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राष्ट्रीय संकट / वैक्सीन की कमी, लेकिन मप्र में 18+ ‘कोरोना वैक्सीनेशन’ शुरू

प्रतीकात्मक चित्र।

मध्यप्रदेश में 05 मई से 18+ से 44 साल की उम्र तक के युवाओं का कोरोना वैक्सीनेशन शुरू हो गया। वैक्सीनेशन अन्य राज्यों में भी जारी है लेकिन मप्र के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने काफी हद तक स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने में हर संभव प्रयास कर रहे हैं। हालांकि मौत अभी भी हो रही हैं, ऑक्सीजन की कमी अभी भी है लेकिन अन्य राज्यों की तुलना में यहां स्थितियां काबू में करने का प्रयास राज्य सरकार कर रही है।

कई राज्य सरकारें, जिसमे भारतीय जनता पार्टी शासित सरकारें भी शामिल हैं, यह पहले ही कह चुकी हैं कि उनके पास 18 साल से ऊपर के लोगों को लगाने के लिए पर्याप्त वैक्सीन नहीं है, लेकिन वेक्सीनेशन की शुरूआत कर कुछ राज्य कोरोना से लोगों को सुरक्षित रखने के प्रयास में जुट गए हैं।

ऐसे कई मामले सामने आए हैं जहां कोविन प्लेटफार्म पर टीके के लिए रजिस्टर करने के बाद भी 18 से 44 साल के आयु वर्ग के लोगों को वैक्सीन लगवाने के लिए समय नहीं मिल पा रहा। वहीं दूसरी ओर निजी अस्पताल वैक्सीन लगाने के लिए लोगों से 900 से 1250 रूपए तक वसूल रहे हैं लेकिन वैक्सीन की कमी के कारण ये निजी अस्पताल भी कम ही संख्या में टीकाकरण कर पा रहे हैं।

भारत में इस समय कोरोना वैक्सीन की जरूरत उन लोगों के लिए सबसे ज्यादा है जिन्हें कोरोना है या कोरोना के संक्रमण हैं। कोरोना की वैक्सीन आसानी से उन्हें उपलब्ध भी नहीं हो पा रही है ऐसे में वो सभी जिंदगी और मौत की जद्दोजहद के बीच हैं। इन विषम परिस्थितियों में एक बड़े स्तर पर 18+ स्वस्थ्य लोगों का वैक्सीनेशन कुछ समय तक रोका जा सकता था?

तीसरी लहर का आना तय

केंद्र सरकार के प्रमुख वैज्ञानिक सलाहकार के. विजयराघवन ने प्रेस कांफ्रेंस में ने कहा कि कोरोना की तीसरी लहर का आना तय है। उन्होंने कहा कि जिस तरह से कोरोना संक्रमण बढ़ रहा है उसे देखते हुए ये कहा जा सकता है कि तीसरी लहर आएगी लेकिन यह स्पष्ट नहीं कहा जा सकता है कि यह कितनी खतरनाक होगी और कब आएगी।

उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि हमें तीसरी लहर के लिए तैयार रहना चाहिए। नए वैरिएंट्स भी ओरिजिनल वैरिएंट की तरह ही संक्रामक है। इनमें संक्रमण की नई तरह की कोई क्षमता नहीं है। वैक्सीनेशन कोरोना के इस नए वेरिएंट के ख़िलाफ असरदार है। कोरोना का नया वेरिएंट पूरी दुनिया में पैदा होगा और भारत में भी लेकिन जिस वेरिएंट के कारण संक्रमण बढ़ रहा है वो कम भी होगा।

…तो क्या भारत में लॉकडाउन फिर लगेगा?

नीति आयोग के सदस्य डॉ. वीके पॉल ने लॉकडाउन की संभावना से जुड़े एक सवाल के जवाब में कहा है कि अगर कोरोना संक्रमण की स्थिति पर काबू पाने के लिए कुछ और भी जरूरी हुआ तो उन विषयों पर चर्चा ज़रूर की जाएगी। डॉ. पॉल ने कहा कि राज्यों को पहले से ही सख़्त दिशानिर्देश जारी किए जा चुके हैं ताकि संक्रमण की चेन को तोड़ा जा सके। संक्रमण अगर और अधिक होता है तो संक्रमण की चेन को तोड़ने के लिए जो भी दूसरे विकल्प हैं, उन पर जरूर गौर किया जाएगा।

हमने स्वास्थ्य में कम निवेश किया

भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा है कि यह दूसरी लहर आग का परीक्षण है, जिससे हमें गुजरना है, लेकिन आर्थिक आधार मजबूत हैं। हम सुधार प्रक्रिया को आगे बढ़ाएंगे। उन्होंने यह बात G-7 के विदेश और विकास मंत्रियों की बैठक में कहीं। दरअसल, दुनिया भर के देशों से कूटनीति में एकजुटता की भावना के रूप में भारी सद्भावना का स्वागत किया।

उन्होंने देश के हेल्थकेयर इन्फ्रास्ट्रक्चर के संदर्भ में, स्वीकार किया कि हेल्थकेयर सिस्टम का विस्तार हुआ है यह बहुत स्पष्ट है कि 75 वर्षों के लिए, हमने स्वास्थ्य में कम निवेश किया है। हालांकि भारत सरकार द्वारा स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत जैसे योजना पर जोर दिया जा रहा है।

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