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चीन से ग्राउंड रिपोर्ट / सतर्क है चीन, लॉकडाउन के बाद लागू किया 14+14 नियम

  • अखिल पाराशर, लेखक चीन के बीजिंग शहर में रहते हैं वो चाइना मीडिया ग्रुप में वरिष्ठ पत्रकार हैं।

चीन कोविड-19 महामारी के सबसे कठिन दौर से गुजर चुका है। उसने संयम, अनुशासन और दृढ़ संकल्प का परिचय देते हुए अपने देश में महामारी पर काबू पाया है। अब चीन में कोरोना के मामले और इससे होने वाली मौतें थमने लगी हैं, लेकिन एहतियाती कदमों का पालन करना अभी भी जारी रखे हुए है। उसे मालूम है कि अगर थोड़ी बहुत भी ढील बरती जाएगी तो यह जानलेवा महामारी फिर से वापिस आ जाएगी। यह हमने साल 2002-03 में सार्स के समय देखा था कि किस तरह सार्स दोबारा लौटकर आया था।

इस समय चीन का ध्यान अब सिर्फ दो बातों पर सबसे ज्यादा है। पहला, निरोगी लोगों की स्थिति जानना, और दूसरा, पुराना दौर नहीं लौटे इसलिए उचित उपायों पर अमल करना। लोग सोशल डिस्टेंस और स्वच्छता के नियमों का पूरा पालन कर रहे हैं। जगह-जगह पर तापामान चेक होता है, और समय-समय पर हर जरुरी हिदायतें दी जाती हैं। चीन इस समय वायरस के फैलाव को रोकने के लिए फूंक-फूंक कर कदम रख रहा है।

चीन में कोरोना महामारी के खतरे पर नज़र रखने और संपर्क की जांच के लिए इस तरह की व्यवस्था की गई है कि किसी सार्वजनिक जगहों पर जाने में, उदाहरण के तौर पर बस या ट्रेन में यात्रा करने या स्कूल जाने पर प्रवेश द्वार पर ही आपको मोबाइल फोन से एक क्यूआर कोड स्कैन करना होगा, स्कैन करने पर अगर मोबाइल पर ग्रीन कोड आता है, तो इसका मतलब कि आप स्वस्थ हैं और आपको जाने दिया जाएगा।

अगर ओरेंज कोड आता है, तो इसका मतलब है कि उस व्यक्ति को एकांतवास में रहना होगा। अगर रेड कोड आता है, तो इसका मतलब है कि या तो वो व्यक्ति वायरस से संक्रमित है या फिर वो किसी कोरोना मरीज के संपर्क में आया है। सच में, खतरे को कम करने के लिए तकनीक का भी अच्छा उपयोग हो रहा है।

इसके अलावा, चीन के शंघाई, पेइचिंग, नानचिंग समेत 10 शहरों में न्यूक्लिक एसिड टेस्ट किए जा रहे हैं। शंघाई से इसकी शुरुआत हुई और इसे अनिवार्य कर दिया गया है। इसमें गले के स्वाब के सैंपल लिए जाते हैं। महज 24 घंटे में इस टेस्ट के नतीजे आते हैं। इस टेस्ट से वायरस के आरएनए का पता लगाते हैं। आमतौर पर सैंपल सांस के रास्ते से इकट्ठा किया जाता है। इसमें लार का मिश्रण होता है।

मध्य चीन के हुपेइ प्रांत के वुहान में, जहां करीब 76 दिनों का लॉकडाउन लगा रहा, अब वहां 14+14 नियम का पालन किया जा रहा है। इसका मतलब यह है कि ठीक होने वाले मरीज पहले चिकित्सा केंद्र में 14 दिन के लिए एकांतवास में रहेंगे और इतने समय के बाद अगर उनकी रिपोर्ट नकारात्मक आती है तो उन्हें घर में 14 दिन के लिए अलग रखा जाएगा। वुहान में कोरोना की रोकथाम के लिए पारंपरिक पद्धतियों का भी इस्तेमाल हो रहा है।

चीन के कई शहरों में स्कूल भी खुलने लगे हैं। महामारी के फैलने की वजह से जनवरी से सभी स्कूल और कॉलेज बंद कर दिए गए थे, लेकिन अब कोरोना का खतरा कम होने पर धीरे-धीरे स्कूल और कॉलेज खोले जा रहे हैं।

बीजिंग, शंघाई जैसे बड़े शहरों में बड़ी कक्षाओं के छात्रों के लिए स्कूल खुल चुके हैं। शंघाई में मीडिल और हाई स्कूल के छात्रों ने फिर से स्कूल जाना शुरू कर दिया है। इसके अलावा, अब वुहान ने भी स्कूल खोलने की तैयारी कर ली है। वुहान में 8 मई से स्कूल खुल जाएंगे।

स्कूलों में छात्रों को सोशल डिस्टेंस और स्वच्छता के नियमों का पूरा पालन करना होता है। स्कूल में एंट्री के वक्त और नियमित अंतराल पर छात्रों का तापमान चेक होता है। स्कूल के गेट पर छात्रों को अपने मोबाइल फोन में विशेष एप्प पर मिले ग्रीन कोड को दिखाना होता है, जिसके बाद ही उन्हें स्कूल में एंट्री और क्लास में बैठने की इजाजत मिलती है। इसके जरिए पता चलता है कि उस छात्र से कोरोना संक्रमण का खतरा है या नहीं।

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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण) : इस आलेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं। इस आलेख में दी गई किसी भी सूचना की सटीकता, संपूर्णता, व्यावहारिकता अथवा सच्चाई के प्रति द फीचर टाइम्स उत्तरदायी नहीं है। इस आलेख में सभी सूचनाएं ज्यों की त्यों प्रस्तुत की गई हैं। इस आलेख में दी गई कोई भी सूचना, तथ्य अथवा व्यक्त किए गए विचार द फीचर टाइम्स के नहीं हैं, तथा द फीचर टाइम्स उनके लिए किसी भी प्रकार से उत्तरदायी नहीं है।

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