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पढ़ें और सीखें / ऐसा देश जहां गंदगी फैलाई तो जाना पड़ सकता है जेल

  • संजीव शर्मा।

भारत में स्वच्छता मिशन यानी झाडू पकड़कर फोटो खिंचवाना और बाद में भूल जाना यह आम है। लेकिन, पूर्वी अफ़्रीकी देश रवांडा में ऐसा बिल्कुल नहीं है। यहां आपने यदि गलती से भी मिस्टेक की तो 1 लाख 24 हजार फ्रेंक (रवांडा की मुद्रा) जुर्माना और 6 माह तक की जेल हो सकती है।

पिछले साल में देश के पूर्व उप राष्ट्रपति हामिद अंसारी के साथ पूर्वी अफ़्रीकी देश रवांडा गया। यह एक ऑफिशियल टूर था। वहां मैनें देखा कि हमारे देश में भले ही आज भी एक बड़ा वर्ग सरकार के स्वच्छता अभियान को बेमन से स्वीकार कर सफाई के नाम पर ढकोसला कर रहा हो, लेकिन रवांडा में सफाई ढकोसला नहीं दिनचर्या का अनिवार्य हिस्सा है और हर महीने के आखिरी शनिवार को यह साफ़ नजर भी आता है जब पूरा देश अनिवार्य रूप से साफ़-सफाई में जुट जाता है।

हर उम्र का व्यक्ति करता है सफाई

रवांडा में 18 साल से लेकर 65 साल तक के हर महिला-पुरुष को सफाई अभियान में शामिल होना अनिवार्य है वरना उसे कठोर सज़ा का सामना करना पड़ता है। यहां तक की रवांडा के राष्ट्रपति से लेकर हर खास व्यक्ति को स्वच्छता अभियान में अनिवार्य रूप से शामिल होना पड़ता है तथा वह भी तस्वीर भर खिंचाने के लिए नहीं बल्कि वास्तविक सफाई के लिए और यह रवांडा के हर गली-कूंचे की सफाई को देखकर समझा जा सकता है। यही वजह है कि रवांडा की राजधानी किगाली को अफ्रीका के सबसे साफ़-सुथरे और सुरक्षित शहर का तमगा हासिल है।

इस वजह से हो सकती है जेल

एक और बात, यहां 2008 से किसी भी तरह के प्लास्टिक बैग के इस्तेमाल पर प्रतिबन्ध है और यह कोई दिखावटी प्रतिबन्ध नहीं है बल्कि इस पर कड़ाई से अमल होता है। नियम तोड़ने वालों के लिए 150 डालर तक का जुर्माना है। रवांडा की मुद्रा यानि रवांडन फ्रेंक में यह राशि करीब 1 लाख 24 हजार फ्रेंक होती है। यह जुर्माना तो प्लास्टिक का इस्तेमाल करने वालों के लिए है, लेकिन किसी दुकानदार ने आपको प्लास्टिक के बैग में सामान दे दिया तो समझो वह गया 6 माह से लेकर एक साल तक के लिए जेल।

दुनिया का सबसे बड़ा नरसंहार

यही कारण है कि यहां मॉल से लेकर मामूली दुकान तक प्लास्टिक का कोई नामोनिशान भी नहीं मिलता और बाहर से आने वाले हम जैसे पर्यटकों को गाइड या होटल संचालक पहले ही आगाह कर देते हैं कि आप अपने साथ लाये प्लास्टिक के बैग बाहर लेकर मत निकलिए। शायद यही कारण है कि कभी दुनिया के सबसे बड़े नरसंहार (Rwandan Genocide) के लिए बदनाम यह देश आज ‘हंड्रेड्स आफ माउन्टेन्स एंड मिलियंस ऑफ स्माइल’ सैकड़ों पर्वतों और लाखों मुस्कराहटों वाला देश कहलाता है। शायद हम रवांडा से कुछ सीख पाएं!

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