Press "Enter" to skip to content

कुपोषण / ‘मप्र में मुफ्त अनाज वितरण’, गुना में बच्चे की भूख से मौत?

प्रतीकात्मक चित्र।

कोविड 19 महामारी के दौरान, मध्यप्रदेश में गरीबी और भूख मिटाने के लिए राज्य सरकार ने कई योजनाएं शुरू कीं। इनका लाभ किन्हें मिल रहा है, इस बारे में खाद्य विभाग भी बयान जारी कर चुका है। उनका कहना था कि ऐसे कई बीपीएल कार्ड धारक हैं जिनकी मौत हो चुकी है और उनको भी राशन दिया जा रहा।

जाहिरतौर पर सिस्टम में काफी खामियां हैं और जब-तक ये खामियां ठीक नहीं होती तब-तक बंदरबाट होती रहेगी। ऐसे कई मामले सामने आए हैं कि लोग संभ्रांत होने के बावजूद बीपीएल कार्ड धारक है, बीते दिनों जब टीएफटी ने खाद्य विभाग से इस विषय में जानकारी मांगी गई तो उनकी ओर से कोई उत्तर नहीं मिला।

मामला यहीं खत्म नहीं होता विकास के बड़े-बड़े वायदों के बीच, भूख और गरीबी को रोकने में टैक्स पेड जनता का पैसा खर्च करने के बावजूद राज्य सरकार नाकाम रही हैं। हालही में गुना में एक श्रमिक दंपत्ति के छोटे-से बच्चे ने भूख के कारण दम तोड़ दिया। मामला स्थानीय स्तर पर ज्यादा गंभीर नहीं बन पाया कारण आप जानते हैं।

यह आलम अकेले मप्र तक ही सीमित नहीं हैं। बीते साल झारखंड में भूख के कारण कई बच्चों की मौत हुई ऐसी कई मीडिया रिपोर्ट्स आज भी इंटरनेट पर मौजूद हैं। इतना ही नहीं, राजधानी दिल्ली जहां छोटी सी बात को बहुत बड़ा बना दिया जाता है वहां आज से दो साल पहले जब 3 लड़कियों की मौत भूख से हुई तो यह चर्चा का विषय तक नहीं बना।

भारत में कुपोषण के कारण झारखंड और ओडिशा का नाम आता है लेकिन मप्र, बिहार और कुछ सुदूरवर्ती राज्य कुपोषण से अछूते नहीं हैं। यहां भूख और गरीबी मिटाने की कई योजनाएं हैं, लेकिन ये कागजी योजनाएं मुश्किल से 10 प्रतिशत ही ईमानदारी से लागू होती हैं, जहां होती हैं वहां अच्छा, स्वस्थ्य अन्न नहीं दिया जाता है।

पिछले साल ग्लोबल हंगर इंडेक्स (जीएचआई, 2019) में भारत 117 देशों की सूची में 102 नंबर पर रहा और पता चला कि उसकी रैंकिंग श्रीलंका, नेपाल, बांग्लादेश और पाकिस्तान से भी खराब है।

सीएसई के शोध में पिछले दो दशकों के ग्लोबल हंगर इंडेक्स का विश्लेषण किया गया जिसमें पाया गया कि भूख को मिटाने की दिशा में भारत ने पिछले 20 साल में अपने स्कोर में केवल 21.9% सुधार किया जबकि इसी दौर में उसके पड़ोसी नेपाल का स्कोर 43.5%, पाकिस्तान का स्कोर 25.6% और बांग्लादेश का स्कोर 28.5% सुधरा. अफ्रीकी देश इथियोपिया ने अपने स्कोर में 48% से अधिक सुधार किया तो लैटिन अमेरिकी देश ब्राजील का स्कोर 55% से ज्यादा बेहतर हुआ।

भारत की अर्थव्यवस्था का आकार 1991 से अब तक दोगुना हो गया है. पिछले 45 सालों से देश में आंगनबाड़ी कार्यक्रम भी चल रहा है लेकिन भुखमरी और कुपोषण के आंकड़ों में विरोधाभास दिखता है। अर्थशास्त्री दीपा सिन्हा कहती हैं, ‘अगर आप भारत को दक्षिण एशिया के देशों के बीच देखें और तुलना करें तो पता चलता है कि आर्थिक तरक्की के मामले में हम आसपास के देशों से बेहतर हैं लेकिन भूख और कुपोषण के मामले में बांग्लादेश, नेपाल, श्रीलंका और पाकिस्तान से भी नीचे हैं’

पिछले साल अक्टूबर में संयुक्त राष्ट्र ने भी कहा था कि भारत को कुपोषण के खिलाफ सुधार तेज करना होगा. यूएन वर्ल्ड फूड प्रोग्राम के प्रतिनिधि बिशो पाराजुली ने कहा कि जहां पिछले 2 दशक में गरीबी मिटाने, आर्थिक विकास दर बढ़ाने और खाद्य सुरक्षा में भारत ने तरक्की की है वहीं कुपोषण की दर में भी गिरावट हुई है।  

(आप हमें फेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम, लिंक्डिन और यूट्यूब  पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं।)

More from सोशल हलचलMore posts in सोशल हलचल »

Be First to Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *