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परोपकार/ हरजिंदर सिंह, इस शहर में चलाते हैं फ्री ऑटोरिक्शा एम्बुलेंस

Picture Courtesy : Twitter/Apolina De

गुरु गोविंद सिंह ने कहा था, ‘सेवा और सहायता के लिए जितना संभव हो लोगों की मदद करते रहो’ उनके इस वाक्य को सार्थक करते 76 साल के हरजिंदर सिंह हमारे बीच एक उदाहरण हैं।

1964 में स्नातक होने के बाद उन्होंने आजीविका के लिए दिल्ली में एक ऑटोरिक्शा ड्राइविंग करने के लिए लिया। उस समय से वह सड़कों पर जरूरतमंद लोगों की मदद कर रहे हैं। अब यह उसके लिए ये जुनून बन चुका है। दिलचस्प बात यह है कि हम आज उस दुनिया में जहां फ्री में कुछ नहीं मिलता वहां हरजिंदर नि: शुल्क लोगों की सेवा करते हैं।

रसियन न्यूज वेबसाइट स्पुतनिक से वो कहते हैं कि मैंने सड़कों पर सैकड़ों दुर्घटना पीड़ितों की मदद की है, और उन्हें अस्पताल में ले गया है। वो दुर्घटना में घायल हुए व्यक्ति को नजदीकी अस्पताल में ले जाते हैं। इस दौरान वो आयुर्वेदिक दवाओं का भी वितरण भी करते हैं। वह कहते हैं, उन्हें आयुर्वेद में प्रशिक्षित किया गया है। जो भुगतान नहीं कर सकते और जिसे दवा की जरूरत होती है, उन्हें मुफ्त में दवाइयां देते हैं। हालांकि कुछ लोग मुझे दवा के बदले कुछ धनराशि देते हैं।

हरजिंदर सिंह को दिल्ली पुलिस द्वारा प्रशस्ति पत्र दिया गया है। जब भी बीते दौर की दिल्ली ट्रैफिक की पूर्व चीफ किरण बेदी और तत्कालीन गवर्नर बना आज भी जब हरजिंदर के ऑटोरिक्शा को देखती है तो वो रुकती है, उनके पास आकर जन कल्याण और हरजिंदर के परिवार के बारे में जरूर पूछती हैं।

यह पूछने पर कि क्या आपका परिवार आपको दिल्ली की सड़कों पर ऑटोरिक्शा नहीं चलाने की सलाह देता है? तो उत्तर में हरजिंदर कहते हैं, ‘मेरा बेटा मुझे गाड़ी चलाने से रोक रहा है। लेकिन मैंने उससे कहा कि अगर मैं गाड़ी चलाऊंगा तो स्वस्थ रहूंगा। दूसरे, ‘मुझे अपने दैनिक खर्चों के लिए पैसे मांगने की जरूरत नहीं है। इसलिए उन्होंने मेरी इच्छाओं को स्वीकार किया है और मेरा पूरा सहयोग करते हैं।’ सोशल मीडिया पर भी उनके इस कार्य की लोग सराहना करते हैं।

तो वहीं, दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के अनुसार, राष्ट्रीय राजधानी की सड़कों पर साल 2018 में 1600 से अधिक लोग मारे गए, जबकि लगभग 5800 घायल हुए। जिनेवा स्थित इंटरनेशनल रोड फेडरेशन (IRF) ने कहा, भारत में सालाना लगभग 147,000 लोग सड़कों पर मरते हैं, जो वैश्विक सड़क दुर्घटना के 11% के लिए जिम्मेदार हैं। दिल्ली पुलिस ने राजधानी में कई स्थानों की पहचान की है, जो ‘ब्लैकस्पॉट’ हैं जहां अक्सर दुर्घटनाएं होती हैं।

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