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सहायता / गवर्मेंट स्कूल के प्रिंसिपल की अनोखी पहल, हर स्टूडेंट्स को देते हैं 1000 रुपए

Picture Courtesy: The News Minute

कर्नाटक के मैंगलोर जिले मे है कोंजडी गांव और यहां रहते हैं ‘सुरेश शेट्टी’। सुरेश यहां के गवर्मेंट प्राइमरी स्कूल के प्रिंसिपल हैं, लेकिन वह दूसरे टीचर्स और प्रिंसिपल से बिल्कुल अलग हैं इसकी वजह है उनके मन में मौजूद करुणा का भाव, जो बहुत कम लोगों में होता है।

सुरेश स्कूल के उन छात्रों को 1000 रुपए देते हैं, जो बहुत ज्यादा गरीब हैं ताकि इन रुपयों से वह अपनी पढ़ाई का खर्चा उठा सकें। यह एक अनोखी पहल है। सुरेश जिस स्कूल के प्रिंसिपल है वह स्कूल उडुपी शहर से लगभग 50 किमी दूर है। सुरेश 1000 रुपए अपने वेतन में मिली राशि से देते हैं।

द न्यूज मिनट की रिपोर्ट के मुताबिक, ‘जब वह तीन साल पहले स्कूल में आए, तो कुल छात्रों की संख्या 13 थी और यह संख्या हर साल कम होती जा रही थी। तब सुरेश ने पिछले साल से प्रवेश लेने वाले प्रत्येक छात्र को 1000 रुपए पॉकेट मनी के तौर पर देना शुरु किया।’ यह स्कूल कक्षा 1 से 5 तक है और इसमें कुल 28 छात्र हैं।

55 साल के सुरेश 23 साल से शिक्षक हैं। हालांकि, शेट्टी चाहते थे कि बच्चों के माता-पिता स्कूल में शामिल होकर बच्चों की पढ़ाई के बारे में जानकारी लें। स्कूल ने पिछले 20 सालों से वार्षिक दिवस ​​भी नहीं मनाया था तब उन्होंने पहल करते हुए स्कूल अप्रैल महीने में पेरेन्ट्स टीचर मीट शुरू की है। जहां उन्होंने न केवल माता-पिता बल्कि स्थानीय निवासियों को भी आमंत्रित किया।

‘जब उनके बच्चे अच्छी तरह से शिक्षित होकर सफल हो जाएंगे, तो वे निश्चित रूप से मुझे शिक्षित करने के लिए धन्यवाद देंगे और बच्चे बुढ़ापे के दौरान अपने माता-पिता की भी देखभाल करेंगे।’

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, ‘यह पूछे जाने पर कि वह अपनी स्कूल के विकास के सरकारी धन पर भरोसा करने में असमर्थ क्यों थे? शेट्टी का कहना था, किसी भी काम को बेहतर तरह से करने के लिए धन अनिवार्य है कि तब यह राशि केवल सरकार ही खर्च क्यों करे हम सभी इस काम में अपना योगदान दे सकते हैं। इसलिए किसी भी तरह ये काम हमको ही शुरु करना था और हमने इसे सफलता पूर्वक किया भी।’

पिछले दो दशकों में सुरेश शेट्टी नानजंगूद (माईसुरु) और गोलियांगडी के स्कूलों में कार्यरत रह चुके हैं। वह बताते हैं कि जहां अभी में पदस्थ हूं वह लोअर इनकम ग्रुप एरिया है बच्चों के माता पिता गरीब हैं। जब उनके बच्चे अच्छी तरह से शिक्षित होकर सफल हो जाएंगे, तो वे निश्चित रूप से मुझे शिक्षित करने के लिए धन्यवाद देंगे और बच्चे बुढ़ापे के दौरान अपने माता-पिता की भी देखभाल करेंगे।’

तो वहीं, शेट्टी के निःस्वार्थ प्रयासों को देखते हुए स्थानीय निवासियों और दोस्तों ने उनकी मदद करना शुरू कर दी है। ये फंड दूर के स्थानों में छात्रों के लिए परिवहन सुविधा दे रहे हैं और स्टेशनरी खरीद रहे हैं।

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