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स्कूल की दोस्ती / झोपड़ी में रह रहा था दोस्त, फिर हुआ कुछ ऐसा

स्कूल की दोस्ती ताउम्र रहती है इस बात को हक़ीकत में बदलते हुए के. नागेंद्रन ने मिसाल पेश की है। उन्होंने अपने स्कूल के दोस्त मुथुकुमार को घर बनवाकर दिया है।

न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, मुथुकुमार और के.नागेंद्रन दोनों दोस्त हैं। लॉकडाउन ने 44 साल के ट्रक चालक मुथुकुमार को भी प्रभावित किया। लॉकडाउन से पहले तक वो लगभग 10,000-15,000 रुपए कमा लेते थे लेकिन, लॉकडाउन में ऐसे हालात हो गए कि वह मुश्किल से एक-दो हजार ही कमा पा रहे थे। वह एक झोपड़ी में रह रहे थे और उन्हें परिवार के 6 लोगों के लिए खाने का इंतजाम भी करना था।

मुथुकुमार कहते हैं, ‘मैं जिस घर में पैदा हुआ था, मैं तब से उसी घर में रह रहा हूं। मेरे घर के आसपास के पेड़ दो साल पहले चक्रवात के दौरान गिर गए थे और तब से मेरा घर बुरी हालत में है। इसे ठीक कराने के मेरे पास पैसे नहीं हैं।’

सितंबर में, मुथुकुमार अपने स्कूल के दोस्त के.नागेंद्रन से उनके घर मिलने गए। बैठक के बाद, मुथुकुमार ने उसे अपने घर बुलाया। जब नागेंद्रन ने अपने दोस्त के घर की हालत देखी, तो वह बहुत परेशान हो गए और उन्होंने तुरंत अपने टीईसीएल हायर सेकेंडरी स्कूल पुदुक्कोट्टई के दोस्तों के व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए फंड जुटाया।

नागेंद्रन कहते हैं कि मैंने स्कूल खत्म होने के लगभग 30 साल बाद अपने दोस्त से मुलाकात की। मैं उसके घर की हालत देखकर व्यथित था। गाजा चक्रवात ने उनके घर और उनके घर की छत के आसपास के पेड़ों को नष्ट कर दिया था। मुझे पता था कि मुझे उसे मदद की ज़रूरत है। मैंने एक व्हाट्सएप ग्रुप बनाया और उसके घर की तस्वीरें और वीडियो भेजे। कई लोग उसकी मदद के लिए आगे आए।

नागेंद्रन और उनके दोस्तों ने महज तीन महीने में 1 लाख 50 लाख रुपये की लागत से घर बना लिया। उन्होंने मुथुकुमार और उनके परिवार को दीवाली उपहार के रूप में घर सौंप दिया।

नागेंद्रन कहते हैं कि भले ही हम संपर्क में नहीं हैं, लेकिन स्कूल के दोस्त हमेशा विशेष होते हैं। हम सभी को अपने दोस्तों की जरूरत में मदद करनी चाहिए। लॉकडाउन के दौरान कई लोगों को नुकसान उठाना पड़ा है। यदि आप किसी ऐसे दोस्त को जानते हैं जो संकट में है, तो कृपया उनकी मदद के लिए कुछ करें।

(आप हमें फेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम, लिंक्डिन और यूट्यूब  पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं।)

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