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चीन / कोविड 19 को रोकना ‘अग्नि परीक्षा’, जन सहयोग से पाया काबू

  • अखिल पाराशर, लेखक चीन के बीजिंग शहर में रहते हैं वो चाइना मीडिया ग्रुप में वरिष्ठ पत्रकार हैं।

पिछले कुछ साल में चीन ने अपनी राष्ट्रीय शासन प्रणाली और क्षमता के बल पर कई उपलब्धियां हासिल की हैं और तरक्की की गाथा लिखी है, साथ ही उसने दुनिया भर में व्यापक वाहवाही भी बटोरी है। लेकिन अचानक से कोविड-19 महामारी के फैलने से देश की राष्ट्रीय शासन प्रणाली और क्षमता के सामने एक बड़ी चुनौती आ गई है। यह महामारी देश की राष्ट्रीय शासन क्षमता के लिए एक ‘अग्नि परीक्षा’ है।

खैर, इस समय चीन में देश के शीर्ष विधायिका और राजनीतिक सलाहकार निकाय की सबसे बड़ी राजनीतिक सभा चल रही है, जिसे ‘दो सत्र’ भी कहा जाता है। और इस वार्षिक सत्र के दौरान चीन की राष्ट्रीय शासन प्रणाली और क्षमता पर सभी का ख़ासा ध्यान बना हुआ है।

पिछले साल अक्टूबर में कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना (सीपीसी) की 19वीं केंद्रीय समिति के चौथे पूर्णाधिवेशन के बाद इस साल यह पहला संसदीय सत्र है। चीनी विशेषताओं के साथ समाजवाद की बुनियादी प्रणाली को बनाए रखने और सुधार करने, साथ ही चीन की राष्ट्रीय शासन प्रणाली और क्षमता के आधुनिकीकरण को आगे बढ़ाकर, चीन न केवल अपनी छवि और भावना दिखा रहा है, बल्कि दुनिया को भी चमत्कृत कर रहा है।

इस कोविड 19 महामारी के दौरान चीन की कम्युनिस्ट पार्टी और सरकार ने अपने 140 करोड़ लोगों के जीवन को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है और महामारी के विरुद्ध लड़ाई में राष्ट्रीय शक्ति जुटाई है।

दरअसल, चीन ने कोरोना से लड़ने को एक जनयुदध माना है। इस जनयुद्ध में चीन सरकार को अपने लोगों का पूरा साथ मिला है, जिसकी वजह से एक महीने में, देश ने वायरस के प्रसार पर अंकुश लगा दिया, दो महीने में, रोजाना बढ़ते नए घरेलू मामलों को सीमित करते हुए एकल अंक पर ला दिया। तीन महीने में, वुहान और हुपेई को बचाने के लिए उल्लेखनीय प्रगति हासिल की, जो कोविड-19 के पूर्व अभिकेंद्र (एपिसेंटर) थे।

आज चीन ने महामारी पर काबू पा लिया है, साथ ही कामकाज और उत्पादन बहाल कर लिया है, उसका पूरा श्रेय सीपीसी नेतृत्व और समाजवादी प्रणाली को जाता है। और इस मोड़ पर चीन जो संसदीय सत्र का आयोजन कर रहा है, उससे चीन की राष्ट्रीय प्रशासन की उच्च क्षमता झलकती है।

इस साल संसदीय सत्र के दौरान शासन के कई मुद्दे पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच रहे हैं, जैसे कि प्रमुख महामारी की रोकथाम और नियंत्रण तंत्र में सुधार, राष्ट्रीय सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकालीन प्रबंधन प्रणाली में सुधार, पूरी तरह से गरीबी खत्म करना, चौतरफा तरीके से समृद्ध समाज का निर्माण करना, साथ ही नागरिक संहिता के मसौदे पर विचार-विमर्श करना।

चीन का संसदीय सत्र मौजूदा और दीर्घकालिक दोनों मुद्दों को संबोधित करने के लिए चीन के शासन की शक्ति और दृष्टि प्रदान करता है। आज दुनिया अस्थिरता और अनिश्चितताओं से भर गई है, इसलिए शासन में सुधार करना धीरे-धीरे एक प्रमुख मुद्दा बनता जा रहा है। कोविड-19 महामारी वैश्विक अर्थव्यवस्था में 3 प्रतिशत की गिरावट और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में बड़ी मंदी का कारण बन सकती है।

वैश्विक अर्थव्यवस्था और विकास की गंभीर और जटिल स्थिति को देखते हुए, शासन प्रणाली और क्षमता में सुधार करना बहुत ही आवश्यक है। चीन ने खुद काम को अंजाम देकर अच्छी तरह से बतलाया है कि सबसे अच्छा शासन क्या होता है- लोगों को प्राथमिकता देना और उन्हें लाभ पहुंचाना।

देखा जाए तो इस संसदीय सत्र के दौरान सभी मुद्दों, चाहे गरीबी उन्मूलन हो, समृद्ध समाज का निर्माण हो, कानून का शासन हो या फिर सुधार, खुलेपन और नवाचार के प्रमुख विकास एजेंडे हो, का उद्देश्य लोगों के कल्याण को बढ़ाने और उनके लाभ, खुशी और सुरक्षा की भावना में सुधार करना ही है। चीन के शासन का अनुभव उन देशों के लिए बहुत मूल्यवान साबित हो सकता है, जिन्हें तत्काल महामारी की बुरी छाया से बाहर निकलने की आवश्यकता है।

वैसे भी महान संस्थान के बिना महान शासन प्राप्त नहीं किया जा सकता है। चीन का संसदीय सत्र, जो व्यापक सार्वजनिक राय और बुद्धिमत्ता को आकर्षित करता है, वे वास्तव में चीन के संस्थागत लाभों का प्रकटन हैं। इस तरह के संस्थागत लाभ चुनौतियों से निपटने और लक्ष्यों को पूरा करने के लिए चीन का एक तेज हथियार है।

चीन ने जो करके दिखाया है वो चुनौतियों से निपटने और दीर्घकालिक विकास को खोजने के लिए दुनिया को बुद्धिमत्ता और शक्ति का योगदान दिया है।

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