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जज्बा / कौन हैं रश्मि जो कहती हैं, ‘पढ़ने की कोई उम्र नहीं, जब चाहें शुरु हो जाएं’

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छत्तीसगढ़ के बालोद की रहने वाली रश्मि यादव ने हालही में कुछ ऐसा किया कि आज वो उन महिलाओं के लिए मिसाल हैं, जो किसी न किसी कारण से अपनी पढ़ाई छोड़ देती हैं। रश्मि कहती हैं कि पढ़ने की कोई उम्र नहीं होती, पढ़ाई कभी भी शुरु की जा सकती है। उन्हें यह बात एक एनजीओ के कॉर्डिनेटर ने बताई थी।

रश्मि यादव 40 साल की हैं और 23 साल पहले उन्होंने 8वीं तक पढ़ाई करने के बाद पढ़ाई को अलविदा कह दिया था। वजह थी शादी लेकिन शादी के 13 साल बाद पति से तलाक हो गया और अब वह पिछले 10 साल से अपने बेटे के साथ रहती हैं। रश्मि का बेटा 6वीं में पढ़ता है।

TOI की खबर के मुताबिक, रश्मि ने पढ़ने का फैसला लिया और इस साल दसवीं बोर्ड की परीक्षा पास कर ली। रश्मि बताती हैं, ‘वह भेड़िया नवागांव की रहने वाली हैं। पढ़ाई के दौरान वह हाईस्कूल में फेल हो गई थी, उसके बाद माता पिता ने उन्हें दूसरा मौका नहीं दिया। उनकी शादी कर दी गई। शादी के बाद उनके पति उन्हें प्रताड़ित करते थे। जब उनका बेटा एक साल का था तब पति ने उन्हें तलाक दे दिया। वह मायके आकर रहने लगीं लेकिन उनके माता-पिता की मौत के बाद उनके मायकेवालों ने रखने से इनकार कर दिया।’

रश्मि की जिंदगी में पढ़ाई आगे जारी रखने की एक किरण तब नजर आई जब उन्हें प्रथम एजुकेशन फाउंडेशन के बारे में पता चला। इस एनजीओ ने उन्हें जिंदगी में पढ़ने का दूसरा मौका दिया। कुछ काउंसलिंग के बाद वह पढ़ने के लिए राजी हो गईं। उन्होंने भेड़िया नवागांव के क्लस्टर में पंजीकरण कराया।

उन्हें छत्तीसगढ़ ओपन बोर्ड में 47 फीसदी नंबर मिले हैं। अब वह और पढ़ना चाहती हैं। प्रथम फाउंडेशन के कॉर्डिनेटर नूर यासीन ने बताया कि बताया कि उनका एनजीओ ऐसी ही स्कूल ड्रॉपआउट महिलाओं और लड़कियों के लिए काम करता है। उनकी पढ़ाई में मदद की जाती है।

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