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समस्या / पृथ्वी पर 40 साल में 60% कम हो गए ये वन्यजीव, क्या है वजह

ग्लोबल वार्मिंग पृथ्वी पर रहने वाले जीवों के लिए उस बुरे सपने की तरह है, जो आने वाले दिनों में हमारे सामने कई समस्याएं लेकर आएगा। विशेषज्ञों का कहना है कि हमें वैश्विक सौदे से अधिक पेरिस समझौते की आवश्यकता है, नहीं तो हम बर्बाद हो जाएंगे।

तो वहीं, डब्ल्यूडब्ल्यूएफ ने ‘लिविंग प्लैनेट रिपोर्ट’ में बताया गया है कि पिछले 40 साल में स्तनधारियों, पक्षियों, सरीसृप, उभयचर और मछली की आबादी में 60 प्रतिशत की औसत कमी दर्ज की गई है। ऐसे में हमें अपने ग्रह को बचाने के लिए गंभीरता से पुनर्विचार करने की आवश्यकता है, और विलुप्त होने की कगार पर खड़ी प्रजातियों के संरक्षण, प्रकृति भंडार और संरक्षण कार्यक्रमों को अधिक से अधिक लागू करना होगा।

हम इन सभी वन्यजीव प्रजातियों को खो रहे हैं? बेशक इसका कारण हम यानी मानव ही हैं क्योंकि हम ही प्राकृतिक संसाधनों का अत्यधिक उत्खनन कर रहे हैं, इंसान आज अपने जीवन की स्थिरता के बजाय ज्यादा से ज्यादा लाभ की तलाश में हैं। डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के कार्यकारी निदेशक टोनी जूनिपर ने द इंडिपेंडेंट को बताया, ‘प्रकृति का विनाश, विकास की कीमत के रूप में देखा जा रहा है, और हम इस तरह ज्यादा समय तक जिंदा नहीं रह पाएंगे, हमें एक्शन लेना होगा।’

हाथी, राइनो और ध्रुवीय भालू की प्रजातियां पहले से ही लुप्तप्राय सूची में हैं, लेकिन डब्ल्यूडब्ल्यूएफ का कहना है कि हेजहोग और पफिन जैसे और भी सामान्य जीव अब विलुप्त होने की कगार पर हैं। डब्ल्यूडब्ल्यूएफ की चीफ एक्जीक्यूटिव तान्या कहती हैं, ‘हम पहली पीढ़ी हैं। हम यह यानी इंसान जानते हैं कि हम अपने ग्रह को नष्ट कर रहे हैं और हम ही वो आखिरी व्यक्ति हैं जो इसके बारे में कुछ भी कर सकते हैं यानी हम ग्लोवल वार्मिंग को कंट्रोल कर सकते हैं।’

विशेषज्ञों का सुझाव है कि हमें दुनिया को बचाने के लिए एक नया रास्ता बनाने की जरूरत है, और यह पहला कदम वैश्विक जलवायु समझौते के लिए एक साथ आने के साथ है। पेरिस समझौते में न केवल प्रदूषण को कम करने और वैश्विक तापमान में वृद्धि को रोकने की मांग की, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि हमें उससे अधिक गहन उपायों की आवश्यकता है। वर्तमान में हमें अपनी जैव विविधता को संरक्षित करने, कार्बन उत्सर्जन को कम करने और सतत विकास को बढ़ावा देने की आवश्यकता है।

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