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रिपोर्ट / कोई था महंगे पानी से परेशान, तो कोई 9 साल से कर रहा ये काम

Picture Courtesy: Twitter

मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले और अन्य क्षेत्रों में 15 आदिवासी महिलाओं का एक समूह काम करता है। यह सभी महिलाएं खराब हेंडपंप की मरम्मत करवाने का कार्य करती हैं। इस काम के चलते उन्हें अब लोग ‘हैंडपंप वाली चाची’ के नाम से जानते हैं।

ये महिलाएं पिछले 9 सालों से हेंडपंप, ट्यूबवेल और कुओं की मरम्मत का काम करती हैं। जनजातीय महिलाएं एएनआई को बताती हैं, ‘यहां पानी की समस्या है इसलिए हम गांव वालों के लिए हेंडपंप की मरम्मत करवाते हैं। हमारी टीम की सभी मरम्मत कार्य के लिए एक साथ जाती हैं। हम पिछले 9 सालों से अकेले काम कर रहे हैं और किसी भी राज्य के किसी भी अधिकारी ने हमारी मदद नहीं की है। हमारे पास यात्रा करने का कोई साधन नहीं है इसलिए हम पैदल ही यात्रा करते हैं।

Courtesy: InUth

पानी था महंगा तब प्राइवेट कंपनी ने की मदद

गुजरात के खेड़ा जिले में है ढूंडी गांव जहां कभी किसान पानी के लिए डीजल इंजन पर निर्भर रहा करते थे और इससे सिंचाई करना काफी महंगा भी पड़ता था। लेकिन बीते दो सालों से यहां सोलर पावर प्लांट लग जाने से काफी बदलाव आया है।

द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक यहां के किसान सोलर पावर प्लांट के जरिए सिंचाई करते हैं और बाकी बची बिजली को मध्य गुजरात विज लिमिटेड को बेच देते हैं। यहां ऐसे लगभग 450 किसान ऐसे हैं जो आधे कीमत पर पानी खरीदते हैं। अब 50 फीसदी खेतों की सिंचाई सोलर प्लांट के जरिए ही होती है। गांव में कई सारे सोलर उद्यमी बन गए हैं।

कुछ किसान अतिरिक्त बिजली को 7 रुपए प्रति यूनिट में बेचते हैं। हर दिन वे लगभग 50-60 किलोवॉट सोलर पैनल से उत्पादित बिजली बेच देते हैं।

अधिकतर किसानों ने लोन लेकर सोलर प्लांट लगवाया था। उन्होंने अब आमदनी होने के बाद अपना लोन भी चुका दिया है। गांव के किसान सिर्फ पानी और बिजली बेचकर ही 30,000 रुपए से लेकर 1,30,000 रुपए कमा रहे हैं। यह सोलर प्लांट  2016 में इंटरनेशनल वॉटर मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट द्वारा स्थापित किया गया था। सोलर पैनल लग जाने से किसान आत्मनिर्भर बन गए हैं।

साफ जल और स्वच्छता एक गंभीर मुद्दा

वॉटरएड इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत में कुल जनसंख्या के 44 प्रतिशत लोग अभी भी खुले में टॉयलेट जाते हैं। तो वहीं, वॉटर आर्गनाइजेशन की रिपोर्ट कहती है कि 1 अरब से ज्यादा लोगों का देश भारत, दुनिया का दूसरा सबसे अधिक आबादी वाला देश है। भारत की आबादी का आधा हिस्सा, यानी 522 मिलियन, खुले में शौच करते हैं।

विश्व बैंक का अनुमान है कि भारत में 21 प्रतिशत संक्रमणीय बीमारियां असुरक्षित पानी और स्वच्छता की कमी से होती हैं। इसके अलावा, पांच साल से कम उम्र के 500 से अधिक बच्चे अकेले भारत में दस्त से मर जाते हैं।

भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और यहां 1.3 अरब से अधिक लोग 29 राज्यों और 7 केंद्र शासित प्रदेशों में रहते हैं। हिमालय से मुख्य भूमि एशिया से अलग, देश पूर्व में बंगाल की खाड़ी, पश्चिम में अरब सागर और दक्षिण में हिंद महासागर से घिरा हुआ है। भारत महान सांस्कृतिक, धार्मिक और भाषाई विविधता का देश है।

भारत में जल और स्वच्छता का स्तर

जल और स्वच्छता का स्तर भारत में अभी काफी कम है। रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार साफ जल और स्वच्छता के सटीक आंकड़ें प्रदर्शित नहीं करती है। देश भर में, जिलों के बीच सुरक्षित पानी और स्वच्छता तक पहुंच में व्यापक असमानता है।

लेकिन भारत के गांव में तो हालात ओर भी ज्यादा खराब हैं। ब्रूट इंडिया की यह वीडियो रिपोर्ट बताती है कि मध्यप्रदेश के डिंडौरी जिले में पीने के पानी के लिए कितना संघर्ष करना पड़ रहा है।

 

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