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इंसानियत / ‘कहां ले जाओगे ये सब’, बस! यही सोच कर, नौशाद ने किया ये दान

चित्र : नौशाद वायनाड की दुकान का स्टोर रूम, जहां से स्वयंसेवक दान के कपडे ले जाते हुए।

केरल के एर्नाकुलम में नौशाद वायनाड कपड़ा विक्रेता हैं। जब स्वयंसेवक उनके पास कुछ दान मांगने आए तो नौशाद ने अपने गोदाम में रखे कपड़ों का पूरा स्टॉक दान कर दिया, स्वयंसेवक केरल में आई बाढ़ के दौरान घर से बेघर हुए लोगों के लिए यह दान मांग रहे थे।

केरल में हर साल बाढ़ आती है और यहां की मौजूदा राज्य सरकार कोई ठोस कदम उठाने में विफल रही है। भारी बारिश से आए पानी के सैलाब से अब तक लगभग 2.3 लाख लोग प्रभावित हुए हैं। ये विस्थापित लोग राहत शिविर में रह रहे हैं। केरल और बाहर राज्य से आई में स्वयंसेवी संस्थाएं और एनजीओ भोजन, पानी, दवाइयां, कपड़े, सेनेटरी नैपकिन आदि वितरित कर रहे हैं साथ में वो चौबीसों घंटे काम कर रहे हैं।

स्वयंसेवकों का कहना है कि 2018 में आई बाढ़ में लोगों ने काफी मदद की, उस लिहाज से इस साल लोग कम पहुंच रहे हैं। लेकिन इन निराशाओं के बीच एक आदमी यानी नौशाद वायनाड अपने भाइयों और बहनों की ज़रूरत में मदद करने के दुकान में मौजूद सारा कपड़ा दान कर देता है, ये काबिलेतारीफ है और यह कहा जा सकता है इंसानियत अभी जिंदा है।

चित्र : नौशाद वायनाड

स्वयं सेवकों ने उन्हें अधिक कपड़े देने से रोका, लेकिन नौशाद अधिक से अधिक कपड़ों को पैकिंग बैग में लाते जा रहे थे। टाइम्स ऑफ इंडिया से नौशाद कहते हैं, ‘ईद के पहले मुझे लोगों की मदद करने का यह सौभाग्य मिला है और यह मेरी ईदी है। मैं मर गया तो ये सब साथ नहीं ले जा रहा हूं, कहां ले जाऊंगा ये सब, बस यही सोच कर मैनें ये दान किया।’

नौशाद से जो स्वयंसेवक दान लेने पहुंचे थे उनमें मलयालम अभिनेता राजेश शर्मा भी मौजूद थे। लेकिन स्टोर मालिक नौशाद को इस बात का पता नहीं था। उन्होंने सिर्फ ये सुना कि बाढ़ में अपना घर खो चुके लोगों को मदद की जरूरत है और उन्होंने अपनी दुकान में रखा सारा स्टॉक यानी कपड़े दान कर दिए।

यह उदाहरण दर्शाता है कि इंसानियत किस तरह सबसे ऊपर है और यह हम पर है कि हम अपने आस-पास उन लोगों की मदद करें जो जरूरतमंद हैं। केरल जो दो साल से लगातार जलप्रलय से जूझ रहा है उसे आपकी मदद की जरूरत है। आप या तो स्वयंसेवकों और गैर सरकारी संगठनों के माध्यम से राहत सामग्री का योगदान कर सकते हैं या मुख्यमंत्री संकट राहत कोष (सीएमडीआरएफ) को दान कर सकते हैं। आधिकारिक वेबसाइट के लिए क्लिक करें (केरल बाढ़) यहां आप शासकीय और बैंकों के नियमों का अनुकरण करते हुए दान कर सकते हैं।

इस साल आई विनाशकारी बाढ़ ने 76 लोगों की जान ले ली है और 2.3 लाख से अधिक लोग विस्थापित हो गए हैं। यह बुनियादी ढांचे और फसल नुकसान हुआ है। यह विचार करना भी जरूरी है कि प्राकृतिक आपदाओं से केरल ही नहीं देश के अन्य राज्यों में भी हर साल जन, धन की हानि हो रही है। वजह है प्रकृति में असंतुलन। इस असंतुलन को यदि समय रहते नहीं रोका गया तो चीजें भविष्य में और भी भयावह हो सकती हैं।

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