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इंटरव्यू / चीन में वुहान इंस्टीट्यूट की प्रमुख का ‘कोविड 19’ के बारे में बड़ा खुलासा

चित्र : चाइना मीडिया ग्रुप/वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी की प्रमुख महामारीविद् शी चंगली।

नोवल कोरोनो वायरस महामारी, जिसे कोविड-19 के रूप से भी जाना जाता है, जब से दुनिया में फैली है, तब से सभी का निगाहें वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी पर आकर रुक सी गई हैं। कोरोना वायरस ने अब तक वैश्विक स्तर पर 50 लाख से अधिक लोगों को संक्रमित किया है और करीब साढ़े 3 लाख अपनी जान गंवा चुके हैं। इस कोरोना की वजह से दुनिया भर में लॉकडाउन, अर्थव्यवस्थाओं की हालात खराब कर दी है।

पिछले साल दिसंबर में कोरोना का पहला मामला सामने आया था, तब से वैज्ञानिक वायरस के उद्गम का पता लगाने लगे, ताकि वैक्सीन तैयार किया जा सके। इस बीच, साजिश के तहत दोषारोपण के खेल शुरु हो गया, और यह शक जताया जाने लगा कि यह चीन के वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी से ‘लीक’ हुआ है। जबकि वैज्ञानिकों का मानना है कि यह वायरस प्रकृति में पैदा हुआ है, ना कि मानव-निर्मित है।

चाइना मीडिया ग्रुप के चीनी राष्ट्रीय टीवी चैनल सीजीटीएन (जो कि द फीचर टाइम्स का सहयोगी है) ने इस बारे में वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी की प्रमुख महामारीविद् शी चंगली से ख़ास बातचीत की, जिसमें उन्होंने साफ तौर पर कहा, ‘यह एक नए तरह का वायरस है और यह जानवर से पैदा हुआ है।’

इंस्टीट्यूट ने वायरस के जीनोम अनुक्रम का पता लगाया

शी चंगली बताती हैं, ‘इंस्टीट्यूट ने वायरस के जीनोम अनुक्रम का पता लगाने के बाद 12 जनवरी, 2020 को विश्व स्वास्थ्य संगठन को सौंप दिए थे। उसी समय, उन्होंने रोगजनक की पहचान करने और वैक्सीन बनाने के लिए को भी दुनिया भर की सरकारों और वैज्ञानिकों के लिए जीआईएसएआईडी नामक एक जीन लाइब्रेरी में अन्य अनुक्रमों को भी अपलोड कर दिए थे।’

साल 2004 में चमगादड़ कोरोना वायरस का अध्ययन करना शुरू किया

उन्होंने बताया, ‘कोरोना महामारी के फैलने बाद उनके वैज्ञानिक दल ने बहुत ही कम समय में, एक साथ रोगजनक अलगाव, जीनोम अनुक्रमण और पशु संक्रमण प्रयोग किए, और बिना किसी देरी के इन सभी कामों को पूरा किया। हमने वास्तव में साल 2004 में चमगादड़ कोरोना वायरस का अध्ययन करना शुरू कर दिया था। 15 साल बाद, हमारे दल ने बड़ी संख्या में सामग्री, प्रौद्योगिकी, विधियों और अनुसंधान मंचों को इकट्ठा किया है।’

हम कोविड 19 संक्रामक रोग की सीमा नहीं जानते है

दल में कई प्रतिभाशाली व्यक्ति भी शामिल हुए हैं, इस तरह बहुत कम समय में अस्पष्टीकृत निमोनिया के कारण को समझने में सक्षम हुए हैं। शी चंगली ने यह भी कहा कि उनका अंतरराष्ट्रीय सहयोग का मूल लक्ष्य दुनिया भर के सभी लोगों के स्वास्थ्य की सेवा करना है क्योंकि फैलने वाले कोविड 19 संक्रामक रोग की सीमा नहीं जानते हैं।

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