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प्रेरणा / चुनौतियों से कैसे सामना किया जाता है श्रीदेवी और भारती से सीखिए

फोटो सौजन्य : श्री देवी और उनके माता-पिता /मातृभूमि।

श्रीदेवी और भारती। दोनों ही 10वीं में स्टूडेंट थीं। श्रीदेवी तमिलनाडु के तिरुपुर जिले तो भारती खांडेकर मध्यप्रदेश में इंदौर के सरकारी स्कूल में पढ़ती हैं। पढ़ाई के दौरान किए संघर्ष की कहानी दोनों की अलग हो सकती है। लेकिन उन बच्चों की लिए ये प्रेरणा हैं जो अभाव में रहते हुए भी मेहनत से पढ़ाई करते हैं।

शुरूआत श्री देवी से करते हैं। वो अन्नामलाई टाइगर रिज़र्व के उदुमलपेट रेंज में पुचुकोत्तमपराई आदिवासी बस्ती में रहती हैं। श्रीदेवी तमिलनाडु-केरल सीमा पर बने चलकुडी के नयारनागडी मॉडल आवासीय विद्यालय में रहते हुए उन्होंने 10वीं बोर्ड परीक्षा में 95 प्रतिशत अंक हासिल किए।

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक उनके गांव में ऐसे कई आदिवासी मूल के बच्चें हैं, जिन्होंने पढ़ाई छोड़ दी है। श्रीदेवी 16 साल की हैं। जहां वो रहती हैं वहां ना तो कच्ची सड़क और बिजली तक नहीं है। मोबाइल नेटवर्क भी बमुश्किल आता है।

दिलचस्प बात तो यह है कि लगभग एक महीने पहले, केरल सरकार ने यह सुनिश्चित किया कि श्रीदेवी अपनी शेष परीक्षाओं में शामिल हो सके, उन्हें तमिलनाडु-केरल सीमा से स्कूल तक पहुंचाने के लिए एक विशेष बस की व्यवस्था की थी।

श्रीदेवी और उनके पिता को चेक पोस्ट तक पहुंचने के लिए दोपहिया वाहनों में लगभग 80 किलोमीटर की यात्रा करनी पड़ती थी। श्रीदेवी के पिता एम चेल्लमुथु जो एक किसान है वह कहते हैं कि श्रीदेवी जितनी भी पढ़ाई करनी चाहें वो कर सकती हैं। अनामलाई बाघ आरक्षित वन क्षेत्र के सहायक निदेशक जेवियर ने श्रीदेवी को दुपट्टा और एक घड़ी देकर सम्मानित किया। उन्होंने लैपटॉप देने का वादा किया है।

पढ़ाई के जरिए फुटपाथ से फ्लैट का सफर

श्रीदेवी से मिलती भारती की कहानी है। लेकिन भारती की मदद, सरकार ने परीक्षा में अच्छे अंक लाने के बाद की। उन्होंने कक्षा 10 की परीक्षा में 68 प्रतिशत अंक हासिल किए हैं। भारती खांडेकर, जो अपने परिवार के साथ इंदौर के एक बाजार में फुटपाथ पर रह रही थीं।

भारती खांडेकर, इंदौर।

इंदौर नगर निगम कमिश्नर प्रतिभा पाल ने यह पूरा मामला संज्ञान में लिया और लड़की को 1 बीएचके फ्लैट दिया। कमीशन ने यह भी व्यवस्था की कि लड़की को आगे की शिक्षा मुफ्त में मिले। टेबल, कुर्सी, किताबें, कपड़े भी प्रदान किए गए।

इन दोनों की कहानी सफलता की वो मिसाल पेश करती हैं, उन सभी बच्चों के लिए जो कठिन परिस्थितियों में रहते हुए भी हिम्मत नहीं हारते हैं।

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