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भ्रमनीति / गृहमंत्री अमित शाह ने साफ कहा है, ‘वे पीछे नहीं हटेंगे’

  • डॉ. वेदप्रताप वैदिक।

एक तरफ डोनाल्ड ट्रंप और इमरान दावोस में मिल रहे हैं और ट्रंप कह रहे हैं कि आप चाहें तो मैं कश्मीर के मामले में मध्यस्थता करुं? मोदी और ट्रंप की घनिष्टता से कौन परिचित नहीं है? उन्होंने मोदी को ‘भारत का पिताजी’ कहा था। ट्रंप ने मोदी के सामने भी कश्मीर पर मध्यस्थता का प्रस्ताव रखा था।

इधर अटलजी के सलाहकार सुधींद्र कुलकर्णी अभी पाकिस्तान से लौटे हैं। उन्होंने बताया कि उनकी कई फौजियों, नेताओं, विद्वानों और सामाजिक कार्यकर्ताओं से बात हुई। उनका मूल्यांकन यह था कि पाकिस्तान खुद आतंकवाद से बहुत तंग आ चुका है। वहां की जनता, नेता और फौज भी चाहती है कि कश्मीर का मसला बातचीत से हल किया जाए। यों भी पाकिस्तान से आ रही खबरें काफी चिंताजनक हैं।

अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संगठन तो डंडा लेकर उसके पीछे पड़ा ही है लेकिन मंहगाई लोगों का दम निकाल रही है। गेहूं का आटा 70 रु. किलो हो गया है। तंदूर की रोटी के दाम डेढ़े हो गए हैं। सब्जी और गोश्त के दाम भी आसमान छू रहे हैं। इमरान खान प्रधानमंत्री तो बन गए लेकिन सिर मुंडाते ही उन पर ओले पड़ रहे हैं।

उनके मंत्री और पार्टी-नेता चाहे जो भी भारत-विरोधी बयान देते रहें, स्वयं इमरान भारत-पाक संबंधों को बेहतर बनाने के इच्छुक दिखाई पड़ते हैं लेकिन भारत सरकार खुद एक बड़ी मुसीबत में फंसी हुई है। उसने अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश से आनेवाले शरणार्थियों में से मुसलमानों का नाम निकालकर भारत के सारे विरोधियों को एक कर दिया है।

अपनी अंतरराष्ट्रीय छवि भी धूमिल कर ली है। भारत के परम मित्र राष्ट्र भी उसकी आलोचना कर रहे हैं। इस नए नागरिकता कानून से हमारे मुसलमानों को कोई नुकसान नहीं है और भारत को कोई फायदा नहीं है। यह एक फर्जी मामला है, जिसने असली मामले से ज्यादा कोहराम मचा रखा है। भाजपा के स्वयंभू नेता सोचते हैं कि इससे हिंदू वोटों का ध्रुवीकरण उनके पक्ष में हो जाएगा।

वे भूलते हैं कि 2019 में उन्हें सिर्फ 37 प्रतिशत वोट मिला है। 60-65 प्रतिशत वोट क्या इसलिए उनके पक्ष में हो जाएगा कि वे पाकिस्तान और मुसलमानों के विरोध में हैं? पाकिस्तान और मुसलमान 2024 में भाजपा को नहीं जिता सकते लेकिन तब तक के लिए उनसे भाजपा के संबंध ठीक होने की भी उम्मीद कैसे की जाए? गृहमंत्री अमित शाह ने लखनऊ में साफ-साफ कह दिया है कि वे पीछे नहीं हटेंगे।

  • लेखक, राजनीतिक विश्लेषक, अंतरराष्ट्रीय मामलों के स्तंभकार हैं। वह भारतीय विदेश नीति परिषद और भारतीय भाषा सम्मेलन के अध्यक्ष हैं।

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