोई जगह नहीं होती है। इसके बजाय आप अपने आचरण में ईमानदार, सच्चे और पारदर्शी हो सकते हैं।’
  • तीसरा और अंत में, दयालु होने के लिए है, ‘जब मन दयालु होता है, तो यह शांत होता है और हम व्यावहारिक और वास्तविक रूप से और दृढ़ संकल्प के साथ अपनी समझदारी का उपयोग करने में सक्षम होते हैं।’

दुनिया का कोई भी नेता हो, वो जो भी क्षेत्र में काम करते हैं, उनका लोगों के जीवन और दुनिया के विकास पर गहरा प्रभाव पड़ता है। हमें याद रखना चाहिए कि हम इस ग्रह पर आगंतुक हैं। हम यहां सबसे ज्यादा 90 या 100 साल से हैं। इस दौरान हमें दुनिया को बेहतर जगह छोड़ने के लिए काम करना चाहिए।

एक बेहतर दुनिया कैसी दिख सकती है? उत्तर सीधा है, एक बेहतर दुनिया वह है जहां लोग खुश हैं। क्यों? सभी इंसान खुश रहना चाहते हैं, और कोई भी पीड़ित नहीं होना चाहता है। खुशी की हमारी इच्छा कुछ ऐसी है जो हम सभी के लिए समान है।

लेकिन आज, दुनिया एक भावनात्मक संकट का सामना कर रही है। तनाव, चिंता और अवसाद की समस्या पहले से कहीं अधिक हैं। अमीर और गरीब के बीच और सीईओ और कर्मचारियों के बीच की खाई एक ऐतिहासिक ऊंचाई पर है और सिर्फ लाभ को हासिल करने पर ध्यान के कारण हम पर्यावरण, या समाज के प्रति प्रतिबद्धता को नष्ट कर रहे हैं।

मैं, ‘हम’ और ‘उन्हें’ के संदर्भ में एक-दूसरे को देखने की हमारी प्रवृत्ति को अपनी अज्ञानता से उपजी मानता हूं। समान वैश्विक अर्थव्यवस्था के भागीदार के रूप में, हम एक-दूसरे पर निर्भर हैं, जबकि जलवायु और वैश्विक वातावरण में परिवर्तन हम सभी को प्रभावित करते हैं। मनुष्य के रूप में हम शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक रूप से समान हैं।

मधुमक्खियों के पास कोई संविधान, पुलिस या नैतिक प्रशिक्षण नहीं है, लेकिन वे जीवित रहने के लिए मिलकर काम करती हैं। हालांकि वे कभी-कभार छिटक जाते हैं, कॉलोनी सहयोग के आधार पर बच जाती है। दूसरी ओर, मानव के पास संविधान, जटिल कानूनी प्रणालियां और पुलिस बल हैं, हमारे पास उल्लेखनीय बुद्धि, प्यार और स्नेह के लिए एक महान क्षमता है फिर भी, हमारे कई असाधारण गुणों के बावजूद, हम सहयोग करने में कम सक्षम हैं।

संगठनों में, लोग हर दिन एक साथ मिलकर काम करते हैं। लेकिन एक साथ काम करने के बावजूद, कई लोग अकेला और तनाव महसूस करते हैं। भले ही हम सामाजिक प्राणी हैं, लेकिन एक-दूसरे के प्रति जिम्मेदारी की कमी है। हमें खुद से पूछना होगा कि आखिर क्या गलत हो रहा है।

भौतिक विकास और धन संचय पर हमारे मजबूत फोकस ने हमें दया और देखभाल के लिए बुनियादी मानवीय आवश्यकता की उपेक्षा करने के लिए प्रेरित किया है। अपने भाइयों और बहनों के प्रति मानवता, परोपकार और एकता के लिए प्रतिबद्धता को बहाल करना समाजों और संगठनों और उनके व्यक्तियों के लिए लंबे समय तक चलने के लिए मौलिक है। हममें से हर एक की यह ज़िम्मेदारी बनती है।

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सौजन्य : हावर्ड बिजनेस रिव्यू

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