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ई. श्रीधरन / क्या बीजेपी में 88 का आंकड़ा 75 से कम होता है?

चित्र : मेट्रोमेन ई. श्रीधरन।

मेट्रोमेन ई. श्रीधरन 21 फरवरी के दिन बीजेपी में प्रवेश करेंगे। राजनीति में उनका यह प्रवेश उनकी मर्जी से हो रहा है। उन पर किसी का कोई दबाव नहीं है। उन्होंने जब तक सरकारी नौकरी की, तब तक उनका जीवन इतना स्वच्छ रहा है कि उन्हें किसी आरोप से बचने के लिए किसी सत्तारुढ़ पार्टी की शरण में जाने की जरूरत भी नहीं है। फिर भी 88 साल की आयु में वे बीजेपी में क्यों शामिल हो रहे हैं?

उनका कहना है कि वे केरल में रहते हैं और वहां की कम्युनिस्ट सरकार ठीक से काम नहीं कर रही है। मई-जून में होने वाले प्रांतीय चुनाव में वह हारेगी। वे चुनाव भी लड़ेंगे। श्रीधरनजी से मेरा सवाल यह है कि राजनीति के कीचड़ में कूदकर क्या वे देश का ज्यादा भला कर सकेंगे?

दिग्गज बीजेपी नेता घर पर, राजनीति में 88 पार ई. श्रीधरन

उन्होंने जिन प्रदेशों में मेट्रो और रेल बनाई और नाम कमाया, उनमें क्या उस समय बीजेपी की सरकारें थीं? उनके लिए तो सभी पार्टियां बराबर हैं। वे अपने आपको किसी एक पार्टी की जंजीर में क्या जकड़ रहे हैं? वे तो सबके लिए समान रूप से सम्मानीय हैं।

वरिष्ठ पत्रकार डॉ. वेदप्रताप वैदिक बताते हैं कि उनका सम्मान देश के किसी भी नेता से कम नहीं है। देश और दुनिया के कई बड़े से बड़े नेताओं को हमने कुर्सी छोड़ते ही इतिहास के कूड़ेदान में पड़े पाया है।

श्रीधरन जैसे लोग यदि उनकी श्रेणी में शुमार होने लगें तो हमें अफसोस ही होगा। इससे बड़ा सवाल यह है कि भाजपा को यह कौन-सा ताजा बुखार चढ़ा है? लालकृष्ण आडवाणी, मुरलीमनोहर जोशी, शांताकुमार, सुमित्रा महाजन जैसे निष्कलंक और दिग्गज बीजेपी नेताओं को तो आपने घर बिठा दिया है, क्योंकि वे 75 साल से ज्यादा के हैं तो क्या 88 का आंकड़ा 75 से कम होता है? श्रीधरन के कंधे पर सवार बीजेपी को केरल में वोट तो ज्यादा जरुर मिलेंगे लेकिन उनका कद छोटा हो जाएगा। एक राष्ट्रीय धरोहर, पार्टी-पूंजी बन जाएगी।

राष्ट्रहित में कर रहा हूं पार्टी ज्वाइन – ई. श्रीधरन

एक हिंदी दैनिक अखबार को दिए इंटरव्यू में ई. श्रीधरन कहते हैं कि मैं सत्ता का भूखा नहीं हूं। जीवनभर राष्ट्रनिर्माण के लिए निरंतर काम किया है। अब भी यही करना चाहता हूं। बची जिंदगी राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी की विचारधारा को मजबूत करने के लिए समर्पित करना चाहता हूं। रही बात चुनाव की, पार्टी कहेगी तो किसी भी जगह से लड़ने के लिए तैयार हूं। हालांकि मेरी प्राथमिकता मेरा गृहक्षेत्र मल्लापुरम ही होगा।

ई श्रीधरन कहते हैं कि वो राष्ट्रहित में पार्टी ज्वाइन कर रहे हैं। उनका मानना है कि आज भारत के विरोध में काम कर रही ताकतें भारत की छवि दुनिया में धूमिल करने की मुहिम चला रही हैं। दुर्भाग्य से देश की विपक्षी पार्टियों ने भी इस मुहिम को समर्थन दे रखा है। हालांकि ये उनका निजी मत है।

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