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गूंज / सरकार ने नहीं, गांव वालों ने बनाया पुल, करते हैं खुद रख-रखाव

चित्र : कालजनी नदी पर ग्रामीणों द्वारा बनाया गया पुल।

  • रविकांत द्विवेदी, लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं और सामाजिक मुद्दों पर लिखते हैं।

भारत में, ‘कूचबिहार’ पश्चिम बंगाल का एक जिला है। इसका मुख्यालय कूचबिहार है। विकास के दावे करने वाली टीएमसी हो या केंद्र सरकार आलम यह है कि यहां आजादी के कई दशक बीत जाने के बाद भी भौतिक सुविधाएं नहीं पहुंची हैं।

यहां सड़क और परिवहन सुविधाओं की कमी है। बुनियादी जरूरतों का अभाव है। देश में ऐसे कई जिले और गांव हो सकते हैं लेकिन बात सिर्फ कूचबिहार जिले के बरमान पारा गांव की करें तो गूंज एनजीओ के द्वारा की जा रही मदद से ग्रामीणों के चेहरे पर खुशी दिखाई देती है।

गांव के ही प्रणब बर्मन कहते हैं कि, ‘पहले हमें खेती के लिए अपने दूर-दराज के खेतों तक पहुंचने के लिए करीब 20 किलोमीटर तक पैदल चलना पड़ता था, कभी कभार थकान के बारे में जब खयाल आता था तो मन करता था कि वहां न जाएं और नहीं जाने का मतलब साफ था कि घर का चूल्हा नहीं जलेगा’। बरमान पारा में सुविधाओं का अभाव है इसलिए गांव के लोग काम और रोजमर्रा की चीजों को खरीदने के लिए पड़ोसी जिले अलीपुरद्वार जाते हैं।

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इसी गांव के रहने वाले मिनाती मन्ना ने बताते हैं, ‘बीते दिनो कालजनी नदी में एक नाव पलट गई, जिसमें 12 लोगों की मौत हो गई थी, उसके बाद से ही गांव के लोगों ने नाव से यात्रा करना बंद कर दिया’। इन इलाकों में काम कर रही सामाजिक संस्था (एनजीओ) गूंज को जब इसका पता चला तो उस नदी पर एक बांस का पुल बनाने की पहल की गई, जिससे कि गांव वालों की यात्रा थोड़ी आसान हो सके। इसके बाद तकरीबन 100 लोगों ने मिलकर पूरी शिद्दत और मेहनत से लगभग 350 मीटर लंबा बांस का पुल बनाया गया।

गूंज की फ्लैगशिप योजना- डिग्निटी फॉर वर्क के जरिए इस पुल को बनाने में करीब एक महीने का वक्त लगा। पुल बन जाने के बाद इसमें शामिल लोगों को पुरस्कार स्वरूप गूंज की एक किट दी गई जिसमें उनके लिए आवश्यक चीजें दी गईं जो उनकी बुनियादी जरूरतों को पूरा करती थीं। पुल के रख-रखाव में आने वाले खर्च के लिए गांव वालों ने इस पुल से यात्रा करने वालों से एक न्यूनतम राशि लेने का फैसला किया।

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पुल बन जाने की खुशी गांव वालों के चेहरे से साफ झलक रही थी। बरमान पारा की रहने वाली शर्मिला गायन कहती हैं, ‘हम बेहद खुश हैं, इस पुल ने दूसरे जिले की यात्रा को बहुत ही आसान और सुविधाजनक बना दिया है। निश्चित तौर पर ये हमारे जीवन को और सरल बनाएगा’। वर्तमान में यह पुल पश्चिम बंगाल के दो जिलों को आपस में जोड़ता है। यहां पुल नहीं होने से आवागमन को लेकर काफी दिक्कत थी लेकिन इसके बन जाने से अब मीलों की दूरी मिनटों में पूरी हो जाती है और समय भी बचता है।

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