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भावनाएं / आखिर क्यों हो जाता है प्यार, ये है इसके पीछे का मनोविज्ञान

विलियम शेक्सपीयर की पुस्तक सॉनेट 116 में, उन्होंने लिखा था कि, ‘प्यार वह प्यार नहीं है जो बदल जाता है जब वह बदल जाता है वो प्यार नहीं।’ प्यार एक ऐसी क्षमता है जिसे आप मानसिक एकाग्रता, भावनात्मक जुड़ाव और देखभाल कार्यों के माध्यम से अपने भीतर बना सकते हैं।

प्यार, ढाई शब्दों से बना एक ऐसा शब्द जो कई लोगों की जिंदगी तबाह, तो कई लोगों की जिंदगी को सुहाना बनाए रखे हुए है। अमूमन लोगों का मानना है कि प्यार किस्मत वालों को मिलता है। जो भी हो और जैसा भी हो, लेकिन मनोविज्ञान कहता है आपकी यह सोच गलत है। दरअसल, प्यार में होना साइकोलॉजी से जुड़ा है, इसलिए जब कोई आकर्षित होता है तो उस वक्त उसकी मानसिक स्थिति कुछ अलग ही दिशा में होती है।

लोग अपनी तरह की सोच वाले लोगों से जल्द आकर्षित होते हैं। यह भी देखा गया है कि प्यार में पड़ने वाले दो लोग पहली मुलाकात में एक दूसरे को पसंद नहीं करते। नतीजा आपसी टकराव हालांकि बाद में उनमें प्यार होने की वजह भी यही बनता है। इसे ड्रमैटिक प्यार कहते हैं जो उनके अंतर्मन से जुड़ा होता है। एक और चीज जो इसमें होती है वह यह कि अमूमन लोग अपनी बातों के प्रति लोगों की सहमति देखना चहते हैं।

रिसर्च से पता चलता है कि हम पल में प्यार का अनुभव करते हैं। लोग प्यार में एक-दूसरे के चेहरे के हावभाव और यहां तक कि शारीरिक लय को भी बदलते देखे जा सकते हैं, लेकिन प्यार एक स्थायी मानसिक और भावनात्मक स्थिति भी हो सकता है, जिसमें एक-दूसरे की भलाई के लिए गहराई से परवाह करते हैं, एक-दूसरे के दर्द को महसूस करते हैं और एक-दूसरे के दुख को दूर करने में मदद करने के लिए प्रेरित होते हैं।

हंसी या मुस्कान विपरीत लिंग के बीच आकर्षण पैदा होने की सबसे बड़ी वजह है। मनोवैज्ञानिक इस बात की सहमति पर अपनी राय सकारात्मक रखते हैं। मुस्कान सकारात्मक ऊर्जा का संचार कर अपने सामने वाले को आकर्षित करती है।

आत्मकरुणा पर जब मनोवैज्ञानिकों ने शोध किया तो पता चला कि नियमित रूप से ध्यान का अभ्यास करने वाले भिक्षुओं और उनके अनुयायियों में औसत गैर-ध्यान करने वाले व्यक्ति की तुलना में अल्फा तरंगों की एक अलग लय दिमाग अनुभव करता है। सहानुभूति और सकारात्मक भावनाओं के साथ जुड़े मस्तिष्क केंद्रों में माइंडफुलनेस (सचेतन) और करुणा ध्यान सक्रियता को बढ़ाता है, हमारे भय केंद्रों की सक्रियता को कम करता है, और हमारे दिमागों को एक-दूसरे से जुड़ता है यह सुरक्षित लगाव भावनाओं से जुड़ा होता है। ठीक प्रेम में होने वाले दो विपरीत लिंग के व्यक्तियों की तरह आत्मकरूणा काम कर रही होती है।

प्यार एक ऐसी क्षमता है जिसे आप मानसिक एकाग्रता, भावनात्मक जुड़ाव और देखभाल कार्यों के माध्यम से अपने भीतर बना सकते हैं। जब हम ध्यान केंद्रित करते हैं और एक व्यक्ति के लिए हमारी प्यार भरी भावनाओं को महसूस करते हैं, तो संतुष्टि और संबंध की आंतरिक भावनाएं हमें सामान्य रूप से अधिक प्यार करने के लिए प्रेरित कर सकती हैं।

विलियम शेक्सपीयर की पुस्तक सॉनेट 116 में, उन्होंने लिखा था कि, ‘प्यार वह प्यार नहीं है जो बदल जाता है जब वह बदल जाता है वो प्यार नहीं।’ जानते हैं कि निश्चित, अपरिवर्तित प्रेम संभव है, लेकिन आदर्श नहीं। वास्तव में, कुछ विद्वान एक निश्चित, अपरिवर्तनीय ‘स्व’ के विचार पर सवाल उठाते हैं हम आज के व्यक्ति नहीं हैं, जैसा कि हम 10 साल पहले थे। जीवन का अनुभव हमारे जीव विज्ञान, विचार और व्यवहार को बदल सकता है, और रिश्तों को चुनौती दी जा सकती है। जब एक व्यक्ति की ज़रूरतें बदलती हैं या दोनों साथी अलग-अलग दिशाओं में बढ़ते हैं, तो प्यार भी बदल सकता है?

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