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सादगी / मिसाल हैं ये नेता, कभी बनाते हैं खाना तो कभी करते हैं खेती

भारत में महात्मा गांधी सहित ऐसे कई नेता थे, जिन्होंने ‘सादा जीवन उच्च विचार’ का नजरिया अपनाते हुए राजनीतिक यात्रा पूरी की। उनके इन विचारों की झलक आज भी कुछ नेताओं में देखने को मिलती है।

इस फेहरिस्त में सबसे पहला नाम आता है देश की रक्षामंत्री निर्मला सीतारमण का। अक्सर उनके सादगी भरे फोटो और वीडियो सोशल मीडिया में देखे जा सकते हैं। कभी वह किसी रेस्टोरेंट में जाकर आम जनता के साथ भोजन करती हैं तो कभी पार्टी कार्यकर्ता के घर सादगी से जमीन पर बैठक भोजन करती हैं।

खाना बनाने का भी है तजुर्बा

ज्योतिरादित्य सिंधिया मप्र के गुना-शिवपुरी संसदीय क्षेत्र के सांसद हैं। वह शाही परिवार से ताल्लुक रखते हैं। वह अपने संसदीय क्षेत्र में जाकर लोगों की समस्याएं सुनते हैं, उनके घर लंच या डिनर करते हैं और कभी-कभी खुद भी खाना बनाने में हाथ आजमाते देखे गए हैं। ज्योतिरादित्य सिंधिया ने क्षेत्र के विकास में काफी योगदान दिया है। वह युवा जननेता हैं।

तो वहीं, बीकानेर से सांसद अर्जुन राम मेघवाल अपनी सादगी पसंद छवि के लिए जाने जाते हैं। कई बार वे साइकिल पर संसद आते नजर आए हैं। भारतीय प्रशासनिक सेवा की नौकरी से रिटायर होने के बाद मेघवाल ने राजनीति में एंट्री की थी। बुनकर से आईएएस के अधिकारी रहे अर्जुन राम मेघवाल का जीवन काफी सघर्ष भरा रहा। वह बुनकर परिवार में जन्में, उन्होंने पढ़ाई पूरी करने के बाद प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी की और टेलीफोन ऑपरेटर के रूप में भी काम किया था।

ऐसे होते हैं ईमानदार मुख्यमंत्री

त्रिपुरा के पूर्व मुख्यमंत्री माणिक सरकार भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) से हैं। वह अपनी सादगी के लिए ही जाने जाते हैं। सरकार की पत्नी का नाम पंचाली भट्टाचार्य है। पंचाली सोशल वेलफेयर बोर्ड की कर्मचारी थीं, जो 2011 में सेवानिवृत्त हो गईं। भारत सरकार के वह ऐसे एकमात्र मुख्यमंत्री थे, जिनके पास अपनी कार और घर नहीं था। कहते हैं उनकी पत्नी सब्जी खरीदने रिक्शे से जाती हैं। सरकार अब अपने दादाजी के एक पुराने और छोटे घर में रहते हैं और मुख्यमंत्री रहते समय वेतन और अब पेंशन का कुछ भाग दान कर देते हैं।

आम आदमी की तरह लगाते हैं झाड़ू

बैजनाथ रावत उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले में स्थित हैदरगढ़ विधानसभा से विधायक हैं। बैजनाथ रावत भारतीय जनता पार्टी के सदस्य हैं। आज भी बैजनाथ रावत अपने पक्के लेकिन प्लास्टर और फर्श के बगैर बदसूरत से लगने वाले मकान में रहते हैं।

वह खुद अपने घर के बाहर दरवाजे पर एक आम आदमी की तरह झाड़ू लगाते हैं। जानवरों के लिए मशीन में चारा काटकर अपने हाथों से खिलाते हैं और यही नहीं वो खेतों में फसल बोने से लेकर फसल काटने तक का काम एक आम किसान की तरह खुद ही करते हैं।

ऐसे विधायक जिनको गुरूर छू भी न पाया

उत्तर-प्रदेश के बहराइच जिले के बलहा उपचुनाव में बीजेपी कैंडिडेट को हराकर सपा से विधायक बने बंशीधर बौद्ध आज भी घांसफूस से बने घर में रहते हैं। उन्हें विधायक बनने का कभी गुरूर नहीं रहा। वह सुबह होते ही खेतों में हल, बैल लेकर पहुंच जाते थे। इसके बाद जनता की सेवा में दिन बिताते हैं। कभी पंचर बनाकर अपने परिवार का गुजारा करने वाले बंशीधर बौद्ध की तरह उनका परिवार भी सादगी से भरा हुआ है।

इन्हें लेशमात्र भी घमंड नहीं

मप्र के दमोह से सांसद प्रह्लाद पटेल दिखावे और जमाने के ढकोसलों से दूर, वे ज़मीन से जुड़े नेता हैं। वह सांसद के साथ वे केन्द्रीय मंत्री भी रह चुके हैं, लेकिन लेशमात्र भी घमंड नहीं। आप चाहे उनके दिल्ली वाले सरकारी आवास पर चले जाएं या फिर मप्र वाले घर, खाली पेट वे नहीं जाने देंगे और यह स्थिति हर खास-ओ-आम के लिए है इसलिए मप्र में सिवनी से लेकर छिन्दवाड़ा तक और बालाघाट से लेकर दमोह तक या फिर सुदूर मणिपुर में उन्हें आम लोगों का समान स्नेह मिलता है।

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