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जज्बा / सतेंद्र सिंह की यह सफलता बताती है ‘असंभव कुछ भी नहीं’

Pic Courtesy: Facebook

देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में शामिल है सिविल सेवा परीक्षा और इस बार 714 रैंक के साथ, सतेंद्र सिंह परीक्षा में उत्तीर्ण होने वाले एक नेत्रहीन उम्मीदवार हैं।

उत्तर प्रदेश के अमरोहा शहर के रहने वाले, सतेंद्र का पालन-पोषण एक संयुक्त परिवार में हुआ था, लेकिन वह अप्रत्याशित परिस्थितियों के कारण जल्दी दिल्ली चले गए। एक अंग्रेजी वेबसाइट को दिए इंटरव्यू में वो बताते हैं कि कि उन्होंने कैसे सिविल सेवा की तैयारी की और कैसे एक दुखद घटना में अपने आंखें खो दीं।

गलत इंजेक्शन ने छीन ली रोशनी

आंखों की रोशनी एक तोहफा है और यदि न हो तो यह किसी त्रासदी से कम नहीं, दुनिया टूट जाती है और सिर्फ छाया रहता है तो सिर्फ अंधेरा। अपनी आंखों की रोशनी खो देने के बारे में सतेंद्र आगे बताते हैं कि, ‘जब मैं डेढ़ साल का था, तो मैं निमोनिया के कारण अस्पताल में था। मुझे वहां एक गलत इंजेक्शन दिया गया, जिससे मेरी ऑप्टिक तंत्रिका क्षतिग्रस्त हो गई थी, जिसके कारण आंखों की रोशनी चली गई।’

सेंट स्टीफन कॉलेज में बदला नजरिया

हिंदी माध्यम के सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले सतेंद्र ने कभी नहीं सोचा था कि वह देश के प्रतिष्ठित सेंट स्टीफन कॉलेज में से एक में प्रवेश कर पाएंगे। वह बताते हैं कि 2009 से 2012 तक, सतेंद्र अपने कॉलेज के जीवन एक नजरिए और अनुभव के रूप देखते हैं। वह बताते हैं, ‘जब मैं यहां आया, तो मुझे नहीं पता था कि अंग्रेजी अच्छी तरह से कैसे बोलना है और मेरे दोस्तों ने कहा कि इस तरह के संभ्रांत वातावरण में रहना मेरे लिए मुश्किल होगा। सब कुछ बहुत ही अलग था। कॉलेज से मुझे अंग्रेजी, दृष्टिकोण, सकारात्मकता, शिक्षाशास्त्र और समझ आती है। या यूं कहूं कि कॉलेज आपको कुछ बनाता है।’

UPSC की तैयारी?

सतेंद्र स्क्रीन रीडिंग सॉफ्टवेयर का उपयोग करते हुए पढ़ते हैं। उनके लिए सब कुछ वैसा ही था, जैसा कि किताबों और अखबारों में होता है। हालांकि, उनकी तैयारी समस्याओं का अपना हिस्सा लेकर आई थी। वह बताते हैं, ‘जब आप जानते हैं कि क्षण भर में आप निराश हो जाते हैं। तो आप सिर्फ चलते रहें। यही समस्याओं से जीतना का एक उपाय है।

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सतेंद्र ने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से अंतर्राष्ट्रीय संबंधों में एमए किया है। उन्होंने एमफिल भी किया और पीएचडी में दाखिला लिया। उन्होंने अपने तीसरे प्रयास में यूपीएससी की परीक्षाएं उत्तीर्ण कीं। इस तरह की कहानियां आपको विश्वास दिलाती हैं कि बाधाओं के बावजूद कड़ी मेहनत का कोई विकल्प नहीं है और सतेंदर निश्चित रूप से इसका एक प्रतीक है।

साभार: इंडिया टाइम्स

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