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मानवता / वो महिलाएं जो युद्ध में करती थीं रातभर घायलों का इलाज

अंतर्राष्ट्रीय नर्स दिवस 12 मई विशेष…

अंतर्राष्ट्रीय नर्स दिवस मनाने की शुरूआत कैसे हुई इसके पीछे एक रोचक किस्सा है। हुआ कुछ यूं था कि पहली बार नर्स दिवस मनाने का प्रस्ताव अमेरिका के स्वास्थ्य, शिक्षा और कल्याण विभाग के अधिकारी डोरोथी सदरलैंड ने प्रस्तावित किया। इसके बाद संयुक्त राज्य अमरीका के 34वें राष्ट्रपति ड्वाइट डेविड आइज़नहावर ने इसे मनाने की मान्यता प्रदान की। इस तरह नर्स दिवस अमेरिका में पहली बार 1953 में मनाया गया।

अंतर्राष्ट्रीय नर्स परिषद ने इस दिवस को पहली बार साल 1965 में मनाया। नर्सिंग पेशेवर की शुरूआत करने वाली फ़्लोरेन्स नाइटिंगेल के जन्मदिन 12 मई को अंतर्राष्ट्रीय नर्स दिवस मनाने का निर्णय 1974 में लिया गया। तब से आज तक यही दिन अंतर्राष्ट्रीय नर्स दिवस के रूप में दुनिया की तमाम नर्सों के सम्मान में मनाया जाता है।

कौन थीं नाइंटेंगल

फ़्लोरेन्स नाइटिंगेल को आधुनिक नर्सिग आंदोलन का जन्मदाता माना जाता है। उनका जन्म 12 मई 1820 को हुआ था। दया और सेवा की मूर्ति फ्लोरेंस नाइटिंगेल ‘द लेडी विद द लैंप’ के नाम से प्रसिद्ध हैं, जिनके बारे में बच्चों को आज भी प्राइमरी स्कूल में पढ़ाया जाता है। इनका जन्म एक उच्चवर्गीय ब्रिटिश परिवार में हुआ था, लेकिन उच्च कुल में जन्मी फ्लोरेंस ने सेवा का मार्ग चुना।

‘फ़्लोरेन्स नाइटिंगेल से पहले कभी भी युद्ध के दौरान बीमार घायलों के उपचार पर ध्यान नहीं दिया जाता था, लेकिन इस महिला ने तस्वीर को हमेशा के लिए बदल दिया। उन्होंने क्रीमिया के युद्ध के समय घायल सैनिकों की सेवा की थी। वे रात-रात भर जाग कर एक लालटेन और दीपक के सहारे इन घायलों की सेवा करती रहीं इस लिए उन्हें ‘लेडी विथ दि लैंप’ का नाम मिला था। उनकी प्रेरणा से ही नर्सिंग क्षेत्र में महिलाओं को आने की प्रेरणा मिली थी।’

रातभर करती थीं घायलों का इलाज

सन् 1844 में परिवार के तमाम विरोधों के बाद उन्होंने अभावग्रस्त लोगों की सेवा का संकल्प लिया। दिसंबर 1845 में उन्होंने चिकित्सा सुविधाओं को सुधारने बनाने का कार्यक्रम आरंभ किया था। बाद में वह रोम के राजनेता सिडनी हर्बर्ट से से मिली, दोनों काफी अच्छे दोस्त थे।

फ्लोरेंस का सबसे महत्वपूर्ण योगदान क्रीमिया के युद्ध में रहा। अक्टूबर 1854 में उन्होंने 38 महिलाओं का एक दल घायलों की सेवा के लिए तुर्की भेजा। इस समय किए गए उनके सेवा कार्यो के लिए ही उन्होंने ‘लेडी विद द लैंप’ की उपाधि से सम्मानित किया गया। जब चिकित्सक चले जाते तब वह रात के अंधेरे में मोमबत्ती जलाकर, लालटेन या फिर दीपक की रोशनी में घायलों की सेवा के लिए उपस्थित हो जातीं।

महारानी विक्टोरिया ने किया था सम्मान

सन् 1859 में फ्लोरेंस ने सेंट थॉमस अस्पताल में एक नाइटिंगेल प्रशिक्षण विद्यालय की स्थापना की। इसी दौरान उन्होंने ‘नोट्स ऑन नर्सिग’ पुस्तक लिखी। जीवन का बाकी समय उन्होंने नर्सिग के कार्य को बढ़ाने और इसे आधुनिक रूप देने में बिताया। 1869 में उन्हें महारानी विक्टोरिया ने ‘रॉयल रेड क्रॉस’ से सम्मानित किया। 90 साल की आयु में 13 अगस्त, 1910 को वह इस संसार से अलविदा कह गईं।

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