Press "Enter" to skip to content

चमत्कार / HIV से ठीक होने वाले दुनिया के दूसरे व्यक्ति हैं ‘लंदन रोगी’

चित्रः एचआईवी वायरस (ग्राफिक)

दुनिया में ह्युमन इम्युनोडिफ़िशिएंसी वायरस (एचआईवी) लगभग 35 मिलियन लोगों को प्रभावित करता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार 2017 के अंत तक 21.7 मिलियन लोग एंटीरेट्रोवाइरल उपचार प्राप्त कर रहे थे। हालांकि, यह बीमारी 1980 में सामने आई और इसका कोई इलाज नहीं है।

वर्षों से, एड्स रोगियों के जीवन को बचाने के लिए नए चिकित्सा उपचार विकसित किए गए। लेकिन हालही में जब न्यूज एजेंसी रायटर को लंदन में रहने वाले एक एचआईवी रोगी ने बताया कि वो एड्स वायरस से ठीक होने वाला दुनिया का दूसरा ज्ञात वयस्क बन गया है। तो ये खबर उन लोगों के लिए उम्मीद की नई किरण बनकर आई जो एचआईवी वायरस से पीड़ित हैं।

साल 2007 में टिमोथी ब्राउन (बाद में कैंसर से मृत्यु हो चुकी है) नामक एक अमेरिकी व्यक्ति एचआईवी वायरस से ठीक होने वाला पहला ज्ञात व्यक्ति है। इसके बाद दूसरा ज्ञात व्यक्ति अब लंदन से है। उसके एंटीरेट्रोवायरल उपचार के साथ इलाज किए जाने के लगभग 18 महीने बाद, अत्यधिक संवेदनशील परीक्षणों से पिछले एचआईवी संक्रमण के कोई संकेत नहीं मिले हैं।

चित्र: प्रो. रवींद्र गुप्ता

यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन में प्रोफेसर और एचआईवी जीवविज्ञानी रवींद्र गुप्ता हैं जिन्होंने उस आदमी का इलाज डॉक्टरों की एक टीम के साथ किया, उनका कहना है, ‘हमें ऐसा कोई वायरस नहीं मिला है, जिसे हम माप सकें।’

वाशिंगटन पोस्ट के अनुसार एचआईवी से ठीक होने वाले दूसरे रोगी को स्टेम सेल प्रत्यारोपण किया गया, जिससे उसकी कोशिकाओं में एचआईवी के प्रभावी कारक कम होते गए। वे उपचार के बिना कई महीनों तक सक्रिए नहीं थे। यानी उसे प्रत्यारोपण से एचआईवी वायरस से छुटकारा मिलने में काफी मदद मिली।

यह भी पढ़ें : परीक्षा पे चर्चा 2.0 / जिंदगी का मतलब ठहराव नहीं, जिंदगी का मतलब है ‘गति’

लंदन के रोगी को 2003 में एचआईवी के बारे में पता चला और 2012 में उसे एक प्रकार के रक्त कैंसर होने का भी पता चला। हालांकि रोगी के साथ यह चमत्कारिक घटना है क्योंकि 2016 में वह बेहद दयनीय स्थिति में था। जीवित रहने के अंतिम अवसर के रूप में, डॉक्टरों ने उसके लिए स्टेम सेल प्रत्यारोपण की तलाश करने का फैसला किया। स्टेम सेल प्रत्यारोपण जोखिम भरा, जटिल और महंगा है। उन्हें केवल तभी किया जाता है यदि ऐसा करने से काफी हद तक रोगी की जिंदगी को बचाया जा सके।

चित्रः टिमोथी ब्राउन

हालांकि, इसके लिए रोगी और स्टेम सेल दाता एक आनुवांशिक मेल होना चाहिए और ऐसा बहुत कम लोगों में होता है जो स्वाभाविक रूप से CCR5 जीन की दो प्रतियां में जन्म लेते हैं।

सभी एचआईवी रोगियों पर ये उपचार सफल नहीं हो सकते हैं, कई अन्य रोगियों को जो ऐसे प्रत्यारोपण प्राप्त कर चुके हैं क्योंकि ब्राउन(एचआईवी वायरस से ठीक होने वाले पहले व्यक्ति) की सफल सर्जरी के बाद कुछ दिन बाद कैंसर से मृत्यु हो गई थी। फिलहाल नए रोगी ने खुद को गुमनाम रहने के लिए चुना है और उसे ‘लंदन रोगी’ कहा जा रहा है।

यह भी पढ़ें : योज्ञ ज्ञान / पतंजलि के योग सूत्रों को समझने का ये है सही तरीका

रोगी ने न्यूयॉर्क टाइम्स को एक ईमेल में जवाब दिया, ‘मुझे डॉक्टरों को समझने में जिम्मेदारी की भावना है कि यह कैसे हुआ ताकि वे विज्ञान का विकास कर सकें। मैंने कभी नहीं सोचा था कि मेरे जीवनकाल के दौरान कोई इलाज होगा।’

(आप हमें फेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम, लिंक्डिन और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं।)

More from उड़ानMore posts in उड़ान »

Be First to Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *