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जज्बा / एक सफर ऐसा जहां ‘किरण वर्मा’ ने बनाई खुद की अलग पहचान

आंध्रप्रदेश का हैदराबाद शहर, दोपहर की कड़ी धूप, जेब में 6 रुपए और खुद पर विश्वास की इस पूंजी के साथ किरण वर्मा हर रोज निकलते हैं एक सफर पर, ये सफर है लोगों की जिंदगी से जुड़ा हुआ। वह लोगों को रक्तदान के बारे में बताते हैं, उन्हें जागरुक करने के लिए हर संभव प्रयास करते हैं। किरण कहते हैं कि लोगों का विश्वास ही मेरी ताकत है, जिसके कारण में खुद को इतना तरोताजा और सकारात्मकता से भरा हुआ पाता है।

बुलंद इरादों के धनी किरण बताते हैं कि जब वह अजमेर से जयपुर जा रहे थे, तब वह एक ढावे पर रुके। उनकी मुलाकात यहां एक ऐसे व्यक्ति से हुई, जिसने उनके बारे में बीते दिन ही न्यूजपेपर में आर्टिकल पढ़ा था, जब उस व्यक्ति ने उनके बारे में अधिक जाना कि वह रक्तदान के प्रति लोगों को जागरुक कर रहे हैं तो अगले ही दिन वह व्यक्ति रक्तदान करके आया। किरण की जिंदगी में तो ऐसे कई मोढ़ आए होंगे, लेकिन यह किस्सा उनके लिए बहुत खास है।

देखी जाती है सिर्फ इंसानियत

किरण वर्मा सिंप्ली ब्लड के संस्थापक हैं, उन्होंने जनवरी 2017 में इस कंपनी की शुरूआत की थी। इसके ठीक एक साल बाद यानी 26 जनवरी, 2018 से वह रक्तदान के प्रति लोगों को जागरुक करने के सफर में निकल पड़े। उन्होंने इसकी शुरूआत श्रीनगर के लाल चौक से की। वह बताते हैं कि जब आप रक्तदान करते हैं तो जिसको वह रक्त चढ़ाया जाता है, उससे आपका इंसानियत का रिश्ता जुड़ जाता है। रक्त का कोई धर्म, जाति, राजनीति और संप्रदाय नहीं होता है। क्योंकि रक्तदान करके हम न जाने कितनी ही जिंदगियों को खत्म होने से बचा सकते हैं।

पंजाब से जुड़ी ये खास बात

जब किरण वर्मा से बात हुई उस समय वह हैदराबाद में थे। उन्होंने बताया कि वह हैदराबाद में एक ऐसी कंपनी में गए जहां 35-45 लोग काम करते थे। जब उन्होंने उन कर्मचारियों को बताया कि उनके ऑफिस के नजदीक ही चार अलग-अलग जगह पर लोगों को रक्त की जरूरत है, तब कंपनी के चार-पांच लोगों ने बिना कुछ कहे रक्तदान करने की न केवल इच्छा जाहिर की बल्कि उन्होंने हॉस्पिटल जाकर रक्तदान भी किया। किरण, भारत के 17 राज्यों में जा चुके हैं, जिनमें से हरियाणा और पंजाब में रक्तदान करने वालों की संख्या अन्य राज्यों की अपेक्षा अधिक है।

जब टीचर को किया था रक्तदान

वह बताते हैं कि पहली बार उन्होंने अपने टीचर को जरूरत पड़ने पर रक्तदान दिया था, यह सोचकर कि उन्हें मार्क्स अच्छे मिलेंगे, लेकिन टीचर के परिवार का व्यवहार देखकर उनका रक्तदान के प्रति नजरिया बदल गया। उसके बाद से वह रक्तदान करते हैं और रक्तदान से जुड़ी जानकारी लोगों को देते हैं ताकि किसी को रक्त  की जरूरत पड़े तब वह मदद कर सकें। वह लोगों को बताते हैं कि कहां रक्तदान करना है, उसकी पूरी जानकारी देते हैं। रक्त किसी गलत हाथों में न जाए इसके लिए वह हमेशा जागरुक रहते हैं। वह रक्तदान को व्यापार बना चुके दलालों से बचने के लिए लोगों को सतर्कता बरतने के बारे में बताते हैं।

ऐप के जरिए करें लोंगों की मदद

किरण की कंपनी सिंप्ली ब्लड का एक ऐप है, जिसे गूगल प्ले के जरिए डोनर्स आसानी से डाउनलोड कर सकते हैं। इस ऐप के जरिए डेटाबेस रखने के अलावा वह सबसे नजदीकी डोनर का पता भी लगा सकते हैं। इससे जरूरतमंद व्यक्ति को सीधे अपने नजदीकी डोनर के बारे में पता चल जाता है।

जिंदगी बचाने की सकारात्मक पहल

भारत में हर साल हजारों लोग खून की कमी के चलते अपनी जान गंवा देते हैं जबकि लाखों यूनिट रक्त ब्लड बैंक और अस्पतालों के बीच तालमेल न होने के कारण बर्बाद हो जाता है। ऐसे में किरण वर्मा की यह पहल कई लोगों की जिंदगियां बचाने की एक सकारात्मक कोशिश है, जिनसे कोई भी व्यक्ति जुड़कर रक्तदान जागरुकता को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचा सकता है, क्योंकि ऐसे बहुत कम लोग होते हैं, जो दूसरों के लिए अपनी जिंदगी को चुनौतियों से भरा बना लेते हैं।

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