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सफलता / मुश्किल कैसी भी हों, ‘हिम्मत न हारें’ ऐसा ही कुछ है हिमा का संघर्ष

असम का नौगांव जिले के कांदुलिमारी गांव में एक किसान परिवार में जन्मी 18 वर्षीय हिमा दास ने फिनलैंड में आईएएएफ विश्व अंडर-20 ऐथलेटिक्स चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतकर देशवासियों की आंख का तारा बन गई हैं।

असम सरकार ने विश्व स्तर की किसी प्रतियोगिता में चार सौ मीटर दौड़ में गोल्ड मेडल जीतने वाली पहली भारतीय हिमा दास को राज्य का ब्रांड एंबेसडर (खेल) बनाने का एलान किया है। यह घोषणा मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल ने की।

हिना की इस अंतरराष्ट्रीय कामयाबी के बाद फ़िनलैंड से लेकर पूरे हिंदुस्तान तक चर्चा है। हिमा ने 400 मीटर की दौड़ स्पर्धा में 51.46 सेकेंड का समय निकालकर स्वर्ण पदक जीता, उनके पीछे रोमानिया की एंड्रिया मिक्लोस 52.07 सेकेंड के साथ दूसरे और अमरीका की टेलर मैनसन 52.28 सेकेंड के साथ तीसरे स्थान पर रहीं।

हिमा संयुक्त परिवार से हैं। उनके घर में कुल 16 सदस्य हैं। घर की आर्थिक स्थिति ऐसी है कि बस अपने खाने-पीने की व्यवस्था हो जाती है।
उनके पिता किसान हैं, खेती करते हैं, जबकि मां घर संभालती हैं।

बीबीसी के फेसबुक लाइव में हिना की मां बताती हैं, हिमा के मेडल जीतने पर पूरे गांव भर में उत्साह है तो वहीं पिता रंजीत दास कहते हैं हिमा एक साहसी लड़की है। वो जो कहती है वो करके दिखाती है। हिमा का गांव गुवाहाटी से 100 किमी दूर है। यहां खेलों को लेकर कोई सुविधाएं नहीं हैं।

हिमा ने फिनलैंड से ट्विटर के जरिए कहा था, ‘मैं अपने परिवार की स्थिति को जानती हूं और हम कैसे संघर्ष करते हैं। लेकिन ईश्वर के पास सभी के लिए कुछ होता है। मैं सकारात्मक सोच रखती हूं और मैं जिंदगी में आगे के बारे में सोचती हूं। मैं अपने माता-पिता और देश के लिये कुछ करना चाहती हूं। लेकिन अब तक यह सपने की तरह रहा है। मैं अब विश्व जूनियर चैंपियन हूं।’

भारत की उभरती हुई ऐथलेटिक्स स्टार हिमा दास को सरकार की टारगेट ओलिंपिक पोडियम योजना के तहत 2020 तोक्यो ओलिंपिक तक आर्थिक सहायता दी जाएगी। हिमा फिनलैंड में हुई आईएएएफ अंडर 20 विश्व ऐथलेटिक्स चैंपियनशिप में 400 मीटर दौड़ में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनी। इस बात की पुष्टि स्पोटर्स इंडिया की महानिदेशक नीलम कपूर ने इसकी पुष्टि की है।

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