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ऐसा भी होता है/ स्कूल है पर शिक्षक नहीं, बच्चे जाते हैं 8 किमी दूर ‘नाव से स्कूल’

आंध्रप्रदेश के नल्लोर जिले में है पुलिकट झील और इसके नजदीक बसा है इरक्वम द्वीप। यह द्वीप पन्‍नार नदी के किनारे है। यहां स्कूल जाने के लिए बच्चों को नाव से 8 किमी का सफर तय करना होता है। बारिश के मौसम में यहां पानी इतना ज्यादा रहता है कि बच्चों को घुटने तक पानी को पार कर स्कूल जाना होता है।

इस टापू का एक छोर तमिलनाडू की सीमा को भी छूता है। इरक्वम द्वीप में दो स्कूल हैं। इरक्वम द्वीप पर एक स्कूल 1913 में बना था, लेकिन स्कूल में पढ़ाने के लिए शिक्षक नहीं है। जो बच्चे तेलगू में पढ़ना चाहते हैं, वो आंध्रप्रदेश जाते हैं और जो तमिल में पढ़ना है वो तमिलनाडू आते हैं।

आजादी के बाद भी पुल नहीं

आजादी के कई साल बाद भी यहां आज तक पर्यावरण तकनीक और वित्त समस्याओं के चलते पुल नहीं बन पाया है। तमिलनाडू में पढ़ने वाले बच्चों के लिए वहां की सरकार ने लाइफ जैकेट दिए हैं, लेकिन बहुत से ऐसे बच्चे हैं जिनके पास आज भी लाइफ जैकेट नहीं हैं।

शिक्षक यहां नहीं आते पढ़ाने

बीबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक यहां पढ़ने वाले बच्चे बताते हैं कि गांव के स्कूल में अध्यापक नहीं हैं। इसलिए उन्हें इतने दूर जाना पढ़ता है। यदि टापू पर मौजूद स्कूल में अध्यापक आ जाएं तो बच्चों को इतनी दूर स्कूल नहीं जाना पड़ेगा, लेकिन अधिकारियों का कहना है कि नियुक्ति के बाद भी कोई शिक्षक यहां पढ़ाने नहीं आते हैं। बल्कि लंबी छुट्टी लेकर चले जाते हैं। गांव वालों की मांग है कि इसी टापू पर तमिल और तेलगू दोनों भाषाओं की पढ़ाई के लिए स्कूल खोला जाए। बहरहाल, मुश्किल राहों को पार कर बेहतर भविष्य बनाने की कोशिश कैसे होती है यह सीख इरक्वम द्वीप के बच्चों से लेनी चाहिए।

खारे पानी की दूसरी सबसे बड़ी झील

इरक्वम द्वीप, पुलिकट झील के किनारे है। भारत में खारे पानी की पुलिकट झील दूसरी सबसे बड़ी झील है। बंगाल की खाड़ी के तट पर स्थित इस झील में पक्षियों को प्रजनन और भोजन का अनुकूल वातावरण है, इसलिए यहां बड़ी संख्‍या में हर साल प्रवासी जलीय पक्षियों का झुंड यहां आता है। यह देश की काफी चर्चित झील है, इसके बाद भी यहां बच्चों की शिक्षा को लेकर केंद्र और राज्य सरकार सुस्त हैं।

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