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इंसानियत / कलयुग में भगीरथ की तरह हैं गौतम, लेकिन कैसे? यहां जानें

तेलंगाना और आंध्र प्रदेश की संयुक्त राजधानी हैदराबाद में रहते हैं ‘गौतम कुमार’। वह सैकड़ों लोगों के लिए उम्मीद की वो किरण हैं, जो उन लोगों का अंतिम संस्कार करते हैं, जिनका इस दुनिया में कोई नहीं।

उनकी उम्र 31 साल है। वह न केवल अंतिम संस्कार जैसा पुण्य काम करते हैं बल्कि गरीबों, कमजोर, उपेक्षित व्यक्तियों और अनाथ बच्चों की मदद करने में हमेशा आगे रहते हैं।

गौतम ने करियर की शुरूआत मार्केटिंग के क्षेत्र से की, जब वह 26 साल के थे तभी से वह समाज को सार्थक तरीके से योगदान देना चाहते थे और तब से उन्होंने एक स्वयंसेवक के रूप में बतौर काम शुरू किया।

TFT को दिए एक खास इंटरव्यू में वह कहते हैं कि वह कुछ नई योजनाओं पर काम कर रहे हैं जिनमें पिछले साल से शुरू की उनकी एक योजना अंतिम संस्कार से संबंधित हैं जहां वह उन लोगों का ‘अंतिम संस्कार’ करते हैं, जिनका इस दुनिया में कोई नहीं है।

गौतम बताते हैं कि, ‘हम भूखे लोगों को भोजना मुहैया करवाते हैं, इसके अलावा बूढ़े लोगों को आश्रय और जिन बच्चों को फुटफाथ पर सोना मजबूरी है उन्हें अनाथालय में शिफ्ट करते हैं।’ ऐसे कई है जिन्हें गौतम आशा की किरण बनकर उभर रहे हैं।

गौतम ऐसे लोगों का भी अंतिम संस्कार करते हैं जिन्हें उनके परिवार वालों ने उपेक्षित कर दिया है, या वो परिवार व्यक्तिगत तौर पर अंतिम संस्कार का खर्च नहीं उठा सकता है।

अभी तक, गौतम ने कम से कम 300 लोगों से भी ज्यादा लोगों का अंतिम संस्कार किया है। वह जाति और धर्म के नाम पर भेदभाव नहीं करते हैं। अपने अनुभव को साझा करते हुए, गौतम बताते हैं कि उनकी इस पहल को पूरी दुनिया में लोगों से प्रशंसा मिली है। लोग उनके इस काम को सराहते हुए उन डॉक्युमेंट्री भी बना रहे हैं।

गौतम, कलियुग में भगीरथ की तरह तो नहीं लेकिन उनसे मिलते जुलते व्यक्तित्व की तरह हैं, हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार भगीरथ तो सिर्फ अपने पूर्वजों को मुक्ति दिलाने के लिए गंगा नदी को धरती पर लाए थे, लेकिन गौतम बेसहारा लोगों का अंतिम संस्कार कर उनके मृत शरीर को अग्नि में समर्पित कर उनकी आत्मा को शांति देने का काम कर रहे हैं।

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